केजरीवाल-सिसोदिया को दिल्ली हाई कोर्ट ने दी आखिरी मोहलत, आबकारी घोटाला केस में 2 हफ्ते में देना होगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने आबकारी घोटाला मामले में सीबीआई की अपील पर अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया है। ...और पढ़ें

अदालत ने केजरीवाल सहित अन्य को दो सप्ताह के अंदर अपना जवाब दाखिल करने को कहा। फाइल फोटो
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट ने दी आखिरी मोहलत।
केजरीवाल, सिसोदिया, पाठक को जवाब देना है।
आबकारी घोटाला मामले में सीबीआई की अपील।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। आबकारी घोटाला मामले में आरोपमुक्त करने के ट्रायल कोर्ट के निर्णय के खिलाफ सीबीआई की अपील याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्य अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया व आप नेता दुर्गेश पाठक को जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया है। न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने कहा कि रजिस्ट्री से मिली रिपोर्ट के मुताबिक, इन तीनों नेताओं ने अभी तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया है।
पीठ ने कहा कि इस मामले में आप नेताओं को पहले भी मौका दिया गया है, लेकिन न्याय के हित में उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए एक आखिरी मौका दिया जा रहा है। अदालत ने केजरीवाल सहित अन्य को दो सप्ताह के अंदर अपना जवाब दाखिल करने को कहा।
सुनवाई के दौरान सीबीआइ की तरफ से सालिसिटर तुषार मेहता व ईडी की तरफ से एडिशनल सालिसिटर जनरल एसवी राजू मौजूद रहे। हालांकेि, अधिवक्ताओं के कार्य से विरत रहने के कारण प्रतिवादियों की तरफ से कोई भी अधिवक्ता पेश नहीं हुआ। तुषार मेहता ने कहा कि मामले में तीनों प्रतिवादियों ने अब तक जवाब नहीं दाखिल किया।
इस पर पीठ ने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए आखिरी मौका देते हुए सुनवाई 17 और 18 अगस्त के स्थगित कर दी। पीठ ने यह भी कहा कि जांच एजेंसी के तर्काें को सुनने के बाद प्रतिवादी आरोपितों की दलीलें सुनने के लिए समय-सारणी तय की जाएगी।
खबरें और भी
साथ ही यह भी कहा कि समय सारणी का सख्ती से पालन किया जाएगा ताकि मामले में और देरी न हो। सभी पक्षों को मामले में संक्षिप्त लिखित दलीलें दाखिल करने की अनुमति देते हुए कहा कि पूर्व में जारी किए गए अंतरिम आदेश लागू रहेंगे।
सीबीआइ ने जहां सभी आरोपितों को आरोप मुक्त करने के निर्णय को चुनौती दी है। वहीं, ईडी ने प्रकरण में ट्रायल कोर्ट द्वारा की गई कुछ प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने का निर्देश देने की मांग की है।
पूर्व में इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष हो रही थी। हालांकि, केजरीवाल सहित कुछ अन्य आराेपितों के सुनवाई से बहिष्कार करने के बाद विवाद हुआ था। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा केजरीवाल सहित आप नेताओं के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के बाद मामले को न्यायमूर्ति मनोज जैन को स्थानांतरित कर दिया गया था। 27 फरवरी को, ट्रायल कोर्ट ने मामले में सभी 23 आरोपितों को बरी कर दिया था।