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    प्राथमिकी न बनने वाली शिकायतें भी एनसीआरबी पोर्टल पर हों शामिल: दिल्ली हाई कोर्ट

    Updated: Sun, 08 Feb 2026 12:54 AM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने एनसीआरबी पोर्टल पर प्राथमिकी में न बदलने वाली शिका ...और पढ़ें

    दिल्ली हाई कोर्ट ने देश के आपराधिक न्याय डाटा प्रणाली को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाने का दिया निर्देश।

    दिल्ली हाई कोर्ट ने देश के आपराधिक न्याय डाटा प्रणाली को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाने का दिया निर्देश।

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    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने देश के आपराधिक न्याय डाटा प्रणाली को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए निर्देश दिया है कि प्राथमिकी में तब्दील न होने वाली शिकायतों और अदालतों में लंबित या निपटाए गए शिकायत मामलों का डाटा भी एनसीआरबी पोर्टल पर जोड़ने की संभावनाएं तलाशी जाएं।

    न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने एनसीआरबी के निदेशक और एनआइसी के डीडीजी से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है कि इस तरह के डाटा को पोर्टल से जोड़ने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

    हाई कोर्ट ने कहा कि एनसीआरबी पोर्टल पर सिर्फ प्राथमिकी और दंडित मामलों का डाटा काफी नहीं है। इसमें जेल में बंद कैदियों के खिलाफ अन्य लंबित मामलों, प्राथमिकी में न बदली शिकायतों और अदालतों में लंबित व निपटाए गए निजी शिकायत मामलों का रिकार्ड भी शामिल होना चाहिए।

    कोर्ट ने यह टिप्पणी परवीन तनेजा की अपील पर सुनवाई के दौरान की, जिसे पत्नी की हत्या के मामले में उम्रकैद हुई है। कोर्ट ने अपीलकर्ता की सजा निलंबन और जमानत की मांग को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि दो गवाहों ने मौके पर आरोपित की मौजूदगी की पुष्टि की है और घटनास्थल की तस्वीरें हत्या की क्रूरता दिखाती हैं।

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    हाई कोर्ट ने पहले भी सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा था कि जमानत या सजा निलंबन मांगने वालों के आपराधिक इतिहास की पूरी जानकारी जरूरी है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि आवेदक हलफनामे के जरिए अपना आपराधिक रिकार्ड बताएं और कोर्ट डाटा को एनसीआरबी पोर्टल से जोड़ा जाए, ताकि बार-बार जानकारी न मिलने के कारण मामलों में देरी न हो।

    इसके साथ ही कोर्ट ने दिल्ली विधिक सेवाएं प्राधिकरण (दक्षिण-पूर्व) से पीड़ित परिवार को मुआवजे की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है। मामले में अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी।

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