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    आधे घंटे की बारिश में खुली प्रशासन के दावों की पोल, जलभराव से डूबा यमुनापार का इलाका

    Updated: Sun, 26 Jul 2026 08:51 PM (IST)

    रविवार को यमुनापार में आधे घंटे की बारिश ने जलभराव रोकने के विभागीय दावों की पोल खोल दी। प्रमुख सड़कों पर पानी भरने से लोगों को आवागमन में भारी परेशान ...और पढ़ें

    रविवार को यमुनापार में आधे घंटे की बारिश ने जलभराव रोकने के विभागीय दावों की पोल खोल दी।

    रविवार को यमुनापार में आधे घंटे की बारिश ने जलभराव रोकने के विभागीय दावों की पोल खोल दी।

    HighLights

    1. आधे घंटे की बारिश ने खोली विभागीय दावों की पोल।

    2. यमुनापार की प्रमुख सड़कों पर हुआ भारी जलभराव।

    3. एनएच-नौ, पटपड़गंज मार्ग पर आवागमन बाधित।

    जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। रविवार दोपहर करीब एक बजे हुई महज आधे घंटे की वर्षा ने यमुनापार में जलभराव रोकने के लिए किए गए विभागीय दावों की पोल खोल दी। मानसून से महिनों पहले से एमसीडी,पीडब्ल्यूडी और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से नालों की सफाई, हॉटस्पाट क्षेत्रों की निगरानी और पंपिंग व्यवस्था को दुरुस्त करने के दावे किए जा रहे थे।

    इसके बावजूद वर्षा के तुरंत बाद एनएच-नौ और पटपड़गंज मार्ग जैसी प्रमुख सड़कों पर पानी भर गया, जिससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।वाहन चालक सहमे नजर आए।

    सबसे अधिक जलभराव एनएच-नौ की सर्विस रोड पर आइपी एक्सटेंशन के पास देखने को मिला। यह इलाका पहले से ही जलभराव का हाटस्पाट माना जाता है। पहले विनोद नगर के पास पानी भरता था, लेकिन इस बार जलभराव का स्थान करीब आधा किलोमीटर आगे खिसक गया।

    वहीं, पांडव नगर अंडरपास में भी लोग घुटनों तक पानी में सड़क पार करते नजर आए। सड़क पर पानी जमा होने से वाहनों की रफ्तार थम गई।

    इसके अलावा गणेश नगर, शकरपुर और आसपास के कई इलाकों की सड़कों पर भी जलभराव रहा। शकरपुर स्कूल ब्लाक बस स्टाप के पास सड़क पर पानी भर जाने से यात्रियों को बस तक पहुंचने में दिक्कत हुई। लोग पानी से बचने के लिए सड़क के बीच से गुजरते नजर आए, जिससे दुर्घटना की आशंका भी बढ़ गई।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल मानसून से पहले संबंधित विभाग बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन हल्की वर्षा में ही सड़कें तालाब बन जाती हैं। नालों की सफाई और जल निकासी की व्यवस्थाएं केवल कागजों तक सीमित रह जाती हैं, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है।

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