दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारकों पर अतिक्रमण का खतरा, 14 धरोहरें अवैध निर्माणों से घिरीं
दिल्ली के 14 प्रमुख ऐतिहासिक स्मारक अवैध अतिक्रमण और निर्माण की चपेट में हैं, जबकि 100 मीटर तक निर्माण की अनुमति नहीं है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ए ...और पढ़ें

दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहरें अतिक्रमण की भेंट चढ़ रही हैं।
HighLights
दिल्ली के 14 ऐतिहासिक स्मारक अतिक्रमण की चपेट में।
एएसआई के 400 से अधिक स्मारक देशभर में अतिक्रमित।
कोरोना काल में भी स्मारकों के पास अवैध निर्माण।
वी के शुक्ला, नई दिल्ली। भारत के गौरवशाली अतीत की गवाह दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहरें अतिक्रमण की भेंट चढ़ रही हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के संरक्षण में आने वाले दिल्ली के 14 प्रमुख राष्ट्रीय स्मारक अवैध कब्जों, अनधिकृत निर्माण से घिरे हुए हैं।
यह स्थिति तब है जब राष्ट्रीय स्मारक की चारदीवारी से 100 मीटर तक किसी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं है। फिर भी स्मारक की दीवार तक बन ऊंची ऊंची इमारतें जा रही हैं। कहने के लिए निर्माण रोकने के लिए कागजों में खानापूर्ति हाेती है, मगर अंदर से मिलीभगत रहती है।
आप काे जानकर हैरानी होगी कि कोरोना महामारी के समय लोग अपनी जान बचा रहे थे तो बिल्डर स्मारकाें की दीवार तक अवैध निर्माण कर रहे थे। एएसअसइ के क्षेत्रीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस दाैरान कोटला फिरोज शाह स्मारक की दीवार के साथ कई ऊंची इमारतें तक बनवा दीं।
एएसआई की एक रिपोर्ट में पाया गया कि देश भर में एएसआई के तहत आने वाले कुल 3600 स्मारकों में से 400 से अधिक स्मारक अतिक्रमण की चपेट में हैं। इसमें दिल्ली के ये स्मारक भी शामिल हैं।
ये स्मारक है अतिक्रमण की चपेट में
इन 14 स्मारकों में तुगलकाबाद किला, डिफेंस कालोनी स्थित बत्तीसावाला शेख अली की गुमटी, महरौली स्थित जफर महल, मालवीय नगर का सराय शाहजी, कोटला फिरोज शाह, कश्मीरी गेट, रजिया सुल्तान का स्मारक, हौज खास परिसर, खिड़की मस्जिद, अदहम खान का मकबरा, बेगमपुरी मस्जिद, साकेत स्थित सतपुला, किशनगंज का डी''''एरेमाओ कब्रिस्तान, मस्जिद मोठ आदि शामिल हैं।
डी'एरेमाओ कब्रिस्तान किशनगंज
डी'एरेमाओ कब्रिस्तान किशनगंज में है। यह एएसआइ के तहत संरक्षित स्मारकाें की सूची में है। इसका नाम कैप्टन मैनुअल डी'एरेमाओ के नाम पर पडा है। वह एक यूरोपीय/एंग्लो-इंडियन सैन्य अधिकारी था। उसने सिंधिया की सेना में एक आफिसर के रूप में सेवा की और 1803 में हांसी के किले का प्रभारी था। उसका जन्म 1743-1744 के आसपास दिल्ली में हुआ था। उसकी मृत्यु 5 जून 1829 को हुई और उसे किशनगंज के इस कब्रिस्तान में दफनाया गया, जिसका नाम उसी के नाम पर रखा गया था। यह कब्रिस्तान 100 पहले 1919 में एएसआइ के अधीन आया था।
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क्या कहते हैं एएसआई के अधिकारी
एएसआई के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि स्मारकों के आसपास वर्षों पहले से निर्माण बने हुए हैं। उन्हें हटा पाना अब आसान नहीं है। मगर अब नया निर्माण नहीं हो, इस पर पूरी तरह नजर रखी जाती है और किसी तरह का निर्माण दिखने पर उसकी लिखित शिकायत नगर निगम सहित संबंधित एजेंसियों और पुलिस काे दी जाती है और उस गतिविधि को रोकने के लिए अनुराेध किया जाता है।