दिल्ली की नई स्लम नीति: झुग्गियों में बनेंगे शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और ई-रिक्शा चार्जिंग स्टेशन
दिल्ली सरकार नई स्लम पुनर्वास नीति तैयार कर रही है, जिसके तहत झुग्गीवासियों को शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, पार्किंग और ई-रिक्शा चार्जिंग पॉइंट जैसी सुविधाएं म ...और पढ़ें
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झुग्गी बस्तियों में शापिंग कॉम्प्लेक्स, पार्किंग एरिया और ई-रिक्शा चार्जिंग प्वाइंट जैसी सुविधाएं देने की योजना।
HighLights
नई नीति में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, पार्किंग, ई-रिक्शा चार्जिंग सुविधा।
पात्रता अवधि 1 जनवरी 2025 तक बढ़ाई जाएगी।
पुरानी नीति से 52,584 फ्लैट आवंटित नहीं हो सके।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली सरकार तैयार हो रही नई स्लम पुनर्वास नीति के तहत इन इलाकों में रहने वालों को शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, पार्किंग एरिया और ई-रिक्शा चार्जिंग प्वाइंट जैसी सुविधाएं देने की योजना बना रही है।
सरकार की प्रस्तावित नीति के अनुसार जिन सुविधाओं पर विचार किया जा रहा है उनमें स्कूल, जन सुविधा केंद्र आदि की व्यवस्था भी शामिल है। इस नीति की तैयारी अंतिम चरण में है और इस महीने इसे अंतिम रूप दे दिए जाने की संभावना है।
यहां बता दें कि सरकार मौजूदा नीति के तहत लाभार्थियों की पात्रता अवधि 1 जनवरी, 2015 से 10 साल बढ़ाकर 1 जनवरी, 2025 करने की भी योजना बना रही है, जिससे कई स्लम में रहने वाले लोग पक्के घर के लिए अधिक्रत हो सकेंगे। दिल्ली में लगभग 750 स्लम क्लस्टर हैं।
आधी झुग्गियां केंद्र सरकार की एजेंसियों की जमीन पर
इनमें से लगभग आधी झुग्गियां रेलवे, भूमि एवं विकास विभाग (एलएनडीओ) और डीडीए जैसी केंद्र सरकार की एजेंसियों की जमीन पर हैं, जो उनके पुनर्वास के लिए नोडल एजेंसी के तौर पर काम करती हैं। अन्य झुग्गी-झोपड़ियां दिल्ली सरकार की जमीन पर हैं, जहां पुनर्वास की जिम्मेदारी दिल्ली के शहरी विकास विभाग के तहत दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) करता है।
अभी दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास का काम दिल्ली स्लम और झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास और पुनर्वास नीति, 2015 के तहत होता है, जो झुग्गियों को उसी जगह पर या झुग्गी वालाें को पांच किलोमीटर के दायरे में दूसरी जगह देकर पुनर्वास को प्राथमिकता देती है।
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झुग्गी वालों काे अब तक आवास नहीं मिल सका
एक झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले को 25 वर्ग मीटर के घर के लिए 1.12 लाख रुपये और पांच साल के लिए रखरखाव के लिए 30,000 रुपये निर्धारित हैं। हालांकि इस नीत के तहत दिल्ली में एक भी झुग्गी वालों काे अब तक आवास नहीं मिल सका है। यह नीति शुरू से ही विवादों में आ गई थी। जब उस समय की आप सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना को दिल्ली में लागू न कर अपनी नीति तैयार कर इसे लागू किया था, जिसे लेकर अड़गे ही लगते रहे।
इसी कारण है 2008 से दिल्ली सरकार ने डूसिब और दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं ढांचागत विकास निगम (डीएसआइआइडीसी) के जरिए, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों के पुनर्वास के लिए द्वारका, सुल्तानपुरी, भलस्वा-जहांगीरपुरी, सावदा घेवरा, पूठ खुर्द और टिकरी कलां में बनाए गए 52,584 फ्लैट झुग्गी वालों को आवंटित नहीं हो पाए।