Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    सत्तू, ग्लूकोज और घमौरी पाउडर... श्रमिकों को दिल्ली सरकार की 'समर किट' में मिलेंगी ये 9 जरूरी चीजें

    Updated: Tue, 19 May 2026 09:51 PM (IST)

    दिल्ली सरकार भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए निर्माण श्रमिकों को विशेष समर किट वितरित करेगी। इन किटों में सत्तू, ओआरएस, शरबत, गमछा और अन्य आवश्यक साम ...और पढ़ें

    दिल्ली सरकार भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए निर्माण श्रमिकों को विशेष समर किट वितरित करेगी। इमेज एआई

    दिल्ली सरकार भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए निर्माण श्रमिकों को विशेष समर किट वितरित करेगी। इमेज एआई

    HighLights

    1. निर्माण श्रमिकों को गर्मी से राहत के लिए किट।

    2. किट में सत्तू, ओआरएस, गमछा जैसी सामग्री।

    3. लगभग एक लाख पंजीकृत श्रमिकों को मिलेगा लाभ।

    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए दिल्ली सरकार निर्माण श्रमिकों को सत्तू, ओआरएस, शरबत सिरप, घमौरी पाउडर, गमछा और अन्य सामग्री युक्त विशेष किट वितरित करेगी। सरकार ने दिल्ली भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड में पंजीकृत लगभग एक लाख श्रमिकों को समर किट की खरीद, पैकेजिंग और वितरण के लिए एक सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई को नियुक्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

    श्रम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक किट में नौ वस्तुएं होंगी, जिनमें 250 ग्राम इंस्टेंट एनर्जी ग्लूकोज, एक किलो प्रीमियम गुणवत्ता वाला सत्तू (भुना हुआ चना आटा), 30 ओरल रिहाइड्रेशन सोल्यूशन (ओआरएस) पाउच, सूती गमछा (तौलिया), धूप से बचाव वाली टोपी, घमौरी पाउडर, एक लीटर पानी की बोतल और 250 मिली शरबत कंसंट्रेट शामिल हैं। इन्हें एक टिकाऊ बैग में रखा जाएगा। हर किट के वितरण की अनुमानित लागत 1,890 रुपये है।

    अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली सरकार मानती है कि बाहरी और श्रमसाध्य कार्यों में लगे निर्माण श्रमिक भीषण गर्मी और लू से संबंधित व्यावसायिक जोखिमों जैसे निर्जलीकरण, ऊष्मा तनाव, थकान और संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं। यह बात बोर्ड द्वारा जारी प्रस्ताव अनुरोध (आरएफपी) दस्तावेज़ में कही गई है।

    बोर्ड का उद्देश्य लगभग 1,00,000 पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को ग्रीष्मकालीन किट की समय पर आपूर्ति और वितरण सुनिश्चित करना है ताकि उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और समग्र कार्य स्थितियों में सुधार हो सके। हालांकि परिस्थितियों के अनुसार निर्माण श्रमिकों की संख्या घट या बढ़ सकती है। दस्तावेज़ में कहा गया है कि निर्माण स्थल पर कार्यरत श्रमिकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

    गौरतलब है कि बोर्ड के पास दिल्ली में निर्माण स्थलों पर कार्यरत निर्माण श्रमिकों से संबंधित वास्तविक समय का प्रमाणित डेटा नहीं है। इसलिए अनुमानित लाभार्थी कवरेज बोर्ड के डेटाबेस में दर्ज सक्रिय और नवीनीकृत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के आधार पर निर्धारित किया गया है। लाभार्थियों की संख्या अस्थायी है व बोर्ड के रिकार्ड में उपलब्ध सक्रिय पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के आधार पर अनुमानित की गई है। ऐसे में निर्माण संबंधी बाहरी गतिविधियों में लगे श्रमिकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

    यह भी पढ़ें: भूकंप भी नहीं हिला पाएगा इसकी बुनियाद! दिल्ली में देश का सबसे लंबा स्टील नेटवर्क ब्रिज तैयार