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    दिल्ली में हरियाली पर 61 करोड़ का अतिरिक्त खर्च, फिर भी सड़कें वीरान

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 10:16 PM (IST)

    राजधानी दिल्ली में हरियाली बढ़ाने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) का खर्च 61 करोड़ रुपये बढ़ गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति खराब हुई है। ...और पढ़ें

    राजधानी दिल्ली में हरियाली बढ़ाने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) का खर्च 61 करोड़ रुपये बढ़ गया है। इमेज एआई

    राजधानी दिल्ली में हरियाली बढ़ाने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) का खर्च 61 करोड़ रुपये बढ़ गया है। इमेज एआई

    वी के शुक्ला, नई दिल्ली। राजधानी की सड़कों पर हरियाली बढ़ाने के लिए किए जा रहे खर्च में इस साल बैठे-बिठाए 61 करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हो गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर दिखाई नहीं दे रहा है। उल्टे कई स्थानाें पर हालात पहले से भी खराब हाे गए हैं। यहां तक कि कुछ स्थानों पर खाली स्थान भरने के लिए लगाए गए पौधाें की भी सुध नहीं ली जा रही है।

    अभी भी लगाए गए पौधों का भविष्य वर्षा पर निर्भर है। ऐसे में हरियाली बढ़ाने की लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की नई व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। इस संबंध में पुरानी कंपनियों को समय से पहले हटाकर नई कंपनियों को लगाने का फैसला लेने वाले पीडब्ल्यूडी के प्रधान मुख्य अभियंता विवेकानंद विवेक से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, मगर उन्होंने फाेन नहीं उठाया और संदेश का जवाब नहीं दिया।

    पूरी स्थिति पर नजर डालें तो पीडब्ल्यूडी के पास 1440 किलोमीटर लंबी सडकें हेँ। इन सड़काें के सेंट्रल वर्ज और सड़कों के दोनों ओर जगह की उपलब्धता के अनुसार हरियाली विकसित किए जाने का प्रविधान है।

    इसके तहत पीडब्ल्यूडी ने अक्टूबर 2024 में 19 कंपनियों को 66 टेंडरों के माध्यम से तीन वर्षों के लिए सड़कों पर हरियाली विकसित करने और उसके रखरखाव का काम सौंपा गया था। इसके तहत शुरुआत के छह माह तक खाली क्षेत्रों को पौधे लगlकर भरने का भी कार्य शामिल था। इस काम के लिए 183 करोड़ रुपये में टेंडर फाइनल हुए थे।

    मगर विभाग ने अचानक 2025 के शुरुआती महीनों में कारण बताओ नोटिस जारी कर इन सभी ठेकों को यह कह कर निरस्त कर दिया कि इनका काम घटिया है। मगर नोटिस दिए जाने के बाद भी निरस्त की गईं कंपनियों से खर्च किए गए पैसे की रिकवरी नहीं की गई, बल्कि नोटिस के बाद भी उनका अधिकतर भुगतान कर दिया गया।

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    यहां तक कि एक कंपनी के टेंडर नंबर 46 के नौ करोड़ के उस भुगतान को भी पूरी तरह कर दिया गया जो काम अक्टूबर 2027 तक के लिए निर्धारित किया गया था। इसके बाद इस साल विभाग ने नए सिरे से टेंडर जारी कर चार नई कंपनियों को 12 नए टेंडरों के माध्यम से यही काम 244 करोड़ रुपये में आवंटित कर दिया। इस बदलाव से परियोजना की लागत 61 करोड़ रुपये से अधिक बढ़ गई है।

    मगर इस काम में एक उस पुरानी कंपनी को काम भी दे दिया गया जिसके काम को निरस्त किए गए टेंडर में काम संताेषजनक नहीं माना गया था। आरोप है कि विभाग के संबंधित अधिकारियों ने टेंडर इस तरह बनाए कि इस काम के लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) में पंजीकृत एक भी कंपनी इन टेंडर भाग नहीं ले सकी।

    अब दिल्ली में मानसून आ चुका है उसके बाद भी अगर आप इस समय भी दिल्ली के किसी भी इलाके में जाकर देखेंगे तो हरियाली को लेकर बुरा हाल ही मिलेगा। थोड़ा बहुत कुछ अच्छी स्थिति रिंग रोड के आइटीओ से लेकर आइएसबीटी कश्मीरी गेट तक के हिस्से में देखने को मिलती है।

    मगर यहां पर भी कई स्थानों पर खाली स्थान मौजूद हैं। जानकारों का कहना है कि वर्षा हो जाने से हरियाली की दशा जरूर कुछ बदल गई है, मगर हालात नहीं बदले हैं। क्योंकि हरियाली के रखरखाव पर लापरवाही जारी है। वहीं ज्यादातर वही पुराने कर्र्मचारी और संसाधन अभी भी मौजूद हैं जो पूर्व की कंपनियों के समय काम कर रहे थे। कंपनी अनुबंध विवरण

    कंपनियों को मिले काम का विवरण

    जोन कंपनी का नाम राशि (करोड़ ₹)
    पूर्वी जोन (कुल 74 करोड़)
    पूर्वी जोन एलएंडके प्राइवेट लिमिटेड 24
    पूर्वी जोन वीसीसी लैंडस्केप 9
    पूर्वी जोन मिलेनियम एग्रोटेक 41
    उत्तरी जोन
    उत्तरी जोन वीसीसी लैंडस्केप 95
    दक्षिणी जोन
    दक्षिणी जोन राजधानी फ्लोरा इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स प्रा. लिमिटेड 75

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