दिल्ली 'डे जीरो' की ओर तेजी से बढ़ रही, 85% वर्षा का जल बर्बाद होने से भूजल स्तर गिरा; एनसीआर में गहराया संकट
दिल्ली अपनी जल आवश्यकताओं के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर है, लेकिन वर्षा जल संचयन और उपचारित पानी के उपयोग पर ध्यान नहीं दे रही। पानी की बर्बादी और अवै ...और पढ़ें

पानी की कमी को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर भूजल का अवैध दोहन हो रहा है।

समय कम है?
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संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली। अपनी जल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर राजधानी दिल्ली भविष्य की जरूरतों को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है। न तो वर्षा जल संचयन पर पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है और न ही उपचारित पानी के उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है। पानी की बर्बादी भी नहीं रुक रही है। पानी की कमी को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर भूजल का अवैध दोहन हो रहा है।
इससे राजधानी में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विभिन्न राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली ''डे जीरो'' की ओर बढ़ रही है। एनसीआर के अन्य शहरों की स्थिति भी चिंताजनक है। यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो भविष्य में समस्याएं और बढ़ेंगी।
दिल्लीवासियों के जीवन को खतरे में डाल रहा
राजधानी में लगभग 1250 मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) पानी की आवश्यकता है। इसकी तुलना में मात्र 1000 एमजीडी पानी उपलब्ध है। यानी 250 एमजीडी कम पानी मिल रहा है। उपलब्ध पानी में से भी लगभग आधा चोरी या रिसाव के कारण बर्बाद हो जाता है।
इस स्थिति में अवैध भूजल दोहन और बढ़ रहा है। भ्रष्ट व लापरवाह तंत्र तथा गिरते भूजल स्तर के कारण दिल्ली गंभीर संकट की ओर बढ़ रही है। पिछले वर्ष अगस्त में दिल्ली विधानसभा में भी यह मामला उठा था। भाजपा विधायक जितेंद्र महाजन ने विधानसभा में कहा था कि यह संकट दिल्लीवासियों के जीवन को खतरे में डाल रहा है।
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देश के कई महानगरों पर संकट
विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली सहित देश के कई अन्य शहरों की स्थिति खराब है। यदि इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो इन शहरों का भूजल खत्म हो जाएगा, जिससे पेयजल संकट और गहरा जाएगा। सेंटर फार साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2050 तक विश्व के कई शहर 'डे जीरो' की स्थिति में पहुंच सकते हैं, जिसमें भारत के दिल्ली, जयपुर, चेन्नई और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं।
85 प्रतिशत पानी नालों में बेकार बह रहा
संयुक्त राष्ट्र ने भी दिल्ली व चेन्नई को 'डे जीरो' की चेतावनी दी है। भूजल संकट से जूझ रहे विश्व के कई शहरों में दिल्ली शामिल है। ''डे जीरो'' का अर्थ है कि शहर में उपलब्ध पानी के सभी स्रोत समाप्त हो जाना। इस स्थिति से बचने के लिए भूजल दोहन में कमी लाकर वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना होगा। दिल्ली में हर वर्ष औसतन 774.4 मिलीमीटर वर्षा होती है, लेकिन वर्षा जल संचयन की उचित व्यवस्था न होने के कारण इसमें से लगभग 85 प्रतिशत पानी नालों में बेकार बह जाता है। इसमें सुधार की आवश्यकता है।
120 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) का अंतर
भूजल स्तर के मामले में फरीदाबाद ''डार्क जोन'' में है। यमुना नदी के किनारे भूजल स्तर 30 से 35 मीटर नीचे है। नदी के किनारे स्थित रेनी वेल सूख रहे हैं। इस कारण फरीदाबाद मेट्रोपालिटन डेवलपमेंट अथारिटी केंद्रीय भूजल बोर्ड के साथ सर्वे करा रही है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर कदम उठाए जाएंगे। शहर में पानी की मांग और आपूर्ति में लगभग 120 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) का अंतर है।
फरीदाबाद, नोएडा व गाजियाबाद में भी गिर रहा है भूजल स्तर
भूजल स्तर के मामले में फरीदाबाद डार्क जोन में है। यमुना नदी के किनारे भूजल स्तर 30 से 35 मीटर नीचे है। नदी के किनारे स्थित रेनीवेल सूख रहे हैं। फरीदाबाद मेट्रोपालिटन डेवलपमेंट अथारिटी केंद्रीय भूजल सेंट्रल बोर्ड के साथ सर्वे करा रही है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर कदम उठाए जाएंगे। शहर में पानी की मांग और आपूर्ति में लगभग120 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) का अंतर है। नोएडा में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, पिछले छह वर्षों में 16 मीटर से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। गाजियाबाद के कई क्षेत्रों में भी भूजल स्तर तेजी से नीचे गिर रहा है।
केंद्रीय भूमि जल बोर्ड के अनुसार दिल्ली में भूजल दोहन
- वर्ष 2025 में 38,304.41 क्यूबिक हेक्टेयर भूजल रिचार्ज किया गया और 34557.15 क्यूबिक हेक्टेयर मीटर दोहन किया गया। भूजल दोहन की दर 92.10 प्रतिशत है।
- 34 में से 10 तहसील अत्यधिक दोहन श्रेणी में, 11 गंभीर श्रेणी में, छह अर्ध गंभीर श्रेणी में हैं। सात सुरक्षित श्रेणी में।
- दिल्ली में 29.41 प्रतिशत क्षेत्र अत्यधिक भूजल दोहन वाले क्षेत्र हैं।
- नई दिल्ली जिला में सबसे अधिक 123प्रतिशत, शाहदरा-112 प्रतिशत, उत्तर पूर्वी दिल्ली में 106.01 प्रतिशत और दक्षिणी दिल्ली में 103.41 प्रतिशत होता है भूजल दोहन।
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