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    चोरी के मोबाइल से साफ करते थे बैंक खाते, दिल्ली पुलिस ने किया अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश; 9 गिरफ्तार

    By Saqib KhanEdited By: Sonu Suman
    Updated: Mon, 10 Aug 2026 03:57 PM (IST)

    दिल्ली पुलिस ने मोबाइल चोरी कर बैंक खातों से रकम उड़ाने वाले अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में जयपुर और मेरठ-गाजियाबाद ...और पढ़ें

    चोरी के मोबाइल से बैंक खाते साफ करने वाला गिरोह पकड़ा गया।

    चोरी के मोबाइल से बैंक खाते साफ करने वाला गिरोह पकड़ा गया।

    HighLights

    1. दिल्ली पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया।

    2. मोबाइल चोरी कर बैंक खातों से पैसे उड़ाते थे आरोपित।

    3. जयपुर, मेरठ-गाजियाबाद से नौ ठग गिरफ्तार, लाखों बरामद।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। मध्य जिला पुलिस ने मोबाइल फोन चोरी करने के बाद उनसे जुड़े बैंक खातों से रकम उड़ाने वाले दो-स्तरीय अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए नौ आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने जयपुर और मेरठ-गाजियाबाद में एक साथ कार्रवाई कर गिरोह के कॉल सेंटर संचालकों और ठगी के लिए म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क को ध्वस्त किया है।

    पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से चार लैपटाप, दो मोबाइल टैबलेट, 52 मोबाइल, 70 डेबिट कार्ड, 145 सिम कार्ड, छह पीओएस मशीन, 13 बैंक पासबुक, चार हाई-स्पीड इंटरनेट राउटर और चार लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा ठगी से जुड़े लेनदेन का हिसाब रखने वाली व्यक्तिगत डायरियां भी मिली हैं।

    पुलिस के मुताबिक, मामले की शुरुआत पश्चिम पटेल नगर निवासी 88 वर्षीय बुजुर्ग की शिकायत से हुई। उनका मोबाइल 19 मई को चोरी हो गया था। 21 मई को सिम दोबारा जारी कराने के बाद उन्हें बैंक से कई एसएमएस मिले।

    जांच करने पर पता चला कि उनके केनरा बैंक खाते से उनकी अनुमति के बिना 25 हजार, 20 हजार और 25 हजार रुपये यानी कुल 70 हजार रुपये निकाल लिए गए थे। पीड़ित ने तत्काल साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की। इसके बाद 23 जुलाई को साइबर थाने में एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू हुई।

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    मामले की गंभीरता को देखते हुए इंस्पेक्टर योगराज दलाल, एसएचओ साइबर पुलिस स्टेशन की देखरेख और एसीपी पहाड़गंज सौरभ नरेंद्र के पर्यवेक्षण में विशेष टीमें गठित की गईं। एसआइ नवीन और कांस्टेबल मुकेश की टीम जयपुर भेजी गई, जबकि हेड कांस्टेबल संजीव, दीपक और कांस्टेबल दीपक की टीम ने मेरठ और गाजियाबाद में कार्रवाई की।

    ऐसे करते थे ठगी

    जांच में सामने आया कि गिरोह कई स्तरों पर काम करता था। पहले मोबाइल चोरी किए जाते थे। इसके बाद मेरठ और गाजियाबाद में सक्रिय नेटवर्क चोरी या फर्जी तरीके से हासिल किए गए बैंक खातों, डेबिट कार्ड, सिम और पीओएस मशीनों की व्यवस्था करता था।

    जयपुर स्थित कॉल सेंटर जैसे सेटअप से तकनीकी ऑपरेटर चोरी हुए मोबाइल से जुड़ी बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच बनाकर पीड़ितों के खातों से रकम म्यूल खातों में स्थानांतरित करते थे। इसके बाद पीओएस मशीन और आनलाइन भुगतान माध्यमों से रकम तेजी से निकाल ली जाती थी।

    जयपुर से हो रहा था लेनदेन का संचालन

    वित्तीय लेनदेन और डिजिटल गतिविधियों की निगरानी के दौरान पुलिस को पता चला कि म्यूल अकाउंट की सप्लाई मेरठ-गाजियाबाद से हो रही थी, जबकि बैंकिंग सिस्टम में सेंधमारी और लेनदेन का संचालन जयपुर से किया जा रहा था।

    सर्वर और डिजिटल साक्ष्य मिटाए जाने की आशंका को देखते हुए टीम ने जयपुर के झोटवाड़ा स्थित एक मकान पर छापा मारकर निखिल सोनी और उसके चार साथियों को गिरफ्तार किया। वहां कॉल सेंटर जैसा पूरा सेटअप मिला।

    इसी दौरान दूसरी टीम ने मेरठ और गाजियाबाद में कार्रवाई कर अमर जाटव, हर्ष, मोहन और वाशु को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, ये आरोपित म्यूल बैंक खातों की व्यवस्था कर गिरोह को उपलब्ध कराते थे।

    ये आरोपित हुए गिरफ्तार

    जयपुर माड्यूल से निखिल सोनी, अभिषेक कुमार झा, आनंद साह सोनार और प्रिंस साह सोनार समेत पांच आरोपित पकड़े गए हैं। वहीं मेरठ-गाजियाबाद माड्यूल से अमर जाटव, हर्ष, मोहन और वाशु गिरफ्तार हुए हैं। पुलिस बरामद मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक दस्तावेज और डिजिटल उपकरणों की जांच कर गिरोह से जुड़े अन्य मामलों और आरोपितों का पता लगा रही है।

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