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    अब न पकड़े जाएंगे न ही शेल्टर में रहेंगे कुत्ते, सिर्फ 1% ही नसबंदी से बचेंगे; दिल्ली HC का बड़ा आदेश

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 10:05 PM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने एमसीडी और एनडीएमसी को आवारा कुत्तों के बंध्याकरण (Sterilization) और टीकाकरण के लिए प्रत्येक वार्ड में पायलट कैंप लगाने का निर्देश ...और पढ़ें

    दिल्ली में कुत्तों की नसबंदी करने का आदेश दिल्ली हाई कोर्ट ने दिया। फोटो: आर्काइव

    दिल्ली में कुत्तों की नसबंदी करने का आदेश दिल्ली हाई कोर्ट ने दिया। फोटो: आर्काइव

    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने पायलट बंध्याकरण कैंप लगाने का निर्देश दिया

    2. कुत्तों को मारा या डॉग पाउंड नहीं भेजा जाएगा

    3. कैंपों का व्यापक प्रचार करने के लिए कहा गया

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को MCD और उत्तरी दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने इलाकों में एक-एक वार्ड की पहचान करें और वहां आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के लिए एक कैंप लगाएं।

    न्यायमूर्ति दिनेश मेहता व न्यायमूर्ति रजनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने कहा कि यह एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर किया जाएगा। अदालत ने आदेश दिया कि संबंधित इलाकों में कैंप के बारे में पहले से प्रचार किया जाए और बड़े पैमाने पर पोस्टर लगाए जाएं।

    अदालत ने यह साफ किया कि कुत्तों को पकड़ा नहीं जाएगा या डाॅग पाउंड नहीं भेजा जाएगा। अदालत ने उक्त आदेश सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वत: संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन पर सुनवाई

    हाई कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों आदि के परिसर से कुत्तों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन की निगरानी के लिए यह याचिका शुरू की है।

    सोमवार को सुनवाई के दौरान एमसीडी की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता मनु चतुर्वेदी ने पीठ को बताया कि आठ जोन में अलग-अलग एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर की पहचान की गई है, लेकिन तीन जोन के लिए मंजूरी अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि इन तीन जोन के लिए बंध्याकरण का काम दूसरे जोन के सेंटर कर रहे हैं।

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    आवारा कुत्तों की संख्या पर हुई चर्चा

    सुनवाई के दौरान पीठ ने पूछा कि दिल्ली में आवारा कुत्तों की आबादी का कोई आंकड़ा है। इसके जवाब में मनु चतुर्वेदी ने कहा कि कोई जनगणना तो नहीं हुई है, लेकिन मोटे तौर पर राजधानी में लगभग आठ लाख आवारा कुत्ते हैं, लेकिन यह कोई आधिकारिक डेटा नहीं है।

    उन्होंने यह भी बताया कि बंध्याकरण के समय डेटा रखा जाता है और सुझाव दिया कि एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा सकता है। इसमें कुत्तों की माइक्रो-चिपिंग की जा सके।

    खा खिलाने वालों से सहयोग का सुझाव

    संबंधित याचिकाओं में से एक में पेश हुईं वकील शेफी भाटिया ने कहा कि वह अपने इलाके में कुत्तों को खाना खिलाती हैं और अधिकारी ऐसे लोगों के साथ तालमेल बिठा सकते हैं ताकि नसबंदी के लिए कुत्तों को पकड़ना आसान हो जाए।

    एक वार्ड से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

    इस पर पीठ ने कहा कि एनडीएमसी व एमसीडी दोनों अपने-अपने इलाकों से एक-एक वार्ड चुनकर पायलट कैंप शुरू कर सकते हैं, ताकि समाज के सामने यह मिसाल कायम हो सके कि उन इलाकों के सभी कुत्तों की बंध्याकरण हो चुकी है।

    पीठ ने कहा कि कैंप में लिखा जाए कि इन कुत्तों को किसी कैंप में नहीं रखा जाएगा, तभी लोग आएंगे और इसकी शुरुआत एक वार्ड से होनी चाहिए ताकि यह संदेश जाए कि कुत्तों को डाग पाउंड में नहीं लाया जा रहा है या उन्हें मारा नहीं जा रहा है।

    एक सितंबर तक मांगी स्टेटस रिपोर्ट

    पीठ ने यह भी कहा कि एक समाज के तौर पर अदालत भी इस बात को लेकर जागरूक है कि कुत्ते खत्म नहीं होने चाहिए और इसके लिए कम से कम एक प्रतिशत कुत्तों की बंध्याकरण नहीं होनी चाहिए ताकि 15 साल बाद ऐसी स्थिति न आए कि सभी कुत्ते खत्म हो जाएं।

    अदालत ने मामले में ताजा स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई एक सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी।

    सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि सभी संबंधित हाई कोर्ट, निगरानी प्रक्रिया के दौरान, नियमों का पालन न करने, कार्रवाई न करने या न्यायिक निर्देशों की जानबूझकर अनदेखी करने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने सहित उचित कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह से अधिकृत होंगे।

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