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    पेड़ काटने की अनुमति पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, दो वन अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराया

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 11:33 PM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने पेड़ काटने या प्रत्यारोपित करने की अनुमति देने संबंधी पूर्व आदेश की अवहेलना पर दो अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराया है। कोर्ट न ...और पढ़ें

    दो अधिकारी पेड़ काटने की अनुमति देने पर दोषी।

    दो अधिकारी पेड़ काटने की अनुमति देने पर दोषी।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। पेड़ काटने या प्रत्यारोपित करने की अनुमति देने से पहले ट्री-आफिसर को कारण बताने से संबंधी कोर्ट के पूर्व आदेश की अवहेलना करने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने दो अधिकारियों को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया है। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने कहा कि ट्री-आफिसर सिर्फ इसलिए पेड़ काटने या प्रत्यारोपित करने की अनुमति नहीं दे सकता क्योंकि वे किसी प्रस्तावित इमारत के प्रवेश द्वार में बाधा डाल रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि इस तरह के रवैये से शहर में पेड़ ही नहीं बचेंगे। पीठ ने मामले में ट्री-आफिसर मनदीप मित्तल और प्रधान मुख्य वन संरक्षक सीडी सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा कि उन्हें अदालत की अवमानना के लिए सजा क्यों न दी जाए। मामले में अगली सुनवाई दो सितंबर को होगी।

    मामले में दायर अववमानना याचिका में आरोप लगाया गया था कि ग्रेटर कैलाश-दो में दो पूरी तरह से विकसित पेड़ों को स्थानांतरित करने की अनुमति के आधार पर काट दिया गया, जबकि इसके लिए कोई कारण या तरीका रिकार्ड नहीं किया गया था।

    पीठ ने कहा कि अगर मुख्य मार्ग में आने के कारण इमारतों के निर्माण के लिए पेड़ों को काटने या दूसरी जगह लगाने की अनुमति दी जाती है, तो जल्द ही ऐसी स्थिति आ जाएगी कि कालोनी में कोई पेड़ नहीं बचेगा, क्योंकि ज्यादातर पेड़ परिसर की इमारत की दीवार के बाहर फुटपाथ पर लगे हैं।

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    उक्त तथ्यों को देखते हुए अदालत ने ट्री-ऑफिसर मनदीप मित्तल और प्रधान मुख्य वन संरक्षक सीडी सिंह को 28 अप्रैल 2022 और 19 मई 2022 के आदेशों का पालन न करने के लिए अवमानना का दोषी पाया। हाई कोर्ट ने उक्त आदेशों में कहा था कि ट्री-आफिसर काटे जाने वाले पेड़ों का निरीक्षण कर उन्हें दूसरी जगह लगाने की संभावना पर विचार करने के बाद अनुमति देते या इन्कार करते समय फोटो के साथ कारण भी दर्ज कराएं।

    28 फरवरी 2023 को दी गई अनुमति की जांच करने पर कोर्ट ने पाया कि एकमात्र कारण यह बताया गया था कि पेड़ इमारत के प्रस्तावित मुख्य प्रवेश और निकास द्वार के सामने स्थित थे। पीठ ने कहा कि अनुमति देने का कोई कारण या हर पेड़ की फोटो नहीं पेश की गई, जबकि पेड़ाें को काटने की अनुमति संपत्ति के निर्माण को संभव बनाने के लिए दी गई है। पीठ ने नोट किया कि पेड़ उस इमारत के मुख्य आने-जाने के रास्ते के सामने आ रहे हैं जिसे बनाया जाना है। अदालत ने माना कि पेड़ परिसर की बाउंड्रीवाल के अंदर नहीं हैं और फुटपाथ पर थे।

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