PM आवास के पास तीन झुग्गी बस्तियों को हटाने पर दिल्ली HC ने लगाई रोक, 717 निवासियों के पुनर्वास पर होगी सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री आवास के पास तीन झुग्गी बस्तियों को हटाने पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट अब 717 निवासियों के पुनर्वास पर सुनवाई करेगी। ...और पढ़ें
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अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई तक जिन लोगों ने अभी तक अपने घर खाली नहीं किए हैं, उन्हें जबरन नहीं हटाया जाए।
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट ने झुग्गी बस्तियों पर रोक लगाई।
पीएम आवास के पास तीन बस्तियों का मामला।
717 निवासियों के पुनर्वास पर होगी सुनवाई।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित तीन झुग्गी बस्तियों के निवासियों को बड़ी राहत देते हुए फिलहाल उनके खिलाफ कोई भी कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई तक जिन लोगों ने अभी तक अपने घर खाली नहीं किए हैं, उन्हें जबरन नहीं हटाया जाए।
अगली सुनवाई 26 मई को होगी
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने भाई राम कैंप, डीआइडी कैंप और मस्जिद कैंप के कुछ निवासियों की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम राहत दी। यह तीनों झुग्गी बस्तियां लोक कल्याण मार्ग के पास स्थित हैं, जहां प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास मौजूद है। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 26 मई के लिए तय की है।
आने-जाने में परेशानी न हो
अदालत ने केंद्र सरकार, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) और अपीलकर्ताओं के वकीलों से पुनर्वास व्यवस्था को लेकर निर्देश लेने को कहा। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि पुनर्वास स्थल पर पानी, सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति जांचने के लिए एक आयोग गठित किया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा कि क्या विस्थापित किए जाने वाले लोगों को कुछ समय के लिए मेट्रो और बस पास उपलब्ध कराए जा सकते हैं, ताकि उन्हें आने-जाने में परेशानी न हो।
15 दिन में जगह खाली करने का निर्देश
झुग्गी निवासियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत से कहा कि निवासियों को 25 मई तक मकान खाली करने का नोटिस दिया गया है, इसलिए तब तक उन्हें संरक्षण दिया जाए। इस पर अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि कानून अधिकारी, एएसजी और डूसिब के वकील यहां मौजूद हैं, सोमवार तक कुछ मत कीजिए। इससे पहले 11 मई को एकल पीठ ने तीनों झुग्गी बस्तियों को हटाने की कार्रवाई में हस्तक्षेप से इंकार कर दिया था और निवासियों को 15 दिन के भीतर जगह खाली करने का निर्देश दिया था।
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तीनों बस्तियों में 717 निवासी
केंद्र सरकार ने अदालत में कहा था कि ये झुग्गी-झोपड़ी क्लस्टर संरक्षित क्षेत्र में आते हैं और एक सक्रिय एयरफोर्स स्टेशन के ठीक पास स्थित हैं। सरकार के अनुसार, रक्षा ढांचे की सुरक्षा मजबूत करने और अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक एवं सुरक्षा कारणों से अवैध निर्माण हटाने का फैसला लिया गया। सरकार ने यह भी कहा कि आस-पास वैकल्पिक जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण इन-सीटू पुनर्वास संभव नहीं है। इसलिए तीनों बस्तियों के 717 निवासियों को सावदा घेवरा में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है।