आवारा कुत्तों के आतंक पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, स्वत: संज्ञान लेकर सरकार और MCD से मांगी रिपोर्ट
दिल्ली हाई कोर्ट ने सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार, एमसीडी औ ...और पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट ने सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का स्वतः संज्ञान लिया है।
HighLights
हाई कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट निर्देशों का संज्ञान लिया।
दिल्ली सरकार, एमसीडी से 31 जुलाई तक रिपोर्ट मांगी गई।
कुत्तों के जन्म नियंत्रण, नसबंदी, टीकाकरण पर सवाल पूछे गए।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों आदि से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देशों को देखते दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। इसका मकसद यह देखना है कि क्या सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि अगर अधिकारी निर्देशों का पालन नहीं करते रहे, तो उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई हो सकती है। हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार और एमसीडी को नोटिस जारी कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही पूछा कि 31 जुलाई तक यह बताने को कहा है कि शीर्ष अदालत के निर्देशों के पालन में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
पीठ ने इसके साथ ही केंद्र सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान पीठ ने दिल्ली सरकार के वकील से आवारा कुत्तों के जन्म नियंत्रण, नसबंदी और टीकाकरण के लिए अब तक उठाए गए कदमों के बारे में पूछा। साथ ही, कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में बनाए गए डाग शेल्टर की संख्या के बारे में भी जानकारी मांगी।
दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने जब कहा कि अधिकारी इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं, तो पीठ ने मौखिक रूप से टिपपणी की कि हाई कोर्ट परिसर में ही कम से कम 15 कुत्ते होंगें, जिनके के गले में बेल्ट है। क्या वे प्रशिक्षित कुत्ते हैं? और क्या हाई कोर्ट उनका मालिक है?
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पीठ ने यह भी कहा कि अदालत को नहीं पता कि अधिकारियों का रुख क्या है, लेकिन इन दिनों कुत्तों से प्यार करने वालों और कुत्तों से नफरत करने वालों के बीच एक बड़ी लड़ाई चल रही है। जनता सच में परेशान है और हर दिन कुत्तों के काटने की घटनाएं होती हैं। बंदरों का खतरा और भी गंभीर है। पीठ ने अधिकारियाें को एक रिपाेर्ट तैयार करने का निर्देश दिया। मामले पर अगली सुनवाई तीन अगस्त को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि सभी अधिकार क्षेत्र वाले हाई कोर्ट, मामले की निगरानी करते समय, न्यायिक निर्देशों का पालन न करने, कोई कार्रवाई न करने या जानबूझकर अनदेखी करने वाले गलती करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के साथ ही उचित कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह से अधिकृत होंगे।