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    640 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अग्रिम जमानत से इनकार, जांच एजेंसियों के अधिकार पर HC की अहम टिप्पणी

    Updated: Mon, 02 Feb 2026 09:58 PM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने ₹640 करोड़ के साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दो आरोपियों, भास्कर यादव और अशोक कुमार शर्मा, की अग्रिम जमानत याचिक ...और पढ़ें

    मनी लाॅन्ड्रिंग मामले में दो आरोपितों की अग्रिम जमानत खारिज करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने की टिप्पणी। फोटो: आर्काइव

    मनी लाॅन्ड्रिंग मामले में दो आरोपितों की अग्रिम जमानत खारिज करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने की टिप्पणी। फोटो: आर्काइव

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    विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। 640 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मनी लाॅन्ड्रिंग मामले में दो आरोपितों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने कहा कि अदालत काे किसी व्यक्ति की निजी आजादी के अधिकार और जांच एजेंसी के आरोपित से पूछताछ करने के अधिकार के बीच संतुलन बनाना चाहिए।

    निश्चित तौर पर किसी व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता सबसे जरूरी है, लेकिन अदालत देश की अर्थव्यवस्था के बड़े हित में सही पूछताछ और जांच करने की जरूरत को नजरअंदाज नहीं कर सकती। अदालत ने उक्त टिप्पणी करते हुए आरोपित भास्कर यादव और अशोक कुमार शर्मा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

    पीठ ने कहा कि मनी लाॅन्ड्रिंग के तहत बरी करने या दोषी ठहराने के आखिरी फैसले और जमानत देने या न देने के आदेश के बीच एक नाजुक संतुलन बनाए रखना होता है। पीठ ने कहा कि आरोपितों को साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों को निपटाने के लिए स्थानीय पुलिस को रिश्वत देते हुए पाया गया है और उन्होंने इलेक्ट्राॅनिक सुबूतों को नष्ट कर दिया है।

    इतना ही नहीं बैंक अधिकारियों की भूमिका का भी पता लगाना बाकी है। इन बदले हुए हालात को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को हिरासत में पूछताछ करने के मौके से वंचित नहीं किया जा सकता है।

    वहीं, जमानत की मांग करते हुए आरोपितों ने तर्क दिया कि क्रिप्टोकरेंसी डीलिंग अपने आप में गैर-कानूनी नहीं है और उन्होंने जांच में सहयोग किया था। वहीं, सह-आरोपितों को जमानत मिल चुकी है।

    हालांकि, जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि यह सिर्फ क्रिप्टोकरेंसी में डीलिंग का मामला नहीं है, बल्कि यह पैसे के मूवमेंट का एक बड़ा जाल दिखाता है, जो मध्यम वर्ग के भोले-भाले निवेशकों की जेब से धोखे से निकाला गया था।

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    यह है मामला

    याचिका के अनुसार सीबीआई ने मामले में अगस्त 2022 में साइबर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था और इसी प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने मनी लाॅन्ड्रिंग का मामला शुरू किया। जांच में सामने आया कि भारत में बैंकों द्वारा भारतीय खाताधारकों को जारी किए गए बड़ी संख्या में डेबिट कार्ड का यूएई के पेपल प्लेटफाॅर्म के जरिए गलत इस्तेमाल किया गया था।

    ताकि साइबर धोखाधड़ी से होने वाली कमाई को निकाला जा सके। कुल मिलाकर विभिन्न बैंकों के 5599 अकाउंट से अगस्त 2023 से दिसंबर 2023 की अवधि के दौरान पेपल के साथ ट्रांजैक्शन की पहचान की गई। जांच में यह भी सामने आया था कि 30 मोबाइल फोन से जुड़े लगभग 68 बैंक अकाउंट में पेपल प्लेटफाॅर्म पर कुल 100 करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन किया।

    32 बैंक अकाउंट से जुड़े लगभग 10 मोबाइल फोन से पेपल प्लेटफाॅर्म पर 78 करोड़ रुपये से ज्यादा अपलोड किए और उक्त 10 मोबाइल फोन नंबर में से सात फोन आरोपितों के थे। इसके जरिए आरोपित अपराध की कमाई की मनी लाॅन्ड्रिंग कर रहे थे। आरोपितों ने पेपल प्लेटफाॅर्म पर 65 करोड़ रुपये से ज्यादा का ट्रांजैक्शन किया था।

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