'नेशनल स्टॉक एक्सचेंज RTI के दायरे में आएगा, पारदर्शिता अनिवार्य', दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
दिल्ली हाई कोर्ट ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की अपील खारिज करते हुए उसे RTI अधिनियम के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित किया। कोर्ट ने कहा कि NSE पर सर ...और पढ़ें

दिल्ली हाईकोर्ट ने एनएसई को आरटीआई के दायरे के अंतर्गत माना है।
HighLights
हाई कोर्ट ने NSE को RTI अधिनियम के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण माना।
NSE की अपील खारिज, एकल पीठ का निर्णय बरकरार रखा गया।
सरकार का गहरा नियंत्रण, NSE पारदर्शिता के लिए बाध्य है।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। एकल पीठ के निर्णय के खिलाफ दायर नेशनल स्टाक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) की अपील याचिका काे खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 की धारा-दो (एच) के तहत एनएसई एक सार्वजनिक सार्वजनिक प्राधिकरण है। ऐसे में यह आरटीआई अधिनियम के तहत पारदर्शिता की शर्तों को मानने के लिए बाध्य है।
15 अप्रैल 2010 के एकल पीठ के निर्णय को बरकरार रखते हुए न्यायमूर्ति सी हरि शंकर न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें कोई संस्था पहले प्राइवेट कंपनी के तौर पर बनी हो और बाद में उसे किसी कानून के तहत रेगुलेट किया गया हो।
पीठ ने रिकार्ड पर लिया कि सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड आफ इंडिया (सेबी) की मान्यता के बिना एनएसई स्टाक एक्सचेंज के तौर पर काम नहीं कर सकती।
सरकार के आदेश से स्थापित या गठित माना जाना चाहिए: कोर्ट
पीठ ने कहा कि अदालत एकल पीठ के इस निष्कर्ष से सहमत है कि इसे सरकार के आदेश से स्थापित या गठित माना जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि अदालत को नहीं लगता कि यह अपील में दखल देने लायक मामला है। एकल पीठ ने अपने निर्णय में कहा था कि एनएसई को संबंधित सरकार नियंत्रित करती है।
अपील में कानून का अहम सवाल उठाया कि क्या एनएसई, एक प्राइवेट कंपनी के तौर पर पंजीकृत होने के बावजूद, सार्वजनिक प्राधिकरण की कानूनी परिभाषा के दायरे में आता है। एनएसई की दलीलों को खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि एक्सचेंज पर सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एक्ट- 1956 (एससीआरए) और सेबी के रेगुलेटरी ढांचे के जरिए सरकार का गहरा और व्यापक नियंत्रण है।
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एनएसई को मान्यता सिर्फ एक रेगुलेटरी औपचारिकता नहीं है: हाईकोर्ट
पीठ ने कहा कि एससीआरए की धारा-चार (तीन) के तहत एनएसई को दी गई मान्यता सिर्फ एक रेगुलेटरी औपचारिकता नहीं है। ऐसे में जबकि स्टाक एक्सचेंजों को मान्यता देने की शक्ति केंद्र सरकार द्वारा सेबी को सौंपी गई है, इसलिए मान्यता आदेश को केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश माना जाता है। नतीजतन, एनएसई, आरटीआइ अधिनियम की धारा-दो (एच) के उद्देश्यों के लिए उचित सरकार के आदेश से गठित एक प्राधिकरण है।