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    'बच्चों की तस्करी की 'मंडी' बन चुकी है राजधानी'; सरकार, दिल्ली पुलिस और NCPCR को Delhi HC का नोटिस

    Updated: Wed, 01 Apr 2026 07:31 PM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने बच्चों की तस्करी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, यह कहते हुए कि तमाम निर्देशों के बावजूद दिल्ली इस अपराध का 'मंडी' बन चुकी है। कोर्ट ...और पढ़ें

    दिल्ली हाई कोर्ट ने बच्चों की तस्करी पर सरकार और एजेंसियों पर की सख्त टिप्पणी। फोटो: आर्काइव

    दिल्ली हाई कोर्ट ने बच्चों की तस्करी पर सरकार और एजेंसियों पर की सख्त टिप्पणी। फोटो: आर्काइव

    HighLights

    1. दिल्ली हाई कोर्ट ने बच्चों की तस्करी पर गंभीर चिंता जताई

    2. दिल्ली सरकार, पुलिस, एनसीपीसीआर को दिया नोटिस

    3. रेलवे स्टेशनों पर बच्चों की दोबारा तस्करी पर भी सवाल उठे

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। रेलवे व बस स्टेशन पर बढ़ती बच्चों की तस्करी की घटनाओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि SOP से लेकर तमाम निर्देश देने के बावजूद भी दिल्ली बच्चों की तस्करी का 'मंडी' बन चुकी है।

    मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि तमाम न्यायिक आदेश के बावजूद दिल्ली में बच्चों की तस्करी का खतरा बना है।

    आखिर क्या कर रही है सरकार?

    साथ ही दिल्ली सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल समीर वशिष्ठ से पूछा कि सरकार क्या कर रही है? पीठ ने कहा कि बस रेलवे स्टेशनों के आस-पास दो घंटे घूम लीजिए, आपको पता चल जाएगा कि वहां क्या चल रहा है।

    जनहित याचिका पर अदालत ने दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और बाल अधिकार संरक्षण राष्ट्रीय आयोग (एनसीपीसीआर) को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के अंदर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने दिल्ली पुलिस और एनसीपीसीआर को बताने को कहा कि मानव तस्करी को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

    10 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

    मामले पर अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी। प्रकरण पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि प्रकरण पर निर्देश भी जारी किए हैं, लेकिन यह अपराध अभी भी बेरोकटोक जारी है। पीठ ने कहा कि रेलवे की तरफ से प्रयास किए गए है और एसओपी भी बनाई गई है, लेकिन, स्थिति में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है।

    अदालत ने एनसीपीसीआर को निर्देश दिया कि दिल्ली में बच्चों की तस्करी से जुड़ा डेटा कोर्ट के सामने पेश किया जाए ताकि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोर्ट उचित निर्देश और उपाय जारी कर सके।

    2018 से 2024 के बीच 84,000 बच्चे बचाए

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता संगठन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस तरफ से पेश हुई अधिवक्ता प्रभसहाय कौर ने अदालत के समक्ष कहा कि रेलवे स्टेशनों और आस-पास के इलाकों में खुलेआम बच्चों की तस्करी हो रही है। उन्होंने कहा कि 2018 से 2024 के बीच रेलवे परिसर से रेलवे सुरक्षा बल ने 84,000 से ज्यादा बच्चों को बचाया।

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    याचिका में कहा गया है कि रेलवे परिसर और ट्रेनों में बच्चों की तस्करी और बच्चों के खिलाफ होने वाले अन्य अपराधों की घटनाओं में खतरनाक बढ़ोतरी को देखते हुए रेल मंत्रालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पीड़ित बच्चों की पहचान, बचाव और पुनर्वास के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) जारी की हैं, लेकिन बच्चों की तस्करी नहीं रुक रही है।

    CWC के सामने पेश करने के तस्करों को दे दी बच्ची

    याचिका में एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक बच्ची को आनंद विहार रेलवे स्टेशन से बच्ची को बचाकर पुलिस को साैंपा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों ने बच्ची को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सामने पेश करने के बजाय उसे वापस तस्करों को दे दिया।

    उन्होंने बताया कि कुछ समय बाद जब एक अन्य स्थान पर छापेमारी की गई तो वही बच्ची उन्हीं तस्करों के पास से दोबारा बरामद की गई। उन्होंने कहा कि बच्चों की दोबारा तस्करी भी हो रही है और उन्हें सीडब्ल्यूसी में नहीं ले जाया जा रहा है।

    उन्होंने एसओपी का सख्ती से पालन करने और यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की भी मांग की गई कि बचाए गए बच्चों की दोबारा तस्करी न हो। उक्त तथ्यों को देखते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि हलफनामा में बताया जाए कि सीडब्ल्यूसी की सेवाओं का बेहतर इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।

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