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    Delhi SIR: 2002 की लिस्ट में नाम नहीं होने पर भी न घबराएं, चुनाव अधिकारी ने बताए नियम

    Updated: Sun, 26 Jul 2026 08:55 PM (IST)

    दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में आ रही समस्याओं पर उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रशांत कुमार प्रसाद ने स्पष्टीकरण दिया है। ...और पढ़ें

    दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में आ रही समस्याओं पर उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रशांत कुमार प्रसाद ने स्पष्टीकरण दिया है।

    दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में आ रही समस्याओं पर उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रशांत कुमार प्रसाद ने स्पष्टीकरण दिया है। 

    HighLights

    1. 2002 की सूची में लिंक न मिलने पर वैकल्पिक दस्तावेज मान्य।

    2. ड्राफ्ट सूची में नाम न होने पर फॉर्म 6 से दावा करें।

    3. बीएलओ की जवाबदेही तय, प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित।

    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) की प्रक्रिया इन दिनों जोरों पर चल रही है। शत- प्रतिशत मतदाताओं को एन्युमरेशन फार्म वितरित हो चुके हैं, उन्हें जमा कराने की प्रक्रिया जारी है। आठ अगस्त अंतिम तारीख है। लेकिन इन फॉर्मो को भरने में मतदाताओं को अनेकानेक परेशानी भी आ रही हैं। डर लगा रहता है कि कहीं मतदाता सूची से नाम न कट जाए। दैनिक जागरण के संजीव गुप्ता ने मतदाताओं के इसी डर को दूर करने के लिए दिल्ली के उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रशांत कुमार प्रसाद से लंबी बातचीत की।


    प्रश्न : दिल्ली में 27 दिन से जारी एसआइआर प्रक्रिया पूरी होने में अब केवल 13 दिन बचे हैं, लेकिन 50 प्रतिशत एन्युमरेशन फार्म भी जमा नहीं हो पाए। क्या कारण हैं?

    उत्तर : फार्म जमा कराने की प्रक्रिया अब जोर पकड़ रही है। हमें पूरी उम्मीद है कि अंतिम तिथि तक सभी फार्म जमा हो जाएंगे। काफी सारे फार्म, जो डिजिटाइज नहीं हुए हैं, उन लोगों के हैं, जो अब या तो शहर छोड़ गए या फिर जिंदगी का साथ। इन्हें भी धीरे धीरे डिजिटाइज किया जा रहा है।

    प्रश्न : लेकिन काफी लोग इसलिए भी अपना फार्म जमा नहीं कर पा रहे क्योंकि 2002 की मतदाता सूची में उनका कोई लिंक नहीं मिल पा रहा।

    उत्तर : देखिए, जिन मतदाताओं को 2002 की मतदाता सूची में कोई लिंक नहीं मिल पा रहा, वे परेशान हों। उनके लिए फार्म के पीछे ही 12 दस्तावेजों की सूची छपी हुई है। उनमें से अगर एक से दो दस्तावेज हैं, तब भी काम चल जाएगा। ऐसे मतदाताओं के पास अपना और माता- पिता का भारतीय जन्म प्रमाण होना चाहिए। बाकी 12 दस्तावेजों में से कोई एक प्रमाण पत्र पहचान के लिए देना होगा। जैसे- पासपोर्ट, घर या जमीन का सरकारी आवंटन पत्र, आवास का कोई सरकारी प्रमाण पत्र, दसवीं कक्षा का प्रमाण पत्र इत्यादि।

    प्रश्न : इस सबके बावजूद 17 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम न मिले तो क्या करें?

    उत्तर : तब भी परेशान होने की कोई जरूरत नहीं। 17 अगस्त से 16 सितंबर तक दावे और आपत्तियों के लिए पूरे एक महीने का समय रखा गया है। जिस किसी का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से कट गया हो या न मिल रहा हो, वह फार्म नं. छह भरकर अपने दस्तावेजों के साथ दावा कर सकता है, नाम जोड़ दिया जाएगा।

    प्रश्न : क्या नए वोट फिलहाल नहीं बन रहे हैं?

    उत्तर : आवेदन किया जा सकता है, लेकिन अभी बन नहीं रहे हैं। 19 अक्टूबर को फाइनल मतदाता सूची जारी होने पर नए वोट बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

    प्रश्न : बहुत से इलाकों की शिकायत है कि वहां के बीएलओ कामचोरी कर रहे हैं। तीन तीन बार घर जाने की डयूटी पूरी नहीं कर रहे। ऐसे में भी बहुत से मतदाताओं का फार्म जमा होने से छूट सकता है?

    उत्तर : बीएलओ की पूरी जवाबदेही तय की गई है। जितने फार्म उनके क्षेत्र में बंटे हैं, एक एक का हिसाब देना होगा। अगर कोई घर बंद है तो वहां बाकायदा स्टीकर लगाया जाएगा। एसआइआर की प्रक्रिया पूर्णत पारदर्शिता के साथ चल रही है। बीएलओ के कोई भी जवाब दे देने या बहाना बना देने को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    प्रश्न : बहुत सी जगह बीएलओ एन्युमरेशन फार्म के साथ दस्तावेज भी मांग रहे हैं। क्या यह सही है?

    उत्तर : देखिए, नियमानुसार तो एन्युमरेशन फार्म के साथ कोई भी दस्तावेज नहीं देना। लेकिन अगर कहीं कहीं बीएलओ मांग रहा है तो वह संभवतया मतदाता को भविष्य में होने वाली परेशानी से बचाने के लिए मांग रहा होगा। वर्ष 2002 की मतदाता सूची में लिंक न दे पाने वाले मतदाताओं के मामले में दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी।

    प्रश्न : कुछ मामलों में विदेशी नागरिकता भी बाधा बन रही है। जैसे, किसी के घर में विदेश की लड़ी बहू बनकर आई है। उसके पास न वर्ष 2002 की मतदाता सूची का कोई लिंक है और न कोई अन्य भारतीय दस्तावेज। तब क्या करें?

    उत्तर : ऐसे मामलों में सर्वप्रथम उस महिला को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करना होगा। जब नागरिकता मिल जाएगी तो अन्य सभी कार्य भी हो जाएंगे।

    प्रश्न : 2002 की मतदाता सूची में अगर माता- पिता का नाम गलत है और उनका एपिक नंबर भी नहीं है तो ऐसे में क्या किया जाए?

    उत्तर : 2002 की मतदाता सूची में माता-पिता का जो नाम दर्ज है, वहीं फार्म में भरे, इससे मैंपिग में दिक्कत नहीं आएगी। 17 अगस्त के बाद दावे आपत्तियों के दौरान फार्म-आठ भरकर और अपने दस्तावेज देकर सूची में नाम सही करवा सकते हैं। दूसरा, अगर 2002 की सूची में एपिक नंबर नहीं हो तो उस कालम को छोड़ दें। इससे कोई परेशानी नहीं होगी।

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