दिल्ली HC के आदेश से 4 देशों में भारतीय वीजा सेवाएं प्रभावित, केंद्र ने SC से तत्काल दखल की मांग की
दिल्ली हाई कोर्ट के एक आदेश से अबू धाबी, कुवैत, सिंगापुर और कैनबरा में भारतीय दूतावासों की वीजा और कांसुलर सेवाएं प्रभावित हुई हैं। केंद्र सरकार ने सु ...और पढ़ें

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HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश से वीजा सेवाएं प्रभावित।
अबू धाबी, कुवैत, सिंगापुर, कैनबरा में सेवाएं बाधित।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट के एक हालिया आदेश के बाद विदेशों में भारतीय दूतावासों के जरिए संचालित वीजा, पासपोर्ट और कांसुलर सेवाओं पर असर पड़ा है।
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अबू धाबी (यूएई), कुवैत, सिंगापुर और कैनबरा (ऑस्ट्रेलिया) स्थित भारतीय मिशनों में आउटसोर्स की गई सेवाएं बाधित हो गई हैं, जिससे बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों, ओसीआई कार्डधारकों और विदेशी वीजा आवेदकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि भारत समेत कई देश वीजा और कांसुलर सेवाओं के संचालन के लिए निजी एजेंसियों की मदद लेते हैं।
लेकिन हाई कोर्ट द्वारा चयनित एजेंसी का ठेका निरस्त किए जाने के बाद चार देशों में सेवाओं का सामान्य संचालन प्रभावित हुआ है। उन्होंने बताया कि हालात को संभालने के लिए संबंधित भारतीय मिशनों के कर्मचारियों को आपातकालीन सेवाओं में लगाया गया है।
केंद्र की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई सोमवार को करने पर सहमति जताई।
हाई कोर्ट ने क्यों रद की थी पूरी प्रक्रिया?
दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को चार भारतीय मिशनों के लिए हुई तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया को खारिज कर दिया था। अदालत ने माना कि निविदा प्रक्रिया में अपनाई गई तकनीकी जांच को बरकरार नहीं रखा जा सकता।
इसी के साथ सफल बोलीदाता को दिया गया ठेका भी रद्द कर दिया गया और विदेश मंत्रालय को नई निविदा (RFP) जारी कर पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का निर्देश दिया गया।
केंद्र ने क्या कहा?
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच अबू धाबी, कुवैत, सिंगापुर, कैनबरा और रियाद स्थित भारतीय मिशनों के लिए अलग-अलग निविदाएं जारी की गई थीं।
इनमें दो चरणों वाली प्रक्रिया अपनाई गई थी, जिसमें पहले तकनीकी मूल्यांकन और उसके बाद वित्तीय बोली खोली जानी थी। वित्तीय बोली केवल उन्हीं कंपनियों की खोली जानी थी, जिन्हें तकनीकी मूल्यांकन में न्यूनतम 70 अंक प्राप्त हुए हों।
सरकार के अनुसार, याचिका दायर करने वाली कंपनी ई ट्रैव टेक लिमिटेड सहित सभी प्रतिभागियों ने शुरुआत में मूल्यांकन की शर्तों को स्वीकार किया था। हालांकि, कंपनी तकनीकी मूल्यांकन में आवश्यक अंक हासिल नहीं कर सकी और कई भारतीय मिशनों में अगले चरण के लिए अयोग्य घोषित कर दी गई। इसके बाद उसने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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अब इस मामले में अंतिम राहत को लेकर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को केंद्र सरकार की अपील पर सुनवाई करेगा।
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