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    अब दिल्ली के फुटपाथों पर नहीं बनेंगे ईवी चार्जिंग स्टेशन, पार्किंग और खाली जमीनों का होगा इस्तेमाल

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 11:22 PM (IST)

    दिल्ली में फुटपाथ पर बने ईवी चार्जिंग स्टेशन जाम और दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं, जिससे दिल्लीवासियों को परेशानी हो रही है। सरकार इसे गलत मानती है ले ...और पढ़ें

    देशबंधू गुप्ता रोड पर पहांड़ गंज चौक के पास फुटपाथ पर बना बैटरी स्वैपिंग स्टेशन।  जागरण

    देशबंधू गुप्ता रोड पर पहांड़ गंज चौक के पास फुटपाथ पर बना बैटरी स्वैपिंग स्टेशन।  जागरण


    HighLights

    1. फुटपाथ पर ईवी चार्जिंग स्टेशन से जाम, दुर्घटना का खतरा।

    2. सरकार पुराने समझौतों के कारण स्टेशन हटाने में असमर्थ।

    3. नई ईवी नीति में फुटपाथ पर स्टेशन नहीं बनेंगे।

    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। आप सरकार के कार्यकाल में पीडब्ल्यूडी की सड़कों के किनारे फुटपाथपर चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की दी गई अनुमति अब दिल्लीवासियों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। इन स्थानों पर जाम लगने के साथ ही सड़क दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

    वर्तमान सरकार पूर्व सरकार के निर्णय को गलत तो बती रही है, लेकिन फुटपाथ पर बन गए चार्जिंग प्वाइंट को हटाने को तैयार नहीं है। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का कहना है कि निजी कंपनियों के साथ आमतौर पर 10 वर्षों का समझौता होता है, इस कारण पहले से फुटपाथ पर स्थापित चार्जिंग प्वाइंट को हटाना आसान नहीं है।

    अगस्त, 2020 में आप सरकार ने नई ईवी नीति घोषित की थी। उस समय सरकार ने दिल्ली को ईवी राजधानी के रूप में विकसित करने का दावा किया था। इसके लिए वाहनों की खरीद पर सब्सिडी तो दी गई, परंतु चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।

    इसके लिए न तो उचित स्थान चयन की कोई प्रक्रिया अपनाई गई और न ही भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा गया। सितंबर, 2022 में सरकार ने पीडब्ल्यूडी की 20 सड़कों के किनारे 100 चार्जिंग प्वाइंट बनाने की अनुमति दी गई, जिससे कई सड़कों के फुटपाथ पर इसे स्थापित कर दिया। उन स्थानों पर वाहन चालकों और पैदल चलने वाली परेशानी बढ़ गई है।

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    वहीं, ई-वाहनों को बढ़ावा देने के लिए रेखा गुप्ता सरकार ने एक जुलाई को नई ''ईवी नीति 2026'' अधिसूचित की है। इसमें वाहन खरीदारों को सब्सिडी देने के साथ-साथ अगले चार वर्षों में ईवी चार्जिंग प्वाइंट की संख्या 9,000 से बढ़ाकर 32,000 करने का लक्ष्य रखा गया है।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि चार्जिंग स्टेशन बनाने के लिए भूमि की कमी नहीं होगी। अब फुटपाथ पर चार्जिंग प्वाइंट नहीं बनाए जाएंगे। राजस्व विभाग सहित अन्य संबंधित विभाग सर्वे करके भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे।

    नई नीति के प्रविधानों के अनुसार, प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी को राजस्व विभाग के साथ मिलकर भूमि की पहचान करने का अधिकार दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि अगले चार वर्षों में चरणबद्ध तरीके से चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाई जाएगी।

    इसके लिए मेट्रो व नगर निगम की पार्किंग, मॉल और बाजारों की निर्धारित पार्किंग, पेट्रोल पंपों, बस डिपो तथा खाली पड़ी सरकारी जमीनों का उपयोग किया जाएगा। अनधिकृत कालोनियों और सार्वजनिक स्थानों पर भी यातायात या पैदल यात्रियों को बाधित किए बिना चार्जिंग विकल्प उपलब्ध कराने का प्रयास है।

    कोई भी उपभोक्ता निजी या व्यावसायिक उपयोग के लिए चार्जिंग प्वाइंट स्थापित कर सकता है। बिजली वितरण कंपनियां निर्धारित मानदंडों को पूरा करने पर उन्हें बिजली कनेक्शन प्रदान करती हैं। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग द्वारा ईवी चार्जिंग प्वाइंट के लिए बिजली की दरें निर्धारित की गई हैं।

    हाई-टेंशन लाइन से कनेक्शन वाले स्टेशनों को चार रुपये प्रति यूनिट और लो-टेंशन लाइन वाले कनेक्शनों को 4.50 प्रति यूनिट की दर से बिजली आपूर्ति की जाती है।

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