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दिल्ली में आठ साल में सिर्फ 42 पेट शॉप का पंजीकरण, लाइसेंस नीति अभी तक लंबित

Published: Sat, 27 Jun 2026 05:51 AM (IST)

राजधानी दिल्ली में आठ साल में केवल 42 पेट शाप पंजीकृत हो पाए हैं, क्योंकि दिल्ली नगर निगम की लाइसेंस नीति अभी तक मंजूर नहीं हुई है।

दिल्ली नगर निगम।

दिल्ली नगर निगम।

HighLights

  1. आठ साल में सिर्फ 42 पेट शॉप पंजीकृत हुए।

  2. एमसीडी की लाइसेंस नीति अभी तक लंबित है।

  3. पशु चिकित्सकों की कमी से निरीक्षण बाधित।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में पशु क्रूरता निवारण (पेट शाप) नियम, 2018 लागू होने के लगभग आठ वर्ष बाद भी केवल 42 पेट शाप का पंजीकरण हो सका है, जबकि एक भी दुकान को व्यापार लाइसेंस जारी नहीं किया गया है। इसका मुख्य कारण दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की लाइसेंस नीति का अब तक मंजूर नहीं होना है।

दिल्ली पशु कल्याण बोर्ड (डीएडब्ल्यूबी) ने पिछले वर्ष से पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की, लेकिन नियमों के अनुसार पंजीकरण के साथ दिल्ली नगर निगम का व्यापार लाइसेंस भी अनिवार्य है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कई पंजीकृत दुकानदार लाइसेंस के लिए एमसीडी के पास गए थे, लेकिन नगर निगम के पास अभी तक लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था ही नहीं है।

एमसीडी का कहना है कि लाइसेंस नीति का मसौदा 2022 में तैयार हुआ था, लेकिन आपत्तियों और संशोधनों के कारण इसमें देरी हुई। अब इसे जल्द सदन में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।

दिल्ली पशु कल्याण बोर्ड के अनुसार, करीब 250 दुकानदारों ने यह घोषणा दी है कि वे केवल पालतू पशुओं का भोजन, एक्सेसरीज और ग्रूमिंग उत्पाद बेचते हैं और जानवरों का व्यापार नहीं करते है। हालांकि, पशु कल्याण कार्यकर्ताओं का कहना है कि केवल घोषणा के आधार पर निगरानी नहीं की जा सकती। नियमित निरीक्षण और सख्त प्रवर्तन ही नियमों के पालन को सुनिश्चित कर सकता है।

हर वर्ष निरीक्षण जरूरी

नियमों के तहत पालतू पशु दुकानों में पर्याप्त वेंटिलेशन, स्वच्छ भोजन और पानी, पशु चिकित्सक की निगरानी, टीकाकरण, प्रजाति के अनुरूप आवास और सभी जानवरों का रिकार्ड रखना अनिवार्य है। जानवर के पंजीकरण के तीन महीने के भीतर और उसके बाद हर वर्ष निरीक्षण जरूरी है। लेकिन विभाग में पशु चिकित्सकों की भारी कमी के कारण निरीक्षण समय पर नहीं हो पा रहे हैं।

पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि कमजोर निगरानी के चलते कई दुकानों में जानवरों को खराब परिस्थितियों में रखा जाता है और कुछ मामलों में कछुए और सांप जैसे संरक्षित वन्यजीवों की बिक्री भी सामने आई है।

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उनका कहना है कि अवैध ब्रीडिंग केंद्रों से लाए गए कुत्तों या अन्य जानवरों के बच्चों का कारोबार तथा अस्वच्छ परिस्थितियां पशुओं के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। इससे उन्हें बीमारी भी हो सकती है।

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