Delhi SIR: क्या कट जाएंगे 1 तिहाई दिल्लीवालों के नाम? 24 अगस्त को जारी होगी नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट
दिल्ली में मतदाता सूची के डिजिटलीकरण की धीमी रफ्तार के कारण 33% मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से कटने का खतरा है, जो 24 अगस्त को जारी होगी।

दिल्ली में एसआईआर का काम करती टीम। फोटो: आर्काइव
HighLights
दिल्ली में 33% मतदाता सूची डिजिटलीकरण बाकी है।
24 अगस्त को जारी होगी नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के एसआईआर के तहत घर-घर फॉर्म पहुंचाने में सभी 13 जिले एक समान शत प्रतिशत रहे, लेकिन फॉर्म के डिजिटलीकरण की रफ्तार काफी कम है। 30 जून से शुरू हुआ फॉर्म वितरण व डिजिटलाइजेशन का चरण सोमवार को संपन्न हो गया।
लिस्ट से हट सकता है हर 3 में से 1 रजिस्टर्ड वोटर
इस दौरान दिल्ली के सभी 1,45,10,299 मतदाताओं तक फॉर्म पहुंचाने का काम पूरा हो गया। जबकि, 67.18 फीसदी के साथ अब तक 97,47,879 फॉर्म ही डिजिटलाइज किए जा सके हैं। अभी भी 47.62 लाख रजिस्टर्ड वोटरों (यानी 33%) के फॉर्म का डिजिटाइजेशन बाकी है। दिल्ली में हर तीन रजिस्टर्ड वोटरों में से एक का नाम उस ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं होगा, जिसे 24 अगस्त को जारी किया जाएगा।

अभी डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हुए 6.80 लाख फॉर्म
उसमें भी सबसे आगे और सबसे पीछे जिले के बीच अंतर 19.36 प्रतिशत का है। बाहरी उत्तर जिले में जहां 75.68 प्रतिशत तक फॉर्म डिजिटाइज हो चुके हैं, जबकि दक्षिण-पूर्व जिले में सिर्फ 56.32 प्रतिशत। दक्षिण-पूर्व जिले में कुल 15,57,289 मतदाता हैं। उनमें से 8,77,064 फॉर्म ही डिजिटाइज हुए हैं। यानी करीब 6.80 लाख फॉर्म अभी डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हुए हैं।
यह दिल्ली के सभी जिलों में लंबित फॉर्म की सबसे बड़ी संख्या है। इसके उलट बाहरी उत्तरी जिले में कुल 8,32,510 मतदाताओं के फॉर्म में से 6,30,030 डिजिटाइज हो चुके हैं। यहां डिजिटाइजेशन दर 75.68 प्रतिशत है, जो सभी जिलों में सर्वाधिक है।
चार जिलों में 23 लाख से अधिक का डिजिटलाइजेशन बाकी
सिर्फ प्रतिशत के लिहाज से ही नहीं, फॉर्म की संख्या के मामले में भी जिलों के बीच बड़ा अंतर है। दक्षिण-पूर्व में करीब 6.80 लाख, पूर्व में करीब 5.71 लाख, उत्तर-पूर्व में 5.44 लाख और दक्षिण में करीब 5.20 लाख फॉर्म अभी डिजिटाइजेशन से बाहर हैं। यानी इन चार जिलों में ही करीब 23.15 लाख फॉर्म का डेटा डिजिटल होना बाकी है।
छह जिले दिल्ली के औसत 67.18 प्रतिशत से पीछे
डिजिटाइजेशन के दिल्ली औसत 67.18 प्रतिशत से भी छह जिले पीछे हैं। दक्षिण-पूर्व में 56.32 फीसदी, नई दिल्ली में 60.76, दक्षिण में 61.32, मध्य में 61.96, उत्तर में 64.15 और पूर्व में 64.37 फीसदी फॉर्म ही डिजिटाइज हुए हैं।
वहीं, बाहरी-उत्तरी, पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पूर्व और उत्तर-पश्चिम में डिजिटाइजेशन 70 फीसदी से अधिक है। उत्तर-पूर्व जिला 18,70,748 मतदाताओं के साथ सबसे ज्यादा मतदाताओं वाला जिला है। यहां 13,27,118 फॉर्म ही डिजिटाइज किए गए हैं। जिले का डिजिटाइजेशन 70.94 फीसदी है।
करीब 33 प्रतिशत फार्म जमा न होने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग एवं भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा 33 प्रतिशत के लगभग फॉर्म जमा न होने की बात स्वीकारना यह साबित करता है कि भाजपा अपने मनसूबे में कामयाब रही है।
देवेंद्र यादव का आरोप है कि बीएलओ द्वारा झुग्गी-झोपड़ी, गांवों और अनधिकृत कॉलोनियों में फॉर्म बांटे ही नहीं गए। इसके चलते 50 से 60 प्रतिशत लोगों को ''शिफ्ट'' बताकर उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। उन्होंने चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2002 से 2026 के बीच दिल्ली की जनसंख्या 1.44 करोड़ से बढ़कर 2.26 करोड़ हो चुकी है।
ऐसे में मतदाता सूची के लिए 2002 की मतदाता सूची को आधार बनाना पूरी तरह गलत है। उन्होंने मांग की है कि जिन 33 प्रतिशत लोगों के फार्म जमा नहीं हुए हैं, उनका डेटा उजागर किया जाए। मतदाता सूची में किए गए सभी बदलावों (जोड़े गए, हटाए गए और स्थानांतरित नाम) की जानकारी पते और फोन नंबर के साथ आधिकारिक सूची जारी होने से पहले पार्टी के बीएलए दो को दी जाए। साथ ही अप्रैल 2026 तक पंजीकृत सभी मतदाताओं का नाम नई मतदाता सूची में स्वत: जोड़ा जाए।
