दिल्ली HC का बड़ा फैसला: गिरफ्तारी के कारण न बताने पर पोक्सो आरोपी को जमानत, कहा-कारण न देने से पूरी प्रक्रिया अवैध
दिल्ली हाई कोर्ट ने पोक्सो मामले में एक आरोपी को जमानत दी, क्योंकि उसे गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए थे। अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी के कारणों की जानका ...और पढ़ें
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विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। पोक्सो मामले में आरोपित को जमानत देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी न देना आरोपित की गिरफ्तारी और बाद की रिमांड प्रक्रिया को अवैध कर देता है।
अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी पाने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 और 22(1) से उत्पन्न एक मौलिक अधिकार है और इस सुरक्षा का कोई भी उल्लंघन गिरफ्तारी को अवैध बना देता है।
अदालत ने कहा कि अनुच्छेद 22(1) यह आदेश देता है कि गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपित को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी दी जानी चाहिए ताकि वह कानूनी सहायता प्राप्त करने के साथ ही पुलिस रिमांड का विरोध करते हुए जमानत की मांग कर सके।
कई प्रविधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की
जमानत की मांग करते हुए आरोपित ने तर्क दिया था कि उसे न तो गिरफ्तारी के समय और न ही बाद में गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी दी गई और यह उसके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों का उल्लंघन है।
आरोपित के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पाक्सो) और अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के कई प्रविधानों के तहत प्राथमिकी की गई थी।
याचिकाकर्ता पर आरोप है कि नाबालिग का शोषण करने वाले सह-आरोपित को रहने के लिए उसने जगह उपलब्ध कराई थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि उसे गिरफ्तारी के समय न तो गिरफ्तारी के कारणों के बारे में बताया गया और न ही उसके बाद उसे वे कारण उपलब्ध कराए गए।
उसने तर्क दिया कि इस तरह की प्रक्रिया का पालन न होने से पूरी प्रक्रिया ही दोषपूर्ण हुई और वह जमानत पर रिहा होने का हकदार है।
निष्प्रभावी हो जाती है गिरफ्तारी प्रक्रिया
वहीं, जमानत याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा कि आरोपित पर आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और गिरफ्तारी के कारणों का लिखित रूप में न होना अपने आप में गिरफ्तारी को अवैध नहीं बना देता।
हालांकि, हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब गिरफ्तार व्यक्ति द्वारा इस तरह का कोई आरोप या दलील उठाई जाती है, तो यह साबित करने का दायित्व जांच अधिकारी या जांच एजेंसी पर आ जाता है कि उन्होंने प्रक्रिया का उचित पालन किया है या नहीं।
पीठ ने कहा कि दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश हुए सहायक लोक अभियोजक ने यह बात स्पष्ट रूप से स्वीकार की है कि आवेदक को गिरफ्तारी के समय या उसके बाद गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए थे, बल्कि वे बहुत देरी से उपलब्ध कराए गए थे। इसके कारण गिरफ्तारी की पूरी प्रक्रिया ही निष्प्रभावी हो जाती है।
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