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    दिल्ली की जेलों से सशर्त रिहा होंगे 22 कैदी, 77 खूंखार अपराधियों की अर्जियां खारिज

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 12:05 AM (IST)

    दिल्ली के गृह विभाग और तिहाड़ जेल प्रशासन के सजा समीक्षा बोर्ड ने 100 कैदियों की याचिकाओं पर विचार किया। बोर्ड ने 22 कैदियों को सशर्त रिहा करने की सिफ ...और पढ़ें

    एआई जेनेरेटेड इमेज।

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    HighLights

    1. 22 कैदियों की सशर्त रिहाई की सिफारिश की गई।

    2. 77 खूंखार अपराधियों की रिहाई अर्जियां खारिज हुईं।

    3. जिगीषा घोष हत्याकांड के दोषियों को राहत नहीं मिली।

    गौतम कुमार मिश्रा, पश्चिमी दिल्ली। तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेलों में सजा काट रहे कैदियों की समय पूर्व रिहाई को लेकर दिल्ली सरकार के गृह विभाग और तिहाड़ जेल प्रशासन ने सजा समीक्षा बोर्ड (एसआरबी) ने अहम फैसला लिया है।

    प्रदेश के गृह मंत्री की अध्यक्षता में हुई इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 473 और दिल्ली जेल नियमों के तहत कुल 100 कैदियों की याचिकाओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया था।

    इसके बाद उपराज्यपाल की अंतिम मंजूरी के साथ बोर्ड ने बड़ा संदेश देते हुए 22 कैदियों को सशर्त रिहा करने की सिफारिश की है, जबकि 77 खूंखार और जघन्य अपराधियों की रिहाई अर्जियों को सिरे से खारिज कर दिया गया है। एक अन्य कैदी के फैसले को फिलहाल टाल दिया गया है।

    सनसनीखेज अपराधियों की अर्जियों पर कड़ा रुख

    बोर्ड ने समाज की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए गंभीर और सनसनीखेज अपराधों में शामिल अपराधियों की अर्जियों पर कड़ा रुख अपनाया है। बहुचर्चित आइटी एग्जीक्यूटिव जिगीषा घोष हत्याकांड के मुख्य दोषियों रवि कपूर और बलजीत मलिक उर्फ पोपी की रिहाई की मांग को पूरी तरह से नकार दिया गया।

    इसके अलावा, अपनी मासूम बेटी से छेड़छाड़ का विरोध करने वाली मां की बेदर्दी से हत्या करने वाले दोषी शख्स, विकासपुरी में 16 वर्षीय किशोर का अपहरण कर जान लेने वाले गौरव और लूट के इरादे से 78 साल की बुजुर्ग महिला की हत्या करने वाले इमरान उर्फ मुर्गी चोर को भी बोर्ड से कोई राहत नहीं मिली है।

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    बोर्ड ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि महज 14 या 20 साल की न्यूनतम जेल काट लेना समय पूर्व रिहाई का स्वतः कानूनी अधिकार नहीं बन जाता।

    अर्जियों को खारिज करने के पीछे कैदियों का आपराधिक इतिहास, जेल परिसर के अंदर से मोबाइल, सर्जिकल ब्लेड या धारदार हथियार मिलना, जेल कर्मचारियों के साथ मारपीट और फरलो या पैरोल के दौरान भाग जाने जैसी गंभीर अनुशासनहीनताएं मुख्य वजह रहीं।

    इसके साथ ही दिल्ली पुलिस और प्रोबेशन अधिकारियों द्वारा दी गई प्रतिकूल रिपोर्टों ने भी इन याचिकाओं को खारिज करने में अहम भूमिका निभाई।

    इन 22 कैदियों की रिहाई मंजूर, माननी होंगी कड़ी शर्तें

    सकारात्मक रुख दिखाते हुए बोर्ड ने उन 22 कैदियों को राहत दी है जिन्होंने अपनी सजा का एक बड़ा हिस्सा पूरा कर लिया है और जेल में सुधरे हुए आचरण का परिचय दिया है।

    इनमें 21 साल से अधिक समय से बंद वरिता सोनी तथा 76 वर्षीय मदन गोपाल व महावीर प्रसाद जैसे बुजुर्ग कैदी शामिल हैं। इनके अलावा आकाश उर्फ भोला, दीपक, राहुल देव, सचिन उर्फ कपिल, विनोद कुमार, सुरेंद्र कुमार, अंगद सिंह, चेत राम सैनी उर्फ अजय, जितेंद्र कुमार उर्फ विक्की, सुनील कुमार, धर्मेंद्र कुमार पाल, अशोक कुमार, अमित कुमार, अनिल कुमार, मनोज उर्फ काले, पम्मी उर्फ हीरा लाल, राजबीर, उमेश कुमार चौहान और टुनटुन दास को रिहा किया जाएगा।

    हालांकि, इन सभी को व्यक्तिगत मुचलका जमा करना होगा और अपने क्षेत्र के थाना प्रभारी के पास अपना वर्तमान पता और हमेशा सक्रिय रहने वाला मोबाइल नंबर दर्ज कराना अनिवार्य रहेगा।

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