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    जज के खिलाफ प्राथमिकी की मांग पर दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकारा, यूट्यूब पर वीडियो अपलोड करने से रोका

    Updated: Wed, 25 Mar 2026 09:03 PM (GMT+05:30)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता को जज के खिलाफ FIR की मांग करने और ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही YouTube पर अपलोड करने के लिए कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने ...और पढ़ें

    पीठ ने ट्रायल कोट की कार्यवाही को यूट्यूब पर अपलोड करने के याचिकाकर्ता के रवैये पर भी आपत्ति जताई।

    पीठ ने ट्रायल कोट की कार्यवाही को यूट्यूब पर अपलोड करने के याचिकाकर्ता के रवैये पर भी आपत्ति जताई।

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    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। न्यायिक आदेश में जालसाजी करने का आरोप लगाते हुए जज के खिलाफ प्राथमिकी करने का आदेश देने की मांग को लेकर याचिका दायर करने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने ट्रायल कोट की कार्यवाही को यूट्यूब पर अपलोड करने के याचिकाकर्ता के रवैये पर भी आपत्ति जताई।

    अदालत ने याची को चेतावनी देते हुए कहा कि वह इस वीडियो को किसी भी यूट्यूब चैनल या इंटरनेट मीडिया पर अपलोड न करे। साथ ही पीठ ने यह भी कहा कि भले ही न्यायिक अधिकारी का आचरण कैसा भी रहा हो, अगर आपको प्राथमिकी दर्ज करानी है, तो आपको मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर अनुमति लेनी होगी।

    अदालत ने कहा कि फैसले में मुख्य न्यायाधीश शब्द का प्रयोग किया गया है, न कि मुख्य न्यायाधीश की पीठ। इसके लिए याची को मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर अनुमति लेनी होगी और फिर मुख्य न्यायाधीश प्रशासनिक पक्ष पर आदेश पारित कर सकते हैं। पीठ ने कहा कि यह मुख्य न्यायाधीश की पीठ द्वारा दिया गया न्यायिक आदेश नहीं हो सकता।

    वीडियो पोस्ट किए जाने की आपत्ति जताते हुए पीठ ने याची के अधिवक्ता से कहा कि क्या आपको ऐसा लगता है कि आपकी शिकायतों को यहां नहीं सुना जाएगा और इस वजह से आप यूट्यूब पर अपलोड कर रहे हैं?

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    इसके साथ ही अदालत ने दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और हाई कोर्ट प्रशासन को एक सप्ताह के भीतर दस्तावेज पेश करने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई एक अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने कार्यवाही की वीडियो रिकाॅर्डिंग यूट्यूब पर अपलोड कर दी है, जोकि हाई कोर्ट के वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग नियमों के तहत प्रतिबंधित है।

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