पढ़ाई और नौकरी छोड़ प्रदर्शन में पहुंचे युवा, दिल्ली पहुंच रहे अभिभावक; चोटिल बच्चों को अब वापस घर ले जाने की जिद
दिल्ली में 'संसद मार्च' में शामिल हुए छात्र-छात्राओं और नौकरीपेशा युवाओं के घायल होने की खबर से अभिभावक चिंतित हैं। वे अपने बच्चों का हाल जानने और उन् ...और पढ़ें
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दिल्ली में 'संसद मार्च' में शामिल हुए छात्र-छात्राओं और नौकरीपेशा युवाओं के घायल होने की खबर से अभिभावक चिंतित हैं।
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। 'संसद मार्च' में शामिल हुए युवाओं का एक बड़ा वर्ग ऐसे छात्र-छात्राओं और नौकरीपेशा युवाओं का था, जो अपने घर-परिवार से दूर दिल्ली में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं या नौकरी कर रहे हैं। इनमें बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड समेत कई राज्यों के युवा शामिल थे।
कुछ दिल्ली के स्थानीय युवा भी बड़ी संख्या में प्रदर्शन में पहुंचे, लेकिन उनके परिवारों में से अधिकांश को भी इसकी जानकारी नहीं थी कि वे 'संसद मार्च' में शामिल होने जा रहे हैं।
प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और बड़ी संख्या में युवाओं के घायल होने की खबर सामने आने के बाद अभिभावकों की चिंता बढ़ गई। कई अभिभावक अब दिल्ली पहुंच चुके हैं और अस्पतालों के साथ-साथ अपने बच्चों के ठिकानों के चक्कर लगा रहे हैं। उनकी कोशिश सिर्फ बच्चों का हालचाल जानने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समझाकर आगे ऐसे प्रदर्शनों से दूर रखने की भी है।
कई अभिभावकों ने बताया कि यदि बच्चों ने पहले जानकारी दी होती तो वे उन्हें प्रदर्शन में जाने से रोकते। कुछ अभिभावकों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार का समर्थन भी किया, लेकिन अधिकांश का कहना है कि जिस तरह हालात बिगड़े और बड़ी संख्या में युवा घायल हुए, उसके बाद उनकी चिंता स्वाभाविक है।
उनका कहना है कि वे नहीं चाहते कि उनके बच्चे दोबारा ऐसी स्थिति का सामना करें। अस्पतालों और जंतर-मंतर पर दिनभर ऐसे अभिभावक दिखाई दिए, जो अपने बच्चों की कुशलक्षेम जानने के साथ उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे थे।
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साथ लेकर जा रहे हैं, जब शांति होने पर भेजेंगे
लखनऊ से आए मुकेश कुमार ने कहा कि अब उनकी पहली प्राथमिकता बच्चों की सुरक्षा है, बताया कि उनका बेटा मुखर्जी नगर पीजी में रहकर सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा। कहाकि बिना घर पर बताए अपने दोस्तों के साथ प्रदर्शन में आ गया था, भगदड़ में पैर में चोट आई है। अपने साथ लेकर जा रहे हैं, जब शांति हो जाएगी तब भेजेंगे।
जयपुर राजस्थान से आए सुरेंद्र ठाकुर की बेटी यहां आइटी कंपनी में काम कर रही है, दोस्तों के साथ सोमवार को जंतर-मंतर पहुंच गई। भगदड़ में दोस्त को चोट लगी तो उसे लेकर लेडी हार्डिंग अस्पताल चले गए। बताया कि वहां पर पुलिस की बचने को कुछ प्रदर्शनकारी अस्पताल में कुछ आए, उन पर आंसू गैस के गोले छोड़ गए उससे वह भी परेशान हो गई।
फोन पर सूचना मिली तो अनहोनी की आशंका में भागे-भागे आए, उन्हें तो पता ही नहीं था। अब घर लेकर जा रहे हैं, कहा माहौल शांत होने पर ही आने देंगे। आफिस से वर्क फ्राम होम मांगा है।
'बेटी ने बताया ही नहीं'
चंडीगढ़ से आई कुसुम ने बताया कि उनकी बेटी दिल्ली में निजी कंपनी में नौकरी करती है। घटना के बाद जब उससे संपर्क हुआ तब मालूम पड़ा कि वह भी प्रदर्शन में गई थी। उन्होंने कहा कि विरोध करना गलत नहीं है, लेकिन किसी भी कार्यक्रम में जाने से पहले परिवार को जानकारी जरूर देनी चाहिए।
'फोन आया तो पता चला बेटा मार्च में था'
बिहार के दरभंगा से दिल्ली पहुंचे तरूणपाल ने बताया कि उनका बेटा मुखर्जी नगर में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है। उसने घर पर सिर्फ इतना बताया था कि दोस्तों से मिलने जा रहा है। बाद में इंटरनेट मीडिया पर तस्वीरें देखने और फोन आने पर पता चला कि वह 'संसद मार्च’ में शामिल था। उन्होंने कहा कि अब सबसे पहले बेटे को समझाएंगे कि भविष्य की तैयारी अधिक महत्वपूर्ण है।