'सिर्फ पति की आय के आधार पर पत्नी को नहीं दिया जा सकता अंतरिम गुजारा-भत्ता', दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला
दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि पत्नी को अंतरिम गुजारा-भत्ता सिर्फ पति की आय के आधार पर नहीं दिया जा सकता। अदालत ने एक मामले में 30 हजार रुपये ...और पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि सिर्फ पति की आय के आधार पर पत्नी को अंतरिम गुजारा-भत्ता नहीं दिया जा सकता है।
HighLights
अंतरिम गुजारा-भत्ता सिर्फ पति की आय पर आधारित नहीं।
पत्नी की क्षमता और अन्य आय भी महत्वपूर्ण मानी जाएगी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 30 हजार से 25 हजार किया गुजारा-भत्ता।
विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। अंतरिम भरण-पोषण देने के पारिवारिक अदालत के निर्णय में संशोधन करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि सिर्फ पति की आय के आधार पर पत्नी को अंतरिम गुजारा-भत्ता नहीं दिया जा सकता है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के एक साधन-संपन्न व्यक्ति होने पर भी अंतरिम भरण-पोषण देते समय विचार करने वाली सभी जरूरी बातों को अदालत नजरअंदाज नहीं कर सकती।
न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने अपीलकर्ता व प्रतिवादी महिला के अधिकारों और दायित्वों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। पीठ ने उक्त टिप्पणी करते हुए 30 हजार रुपये महीना भरण-पोषण देने के अंतरिम आदेश में संशोधन करते हुए इसे अपील याचिका दायर करने की तारीख से 25 हजार रुपये कर दिया। अदालत ने अपीलकर्ता को निर्देश दिया कि वह पांच जून 2024 के आदेश के तहत संशोधित भरण-पोषण देगा।
अंतरिम भरण-पोषण में संशोधन करने का निर्देश देने की मांग
अपीलकर्ता व्यक्ति ने अधिवक्ता पीयूष गुप्ता के माध्यम से दायर याचिका में अंतरिम भरण-पोषण में संशोधन करने का निर्देश देने की मांग की। पीयूष गुप्ता ने तर्क दिया कि शादी से अपीलकर्ता व महिला को दो बच्चे हुए और वे दोनों ही अपीलकर्ता के साथ रहते हैं।
अपीलकर्ता ही अपनी बड़ी बेटी के एमबीबीएस का खर्च वहन कर रहा है। यह भी तर्क दिया कि एक शिक्षित महिला होने के नाते प्रतिवादी अपना खर्च उठाने के लिए समक्ष है और उसे एफडी सहित अन्य माध्यम से ब्याज से भी कमाई होती है। यह भी तर्क दिया कि प्रतिवादी वर्तमान में याचिकाकर्ता के ही लग्जरी फ्लैट में रहती है।
खबरें और भी
ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित किया गया अंतरिम आदेश तथ्यों के आधार पर
अधिवक्ता पीयूष गुप्ता ने ट्रायल कोर्ट के अंतरिम भरण-पोषण के आदेश को रद करने की मांग की। वहीं, महिला की तरफ पेश हुई अधिवक्ता ने कहा कि अपीलकर्ता की सालाना 63 लाख रुपये से अधिक है और ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित किया गया अंतरिम आदेश तथ्यों के आधार पर था।
उन्होंने यह भी कहा कि यह अपील कानून का दुरुपयोग है और इसे खारिज कर दिया जाना चाहिए। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद अंतरिम भरण-पोषण के आदेश में संशोधन करते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।