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    दिल्ली के रिहायशी इलाके बन रहे बाजार, नियमों की अनदेखी से बढ़ा आग और जाम का खतरा

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 12:10 AM (IST)

    अधिकारियों की मिलीभगत से रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ रही हैं, जिससे यातायात जाम और बच्चों की पढ़ाई में बाधा आ रही है। फायर एनओसी की क ...और पढ़ें

    न्यू फ्रेंडस कालोनी के रिहायशी इलाके में खुले होटल रेस्तरां व दुकानें । जागरण

    न्यू फ्रेंडस कालोनी के रिहायशी इलाके में खुले होटल रेस्तरां व दुकानें । जागरण

    HighLights

    1. रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों से यातायात जाम गंभीर।

    2. अधिकारियों की मिलीभगत से बढ़ रहा अवैध व्यवसायों का जाल।

    3. फायर सुरक्षा उपायों की कमी से जान का जोखिम बढ़ा।

    निहाल सिंह, नई दिल्ली। मानिटरिंग कमेटी ने रिहायशी इलाकों में हो रही व्यावसायिक गतिविधियों पर चिंता जाहिर की है लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। क्योंकि अधिकारियों की मिलीभगत से रिहायशी इलाके बाजारों में तब्दील हो रहे हैं।

    जिसकी वजह से रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों के बच्चों की स्कूली पढ़ाई में भी व्यवधान होता है। इतना ही नहीं इन इलाकों में यातायात जाम की गंभीर स्थिति बन गई है। कई घंटों का ऐसा जाम इन इलाकों में लगता है जैसा की मुख्य मार्गों पर लगता है। एमसीडी, पुलिस और अग्निशमन विभाग के अधिकारियों से साठगांठ से यह सब हो रहा है।

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    मध्य दिल्ली के पहाड़गंज, करोल बाग, राजेंद्र नगर, मुखर्जी नगर और पटेल नगर जैसे रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों की बाड़ है। गली-गली में कोचिंग सेंटर, जिम और रेस्त्रां संचालित हो रहे हैं। इसी प्रकार की स्थिति पूर्वी दिल्ली की है।

    गलियों तक पहुंचे व्यवसायिक गतिविधियां

    दयानंद विहार, आइपी एक्सटेंशन, प्रीत विहार के साथ-साथ कृष्णा नगर, अजित नगर,मंडोली रोड,पांडव नगर और गीता कालोनी समेत कई रिहायशी क्षेत्रों में अनियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से फैल रही हैं। मुख्य सड़कों से निकलकर रेस्तरां, गेस्ट हाउस, अस्पताल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान अब संकरी गलियों तक पहुंच चुके हैं।

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    दिल्ली के सघन रिहायशी इलाके व्यवसायिक गतिविधियों के केंद्र बनते जा रहे हैं। न नियम की परवाह न कानून का डर। आवश्यक अनुमति तो दूर की बात फायर एनओसी या आग से बचाव के इंतजाम तक नहीं होते। आपात स्थिति में राहत व बचाव कार्य तक समय रहते नहीं हो पाते।

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    विभागीय मिलीभगत नागरिकों के जान जोखिम में डाल रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण हौज रानी होटल में लगी भीषण आग की घटना है। हादसे में 23 लोगों की मौत हुई तो वहीं 36 से ज्यादा घायल हुए। दक्षिणी दिल्ली बात की करें लाजपत नगर की आवासीय कालोनियों में भी व्यवसायिक गतिविधियां संचालित होने लगीं।

    आवासीय मकानों के ग्राउंड फ्लोर या बेसमेंट में बिना फायर एनओसी के बुटीक, कैफे, गारमेंट शाप और गोदाम चल रहे हैं। आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड का जाना लगभग असंभव। जहां सड़कें हैं भी वहीं दोनों तरफ वाहन पार्क होने से भी यही स्थिति बन जाती है।

    आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस या दमकल की गाड़ियों का अंदर पहुंचना नामुमकिन हो जाता है। लाजपत नगर के अलावा डिफेंस कालोनी, न्यू फ्रेंड्स कालोनी, शाहीनबाग, बटला हाउस, गोविंदपुरी, महरौली, हौजरानी, हौज खास गांव में भी तंग गलियों में रेस्तरां, दुकान और गोदामों की भरमार हैं। पश्चिमी दिल्ली में द्वारका मोड़ के आसपास ऐसे कई लाज नजर आते हैं।

    वोट बैंक बन गए उल्लंघकर्ता, मुश्किल है कार्रवाई

    दिल्ली में व्यापारी वर्ग एक बड़े वोट बैंक का हिस्सा है। अब रिहायशी इलाकों में व्यापार करने वाले लोग भी इसी का हिस्सा बन चुके हैं। इसलिए इस पर कार्रवाई की हिम्मत शायद ही राजनीतिक दल कर पाएं।

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    क्योंकि दिल्ली में संपत्तियों के दुरुपयोग पर मानिटरिंग कमेटी के ही आदेश पर सीलिंग 2005-06 में शुरू हुई थी। लेकिन इन दुकानों को बंद कराने की बजाय वह दुकानें और खुल सकें उसी के अनुरूप नियम भी बन गए।

    ये विभाग हैं जिम्मेदार

    • एमसीडी का जन स्वास्थ्य विभाग
    • एमसीडी का लाइसेंसिंग विभाग
    • पुलिस
    • दिल्ली अग्निशमन विभाग

    हमारे विभाग नियमों के अनुसार कार्य हो इसके लिए कार्य रहते हैं। हमारी कोशिश है कि लोगों को कोई दिक्कत न हो। वहीं, नागरिकों से भी अपील है कि वह नियमों का पालन करें।

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    प्रवेश वाही, महापौर, दिल्ली