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    श्रम विभाग में कर्मचारियों का भारी टोटा, अब 'रिटायर्ड बाबुओं' के भरोसे चलेगा दिल्ली सरकार का काम

    Updated: Thu, 07 May 2026 11:23 PM (IST)

    दिल्ली सरकार के श्रम विभाग में कर्मचारियों की कमी के कारण अब सेवानिवृत्त अधिकारियों को नियुक्त किया जा रहा है। यह कदम तब तक जारी रहेगा जब तक डीएसएसएसब ...और पढ़ें

    दिल्ली सरकार के श्रम विभाग में कर्मचारियों की कमी के कारण अब सेवानिवृत्त अधिकारियों को नियुक्त किया जा रहा है। इमेज एआई

    दिल्ली सरकार के श्रम विभाग में कर्मचारियों की कमी के कारण अब सेवानिवृत्त अधिकारियों को नियुक्त किया जा रहा है। इमेज एआई

    संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के श्रम विभाग में कर्मचारियों का टोटा इस कदर बढ़ गया है कि अब पुराने अनुभवी हाथों को वापस बुलाने की नौबत आ गई है। विभाग ने जूनियर असिस्टेंट से लेकर स्टेनो तक के 31 रिक्त पदों को भरने के लिए सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों (रिटायर्ड बाबुओं) की फौज तैयार करने का फैसला किया है।

    आलम यह है कि विभाग ने साफ कर दिया है कि यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) नियमित नियुक्तियां नहीं कर देता। यानी विभाग को फिलहाल बोर्ड से नए कर्मचारी मिलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

    विभागीय सचिव की ओर से जारी नोटिस के अनुसार श्रम विभाग ने केवल उन रिटायर्ड अधिकारियों को प्राथमिकता देने की बात कही है जो प्रशासन, विजिलेंस, आरटीआइ व अकाउंट्स के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, श्रम कानूनों और प्रशासनिक पेचीदगियों को देखते हुए ''आउटसोर्स'' या बिल्कुल नए लड़कों के बजाय अनुभवी रिटायर्ड कर्मियों को ज्यादा भरोसेमंद माना जा रहा है।

    विभागीय नोटिस के मुताबिक, इन पदों पर नियुक्ति छह महीने के अनुबंध से शुरू होगी, जिसे दो साल या 65 वर्ष की आयु तक बढ़ाया जा सकता है। खास बात यह है कि सरकार इन रिटायर्ड कर्मचारियों को कोई अतिरिक्त सुविधा जैसे एचआरए, सरकारी वाहन या टेलीफोन भत्ता नहीं देगी। उन्हें केवल निर्धारित मानदेय पर काम करना होगा।

    अधिकारियों के मुताबिक शाम नाथ मार्ग स्थित विभागीय मुख्यालय में आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो गई है। विभाग अब इन आवेदनों की स्क्रीनिंग के बाद इंटरव्यू के आधार पर चयन करेगा। जानकारों का कहना है कि प्रशासन के इस कदम से काम की गति तो बढ़ेगी, लेकिन यह दिल्ली सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में नियमित कर्मचारियों की कमी की बड़ी तस्वीर भी पेश करता है।

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