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    'खून से सनी वर्दी और 4 टांके...' CJP प्रदर्शन में घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों का छलका दर्द, कोर्ट से न्याय की गुहार

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 06:58 PM (IST)

    जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन के दौरान घायल दिल्ली पुलिसकर्मियों के स्वजन ने हिंसा, खौफ और दर्द की दास्तां बयां करते हुए न्याय की गुहार लगाई। ...और पढ़ें

    घायल पुलिसकर्मियों के स्वजन ने हिंसा की दास्तां सुनाई।

    घायल पुलिसकर्मियों के स्वजन ने हिंसा की दास्तां सुनाई।

    HighLights

    1. घायल पुलिसकर्मियों के स्वजन ने हिंसा की दास्तां सुनाई।

    2. पुलिस को अपराधी बताने वाले दुष्प्रचार का खंडन किया।

    3. संसद से पुलिसकर्मियों के मानवाधिकारों पर सवाल उठाने की अपील।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में घायल दिल्ली पुलिस कर्मियों के स्वजन ने अपनी पीड़ा बताते हुए उपद्रव, खौफ और दर्द की दास्तां बयान की।उन्होंने कहा कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को जिस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा, उसने पूरे परिवार को अंदर तक हिला दिया।

    एक तरफ उनके अपने गंभीर रूप से जख्मी हुए, तो दूसरी तरफ इंटरनेट मीडिया पर उन्हें ही अपराधी साबित करने का कुप्रचार चलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून-व्यवस्था संभालने गए पुलिसकर्मियों को ही निशाना बनाया गया। इस दौरान कान्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में पुलिसकर्मियों की पत्नियों, बेटे व बेटी ने उस डरावनी रात का आंखों देखा हाल बयां करते हुए न्याय की गुहार लगाई है।

    घायल एसीपी की पत्नी बाेलीं- वर्दी के पीछे पुलिस अधिकारी नहीं पूरा परिवार होता है

    हिंसा में घायल एसीपी अर्शदीप की पत्नी उपनीत कौर ने बताया कि जब रात में उनके पति घायलावस्था में घर लौटे तो वह उनके और उनकी दो वर्षीय बेटी के लिए डरावना अनुभव था। उन्होंने बताया कि पुलिस लगातार भीड़ से शांत रहने की अपील कर रही थी, लेकिन इसके बावजूद पुलिसकर्मियों पर बोतलें, पत्थर, चप्पल और दूसरी चीजें फेंकी गईं।

    उन्होंने कहा कि हर वर्दी के पीछे सिर्फ एक पुलिस अधिकारी नहीं होता, उसके पीछे पत्नी, बच्चे, माता-पिता और पूरा परिवार होता है। उन्होंने बताया कि हिंसा के पीछे छात्रों को दोषी नहीं ठहराया जा रहा, लेकिन भीड़ में शामिल कुछ असामाजिक तत्वों पर हिंसा भड़काने का आरोप जरूर लगाया जा रहा है।

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    सब इंस्पेक्टर की बेटी बोली - खून से लथपथ वर्दी देख रात भर सदमे में रहा परिवार

    इस हिंसक झड़प में घायल हुए सब इंस्पेक्टर संदीप की बेटी कुंजल ने बताया कि उनके पिता इस प्रदर्शन के दौरान फ्रंटलाइन पर तैनात थे। वह इससे पहले 15 साल तक भारतीय नौसेना में मरीन कमांडो रह चुके हैं। जब उनके पिता ड्यूटी के बाद घर लौटते थे, तो अक्सर यही बताते थे कि अब यह कोई साधारण छात्र आंदोलन नहीं रह गया है, बल्कि इसमें कुछ गलत और उपद्रवी तत्व पूरी तरह से घुसपैठ कर चुके हैं।

    कुंजल ने उस भयानक रात को याद करते हुए बताया कि 25 जुलाई की रात करीब 10 बजे उनके पिता को साथी पुलिसकर्मी घायल हालत में घर लेकर पहुंचे थे। उनकी वर्दी खून से सनी हुई थी और सिर में चार टांके आए हुए थे। भावुक होते हुए उन्होंने बताया कि कैसे उपद्रवियों की भीड़ ने उनकी माब लिंचिंग की।

    एक तरफ उनके पिता अपनी जान हथेली पर रखकर देश की राजधानी की सुरक्षा संभाल रहे थे, वहीं इंटरनेट मीडिया पर उन्हीं के पिता को अपराधी साबित करने की गंदी कोशिश की जा रही थी। उन्होंने यह भी बताया कि जिन उपद्रवियों ने उनके पिता और अन्य पुलिसकर्मियों पर हमले किए, वे पुलिसवालों को ही अपराधी साबित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए थे, जिसके बाद मजबूर होकर उनके परिवार को भी न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

    कायराना हमलों के बारे में संसद के भीतर गंभीर सवाल जाएं : सीमा

    घायल एएसआइ धर्मेंद्र सिंह की पत्नी सीमा ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि उन्होंने 20 जुलाई की शाम करीब सात बजे पति को फोन किया था, तब उन्हें पता चला कि वे अस्पताल में अपना इलाज करा रहे हैं। उनके पति ने बताया था कि प्रदर्शन की भीड़ में कुछ असामाजिक और शरारती तत्व पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं, जिन्होंने पुलिस बल पर अचानक पत्थरों और घातक हथियारों से जानलेवा हमला कर दिया है।

    इसके बाद अचानक उनका फोन बंद हो गया, जिससे पूरे परिवार की धड़कनें और डर बढ़ गया। रात करीब 11 बजे जब वे घर पहुंचे तो उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने संसद की सुरक्षा के लिए लगाई गई मजबूत बैरिकेडिंग को जबरन तोड़ दिया था और पुलिस फोर्स पर हमला किया। ड्यूटी के दौरान उनकी सुरक्षा के लिए मिला आधिकारिक हेलमेट भी पूरी तरह से चकनाचूर हो चुका था।

    सीमा ने देश की संसद में बैठे जनप्रतिनिधियों से हाथ जोड़कर अपील करते हुए कहा कि हमारे पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के मानवाधिकारों और उन पर हुए कायराना हमलों के बारे में संसद के भीतर गंभीर सवाल उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि घटना के बाद से लगातार यह झूठा नैरेटिव चलाया जा रहा है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण छात्रों पर लाठीचार्ज किया, जबकि इस प्रोटेस्ट का दूसरा और कड़वा सच कुछ और ही है।

    पिता को घायल देख सहम उठा बेटा

    घायल एसीपी कैलाश बिष्ट के बेटे दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र लक्ष्य ने बताया कि जब उन्होंने अपने पिता को सिर पर टांके और कटे हुए बालों के साथ अस्पताल में देखा, तो वे पूरी तरह सहम गए थे। लक्ष्य ने कहा कि उनके पिता ने बताया था कि विरोध प्रदर्शन में कई लोग आए थे, लेकिन कुछ उपद्रवियों का मकसद सिर्फ अराजकता फैलाना था।

    लक्ष्य ने निराशा जताते हुए कहा कि यह देखकर बहुत दुख होता है कि जब भी मैं आनलाइन जाता हूं, तो हर जगह सिर्फ पुलिस को अपराधी की तरह पेश किया जा रहा है। संसद में भी घायल पुलिसकर्मियों पर कोई चर्चा नहीं हो रही है। हम बस इतना चाहते हैं कि देश हमारा पक्ष भी सुने।

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