भीषण गर्मी और प्रशासनिक लापरवाही... दिल्ली की सड़कों पर दम तोड़ रहे बेघर, 157 लोगों ने गंवाई जान
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भीषण गर्मी के कारण अकेले मई में 157 अज्ञात बेघरों की मौत हो गई। ...और पढ़ें

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भीषण गर्मी के कारण अकेले मई में 157 अज्ञात बेघरों की मौत हो गई। फाइल फोटो
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में भीषण गर्मी के बीच अकेले मई में 157 अज्ञात बेघरों की मौत हो गई। दिल्ली पुलिस के जिपनेट डाटा के हवाले से सेंटर फार होलिस्टिक डेवलपमेंट (सीएचडी) ने यह दावा करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिख इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में सीएचडी ने आरोप लगाया है कि अत्यधिक गर्मी, राहत व्यवस्थाओं की कमी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण दिल्ली के हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं।
अकेले आइपी एस्टेट थाना क्षेत्र में 10 अज्ञात मौतें दर्ज की गईं। सीएचडी ने आशंका जताई है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि कई मामलों की पहचान और पंजीकरण नहीं हो पाता। सीएचडी के कार्यकारी निदेशक सुनील अलेड़िया ने बताया कि दिल्ली पुलिस के जिपनेट डाटा के विश्लेषण में सीएचडी ने पाया कि उत्तर जिले में सबसे अधिक 31 मौतें दर्ज हुईं। मध्य जिले में 26 मौतें सामने आईं, जबकि रेलवे और ट्रांजिट कारिडोर क्षेत्रों में 21 मौत दर्ज हुई है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, दिल्ली सरकार और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) को भेजें पत्र में सुनील कुमार ने आरोप लगाया है कि समर एक्शन प्लान 2026-27 का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा। इसके कारण सरकारी अस्पतालों के बाहर रहने वाले गरीब और मरीजों के परिजन खुले आसमान के नीचे दिन-रात गुजारने को मजबूर हैं।
उन्होंने बताया कि 17 से 26 मई के बीच एलएन अस्पताल, एम्स, सफदरजंग और डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के आसपास सीएचडी ने फील्ड सर्वे किया। सर्वे में शामिल 35 लोगों ने माना कि वे भीषण गर्मी और “लू” से प्रभावित हैं। 97 प्रतिशत लोगों को किसी प्रकार की मेडिकल स्क्रीनिंग या प्राथमिक स्वास्थ्य सहायता नहीं मिली, जबकि 85 प्रतिशत लोगों को हीटवेव अलर्ट की जानकारी तक नहीं थी।
खबरें और भी
संख्या में लोगों को यह भी नहीं पता था कि नजदीकी राहत शिविर कहां हैं। केवल 20 प्रतिशत लोग ही डीयूएसआइबी शेल्टर तक पहुंच पाए। वहां भी पेयजल, बिस्तर और महिलाओं के लिए सुरक्षित अलग व्यवस्था का अभाव मिला। 88 प्रतिशत लोगों ने बताया कि गर्मी के चरम दौर में कोई सरकारी राहत टीम या आउटरीच कर्मचारी उनके पास नहीं पहुंचा।
फील्ड सर्वे के दौरान कई परिवार फुटपाथों पर प्लास्टिक और कपड़ों की अस्थायी आड़ बनाकर रहते मिले। महिलाओं और
बच्चों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक पाई गई। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल परिसरों में सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें छांव वाले हिस्सों में बैठने से भी रोका।
सुनील कुमार अलेड़िया ने अस्पतालों के बाहर अस्थायी कूलिंग सेंटर, पेयजल, ओआरएस वितरण, मोबाइल मेडिकल यूनिट और महिलाओं के लिए सुरक्षित शेल्टर तत्काल शुरू करने की मांग की है। आशंका व्यक्ति कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो गर्मी के दौरान हालात और गंभीर हो सकते हैं।