दिल्ली पुलिस ने 12 साल से फरार इनामी जालसाज को दबोचा, नकली पहचान बनाकर छिपा था तमिलनाडु में
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 12 साल से फरार 50 हजार के इनामी जालसाज मनोरंजन कंदासमी (62) को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया है। हालांकि, डिजिटल सबूतों क ...और पढ़ें

दिल्ली पुलिस ने लंबी जांच के बाद तमिलनाडु से 50 हजार के इनामी को गिरफ्तार किया है। प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
दिल्ली पुलिस ने 12 साल से फरार जालसाज को पकड़ा।
50 हजार का इनामी, तमिलनाडु में छिपा था।
नकली पहचान बनाकर पोल्ट्री व्यवसाय कर रहा था।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े ऑपरेशन में 50 हजार रुपये के इनामी और 12 साल से अधिक समय से फरार जालसाजी के आरोपित मनोरंजन कंदासमी (62 वर्ष) को तमिलनाडु से गिरफ्तार कर लिया है। वह परिवार के साथ एक झूठी पहचान बनाकर रह रहा था। पुलिस से बचने के लिए आरोपित ने रिश्तेदारों से संपर्क खत्म कर लिया था। नया पेशा अपना लिया था। फिर भी डिजिटली सुबूतों के आधार पर हो रही जांच में वह पकड़ा गया।
पॉलिटिकल पार्टी के फर्जी लेटरहेड बरामद
क्राइम ब्रांच की सेंट्रल रेंज ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है। आरोपित के खिलाफ वर्ष 2007 में मंदिर मार्ग थाने में एक शिकायत दर्ज हुई थी।
हैदराबाद निवासी विजय कुमार ने बताया था कि धर्मशाला में ठहरने के दौरान उन्होंने अलमारी में सोने के जेवर और कीमती सामान रखे थे। लौटने पर ताला तोड़ा हुआ और सामान गायब मिला।
जांच में कर्नाटक मूल के मनोरंजन कंदासमी को गिरफ्तार किया गया। चोरी का माल तो नहीं मिला लेकिन उसके पास कई फर्जी और खाली लेटरहेड बरामद हुए, जो प्रतिष्ठित राजनीतिक दफ्तरों और सरकारी अधिकारियों के नाम पर बने थे।
2014 में घोषित किया गया भगोड़ा
सत्यापन में ये दस्तावेज नकली पाए गए। इसके बाद अलग से जालसाजी का मामला दर्ज किया गया। दोनों मामले क्राइम ब्रांच को सौंप दिए गए। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया, लेकिन करीब एक महीने बाद कोर्ट ने जमानत दे दी।
इसके बाद वह कोर्ट में पेश नहीं हुआ और फरार हो गया। साल 2014 में पटियाला हाउस कोर्ट ने उसे प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर (भगोड़ा) घोषित कर दिया। कई वर्षों तक वह नहीं पकड़ा जा सका। बाद में उसकी गिरफ्तारी की सूचना पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया।
डिजिटली साक्ष्य जुटाए गए
क्राइम ब्रांच के एसीपी सतेंद्र मोहन की देखरेख में इंस्पेक्टर महिपाल सिंह की अगुवाई वाली टीम गठित की गई। टीम ने आरोपित के डिजिटल कम्यूनिकेशन रिकॉर्ड को खंगाला और अहम सुराग जुटाए। एक महीने से अधिक की निगरानी के बाद तमिलनाडु में उसके द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा मोबाइल नंबर पहचाना गया। इसके आधार पर वहां जांच कर आरोपित को दबोचने की योजना बनाई गई।
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लगातार अपनी पहचान छिपाए रखा
अंततः 4 अगस्त को नामक्कल जिले के तिरुचेंगोडे की सरहद पर स्थित एक गोदाम से उसे गिरफ्तार कर लिया गया, जहां वह पोल्ट्री बिजनेस कर रहा था। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि जमानत मिलने के बाद वह दोबारा हिरासत में जाने के डर से फरार हो गया था। उसे सजा और जेल जाने का डर था।
इसलिए उसने पुराने साथियों से संपर्क तोड़ लिया, निवास स्थान बदला और तमिलनाडु शिफ्ट हो गया। वहां परिवार के साथ बस गया, नई आजीविका शुरू की और लगातार अपनी पहचान छिपाए रखा।
आरोपी की उम्र 62 वर्ष है। वह मूलत: कर्नाटक के मंगलुरु का रहने वाला है। पिछले कई वर्षों से तमिलनाडु के तिरुचेंगोडे में परिवार के साथ रह रहा था। उसकी शादी हो चुकी है और दो बच्चे हैं। वह पोल्ट्री फार्म चलाकर परिवार का गुजारा करता था।