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मालवीय नगर अग्निकांड: लापरवाही से अव्यवस्था तक... दिल्ली पुलिस व अग्निशमन विभाग की रिपोर्ट में कई खुलासे

Published: Fri, 05 Jun 2026 12:23 AM (IST)Updated: Fri, 05 Jun 2026 02:12 AM (IST)

दक्षिणी दिल्ली के हौजरानी स्थित अवैध फ्लोरिश स्टे होटल में लगी भीषण आग में सुरक्षा मानकों और बिल्डिंग बायलॉज की धज्जियां उड़ गईं।

मालवीय नगर के हौजरानी स्थित गेस्ट हाउस में लगी आग के बाद जांच करती फोरेंसिक टीम। विपिन शर्मा

मालवीय नगर के हौजरानी स्थित गेस्ट हाउस में लगी आग के बाद जांच करती फोरेंसिक टीम। विपिन शर्मा

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राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के हौजरानी इलाके में फ्लोरिश स्टे नाम से चल रहे एक अवैध होटल में लगी भीषण आग ने सुरक्षा व्यवस्थाओं और बिल्डिंग बायलाज की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं।

दिल्ली पुलिस और अग्निशमन विभाग की संयुक्त शुरुआती जांच में होटल प्रबंधन की रोंगटे खड़े कर देने वाली खामियां उजागर हुई हैं। जांच अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि होटल में सुरक्षा के न्यूनतम मानकों का भी पालन किया गया होता, तो मरने वालों का आंकड़ा इतना बड़ा नहीं होता।

अव्यवस्थाओं का आलम यह था कि आग लगने के बाद न तो अंदर फंसे लोग खुद बाहर निकल पाए और न ही राहत कार्य में जुटे फायर कर्मी, एनडीआरएफ व दिल्ली पुलिस के जवान समय रहते उन्हें सुरक्षित निकाल सके।

मौत का जाल साबित हुईं ये तीन बड़ी खामियांछत के दरवाजे पर लटका था ताला

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब आठ बजे जब होटल में आग लगी, तब सीढ़ियों से छत पर जाने वाले मुख्य दरवाजे पर ताला जड़ा हुआ था। यदि यह दरवाजा खुला होता, तो अधिकांश लोग छत पर भागकर जान बचा सकते थे। चूंकि, इलाके में आसपास की इमारतों की छतें एक-दूसरे से सटी हैं, लोग आसानी से दूसरी बिल्डिंग की छत पर कूदकर सुरक्षित निकल जाते।

डबल लेयर शीशों से पैक थीं खिड़कियां, वेंटिलेशन शून्य

नियमों के मुताबिक, होटलों और गेस्ट हाउसों में पर्याप्त वेंटिलेशन होना अनिवार्य है, लेकिन इस अवैध होटल में वेंटिलेशन का नामोनिशान नहीं था। पूरी इमारत और खिड़कियां डबल लेयर (दोहरी परत) के मजबूत शीशों से पूरी तरह पैक थीं। सुरक्षा कारणों से व्यावसायिक भवनों की खिड़कियों में ऐसे शीशे नहीं लगाए जाते। आग लगने के बाद पुलिस और फायर कर्मियों को इन्हें तोड़ने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।

पहले ईंट, पत्थरों और लोहे के डंडों से पहली परत को तोड़ा गया, फिर दूसरी परत को भेदने में कीमती समय बर्बाद हो गया, जिससे बचाव अभियान में देरी हुई। आगे के बजाय पीछे की तरफ थीं सीढ़ियां, इमरजेंसी गेट नदारदकमर्शियल गतिविधियों वाली इमारतों में सीढ़ियां हमेशा आगे की तरफ होनी चाहिए ताकि आपात स्थिति में लोग तुरंत बाहर भाग सकें।

इसके विपरीत, इस होटल में सीढ़ियां पीछे की तरफ छिपी हुई थीं, जहां धुआं भरने के बाद भागना नामुमकिन हो गया। इसके अलावा, पूरी बिल्डिंग में कोई भी आपातकालीन निकास द्वार नहीं था। जांच में होटल की एकमात्र लिफ्ट भी बेसमेंट में फंसी हुई पाई गई।

बेसमेंट में शॉर्ट-सर्किट से आग लगने की आशंकाशुरुआती तफ्तीश में पुलिस को आशंका है कि आग सबसे पहले बेसमेंट में शार्ट सर्किट के कारण लगी, जिसने देखते ही देखते ऊपर की मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया। हालांकि, फायर विभाग की टीम अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है और विस्तृत वैज्ञानिक जांच जारी है। कागजों में हेरफेर कर बनाई गई इस पांच मंजिला अवैध इमारत के कोने-कोने का इस्तेमाल व्यावसायिक मुनाफे के लिए किया जा रहा था।

जांच में सामने आया कि बेसमेंट में किचन, डाइनिंग एरिया और चार कमरे, ग्राउंड फ्लोर पर एक किचन और दो कमरे, पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल पर पांच-पांच कमरे थे। चौथी और पांचवीं मंजिल में प्रत्येक पर दो-दो कमरे (जिसमें दो सर्वेंट क्वार्टर शामिल हैं)। इस प्रकार पूरी बिल्डिंग में कुल 25 कमरे अवैध रूप से संचालित थे।

शॉर्ट-सर्किट के कारणों की तकनीकी रिपोर्ट मांगी

दिल्ली पुलिस ने तीन विभागों को लिखा पत्र मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने नगर निगम, बिजली कंपनी बीएसईएस और दक्षिण जिले के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर कड़ा रुख अपनाया है। एमसीडी से बिल्डिंग का स्ट्रक्चरल सर्वे करने को कहा गया है ताकि पता चल सके कि आग के बाद क्या यह इमारत ढहने की स्थिति में है या रहने लायक बची है। बीएसइएस से बिजली कनेक्शन के वैध दस्तावेजों और शॉर्ट-सर्किट के कारणों की तकनीकी रिपोर्ट मांगी गई है।

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डीएम (साउथ) से बिल्डिंग का निरीक्षण करने और होटल की रजिस्ट्री व भूमि उपयोग से जुड़े दस्तावेजों की जांच करने का अनुरोध किया गया है।

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