मेट्रो स्टेशनों से क्यों निकल रहे हैं सांप? दिल्ली भर से जुलाई में 80 कराए रेस्क्यू: वाइल्डलाइफ SOS अलर्ट जारी
मानसून की बारिश के कारण दिल्ली में सांपों का निकलना बढ़ गया है, जिससे जुलाई में वाइल्डलाइफ एसओएस ने लगभग 80 सांपों को घरों, अस्पतालों और मेट्रो स्टेशन ...और पढ़ें

दिल्ली के मेट्रो स्टेशनों से निकल रहे हैं सांप। फोटो: जागरण
HighLights
मानसून में दिल्ली में सांपों का निकलना तेज हुआ
जुलाई में वाइल्डलाइफ एसओएस ने 80 सांप बचाए
बचाए गए सांपों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। मानसून की वर्षा के साथ ही दिल्ली में जहरीले और बिना जहर वाले जीवों का निकलना तेज हो गया है। वर्षा की वजह से बिलों और प्राकृतिक ठिकानों में पानी भर जाने के कारण सांप सूखे और सुरक्षित स्थानों की तलाश में घरों, अस्पतालों और मेट्रो स्टेशनों तक पहुंच रहे हैं।
वाइल्डलाइफ एसओएस की रैपिड रिस्पाॅन्स यूनिट ने जुलाई के महीने में पूरी दिल्ली में लगातार रेस्क्यू अभियान चलाकर ऐसे करीब 80 सांपों को सुरक्षित बचाया है।
बारिश और भोजन की तलाश बना रही वजह
वाइल्ड लाइफ एसओएस के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण कहते हैं कि मेट्रो स्टेशन या अस्पताल में सांप का मिलना असामान्य लग सकता है, लेकिन शहरी फैलाव के कारण यह सामान्य होता जा रहा है।
जरूरी यह है कि सांप दिखने पर घबराएं नहीं और न ही खुद पकड़ने की कोशिश करें। तुरंत प्रशिक्षित टीम को सूचना दें। एसओएस से जुड़े नील बनर्जी ने बताया कि मानसून में ज्यादा नमी और वर्षा के कारण सांपों के प्राकृतिक ठिकाने पानी में डूब जाते हैं।
साथ ही इस दौरान भोजन (चूहों और कीड़ों) की हलचल बढ़ जाती है। यही वजह है कि वे सूखी जगह की तलाश में इंसानी बस्तियों, दफ्तरों, अस्पतालों और मेट्रो स्टेशनों का रुख करते हैं।
कुतुब मीनार मेट्रो स्टेशन पर मिला अजगर का बच्चा
इस महीने कुतुब मीनार मेट्रो स्टेशन पर लोहे की जाली से चिपका हुआ इंडियन राक अजगर का एक बच्चा मिला। इसके अलावा दक्षिणी दिल्ली की एक रिहायशी कालोनी और एयरफोर्स स्टेशन के शूटिंग रेंज से भी दो बड़े अजगरों को बचाया गया।
खबरें और भी
अस्पताल और एनसीईआरटी कैंपस से भी निकले सांप
मध्य दिल्ली के एक प्रमुख अस्पताल के जनरल वार्ड में वुल्फ स्नेक मिलने से कुछ देर के लिए हड़कंप मच गया। वहीं, एनसीईआरटी कैंपस की केमिस्ट्री लैब से धामन सांप को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
टीम ने अलग-अलग इलाकों से चार 'सैंड बोआ' और ब्राह्मणी ब्लाइंड स्नेक को भी बचाया। चिकित्सकीय जांच के बाद सभी जीवों को पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने पर उनके प्राकृतिक आवास (जंगलों) में सुरक्षित छोड़ दिया गया है।
यह भी पढ़ें- दिल्ली चिड़ियाघर में लौटेगी रौनक, 30 साल बाद दिखेगा 'माउस डियर' और 2,943 नए वन्यजीवों की होगी एंट्री