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    'सरकारी रिकॉर्ड में ट्रांसजेंडर की पहचान पर अपना रुख स्पष्ट करें', केंद्र सरकार से दिल्ली HC ने मांगा जवाब

    Updated: Wed, 15 Apr 2026 11:01 PM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने शैक्षणिक और सरकारी दस्तावेजों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान और रिकॉर्डिंग से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब म ...और पढ़ें

    ट्रांसजेंडरों की पहचान को लेकर केंद्र सरकार से मांगा जवाब। फोटो: सांकेतिक

    ट्रांसजेंडरों की पहचान को लेकर केंद्र सरकार से मांगा जवाब। फोटो: सांकेतिक

    HighLights

    1. दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र से ट्रांसजेंडर पहचान पर जवाब मांगा

    2. शैक्षणिक, सरकारी दस्तावेजों में पहचान का मुद्दा अहम

    3. सामाजिक न्याय मंत्रालय को छह सप्ताह में देना होगा जवाब

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। शैक्षणिक और सरकारी दस्तावेजों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान और रिकार्डिंग से जुड़े मुद्दों पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह व न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने कहा कि इस मामले के नतीजे का कई सरकारी रिकार्ड पर दूरगामी असर पड़ सकता है।

    अदालत ने विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सचिव को प्रतिवादी के तौर पर शामिल किया जाए। साथ ही याचिकाओं पर केंद्र सरकार को छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा।

    डीयू-सीबीएसई के प्रमाण पत्रों में पहचान पर सवाल 

    अदालत ने कहा कि याचिकाओं में यह सवाल उठाया गया है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी और सीबीएसई जैसी संस्थाओं द्वारा जारी किए जाने वाले प्रमाण पत्रों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान कैसे की जाती है।

    साथ ही यह भी कहा कि इस मामले में दिए गए किसी भी निर्देश का असर जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों, पासपोर्ट, आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे अन्य सरकारी दस्तावेज पर भी पड़ सकता है।

    अभी तक संशोधन अधिसूचित नहीं किया गया 

    सुनवाई के दौरान सीबीएसई के वकील ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम-2026 का जिक्र करते हुए ट्रांसजेंडर व्यक्ति की कानूनी परिभाषा में हुए बदलावों का जिक्र किया।

    हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि यह संशोधन अभी तक अधिसूचित नहीं हुआ है और कहा कि किसी भी स्थिति में वे संशोधित परिभाषा के दायरे में ही आएंगे।

    उक्त तथ्यों को देखते हुए अदालत ने केंद्र को निर्देश दिए कि यदि जरूरी हो, तो वह अन्य मंत्रालयों से सलाह-मशविरा करे ताकि इस संबंध में व्यापक निर्देश तैयार किए जा सकें। मामले पर अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी।

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