खतरनाक थे दिल्ली ब्लास्ट के ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकियों के मंसूबे, 4 साल से रच रहे थे साजिश; निशाने पर थी ग्लोबल कॉफी चेन
लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट की जांच में एक व्यापक आतंकी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। यह "व्हाइट कॉलर" मॉड्यूल चार साल से सक्रिय था, जिसमें डॉक्टर भी ...और पढ़ें

पिछले साल नवंबर में लाल किले के पास विस्फोट कर आतंकियों ने पूरे देश को दहलाया था। जागरण आर्काइव

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट की जांच ने एक व्यापक और संगठित आतंकी नेटवर्क का खुलासा किया है। शुरुआती तौर पर इसे एक अलग-थलग घटना माना जा रहा था, लेकिन अब सामने आया है कि यह चार वर्षों से सक्रिय एक मॉड्यूल की बड़ी साजिश का हिस्सा था।
कई शहरों में हमले की साजिश
NIA सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों का नेटवर्क केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था। मॉड्यूल ने देश के कई प्रमुख शहरों में हमलों की योजना बनाई थी। खास तौर पर एक अंतरराष्ट्रीय कॉफी चेन के आउटलेट्स को निशाना बनाने की तैयारी की जा रही थी, ताकि अधिकतम प्रचार और दहशत फैलाई जा सके।
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‘व्हाइट कॉलर’ नेटवर्क का खुलासा
इस मॉड्यूल की सबसे चौंकाने वाली बात इसका प्रोफाइल है। जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए लोगों में तीन डॉक्टर शामिल हैं। एजेंसियों का कहना है कि यह समूह पिछले चार साल से चुपचाप सक्रिय था और अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए पेशेवर पहचान का इस्तेमाल कर रहा था।
जैश से कनेक्शन की जांच
मामले की जांच में जैश-ए-मोहम्मद से संभावित संबंधों की कड़ियां भी सामने आई हैं। एजेंसियों का दावा है कि रेड फोर्ट कार ब्लास्ट उसी व्यापक योजना का हिस्सा था, जिसे बड़े हमलों की श्रृंखला में अंजाम दिया जाना था। अक्टूबर 2025 में जम्मू-कश्मीर पुलिस को मिले इनपुट के बाद जांच तेज हुई और कई अहम सुराग हाथ लगे।
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समय रहते टले हमले
सूत्रों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर पुलिस की सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई से नवंबर और दिसंबर के दौरान दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में संभावित हमलों को रोका जा सका।
यूनिवर्सिटी का दुरुपयोग
जांच एजेंसियों ने खुलासा किया है कि मॉड्यूल ने फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी परिसर का इस्तेमाल विस्फोटक इकट्ठा करने और आईईडी तैयार करने के लिए किया। कार्रवाई के दौरान करीब 2,900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद की गई।
यह भी सामने आया है कि नेटवर्क के कुछ सदस्य तुर्की में ट्रेनिंग ले चुके थे और विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में थे। एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों और फंडिंग स्रोतों की गहन जांच में जुटी हैं, ताकि इस तरह की साजिशों को जड़ से खत्म किया जा सके।