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    दिल्ली में हर दिन औसतन 50 लाख की ठगी के केस, IFSO में अफसरों की कमी दूर करके साइबर ठगों की बढ़ाई मुसीबत

    Updated: Sat, 21 Mar 2026 06:22 PM (IST)

    दिल्ली पुलिस ने बढ़ते साइबर अपराध से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया है। साइबर यूनिट IFSO में 40 अतिरिक्त अधिकारियों की तैनाती की गई है, जिससे जांच टीम क ...और पढ़ें

    साइबर अपराध के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाएगी आईएफएसओ।

    साइबर अपराध के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाएगी आईएफएसओ।

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। तकनीक के इस युग में जहां डिजिटल लेनदेन सुगम हुआ है। वहीं, साइबर ठगों ने भी अपने जाल बिछाने के नए-नए तरीके ढूंढ लिए हैं। राजधानी दिल्ली में बढ़ते साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा ने बड़ा कदम उठाया है। साइबर अपराध की मुख्य साइबर यूनिट, इंटेलीजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक आपरेशन (आईएफएसओ) को अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और साधन संपन्न बनाया गया है। इसके लिए खाली पदों पर नियुक्तियां की गई हैं।

    आईएफएसओ में कितने अधिकारी किए तैनात?

    साइबर अपराध की पेचीदगी को देखते हुए इनकी जांच सब-इंस्पेक्टर से लेकर एसीपी रैंक के अधिकारी ही करते हैं। अब तक स्टाफ की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। लंबे समय से इस यूनिट में तकरीबन 15 जांच अधिकारी ही कार्यरत थे, जिन पर मामलों का भारी बोझ था। इस कमी को दूर करते हुए विभाग ने अब 40 अतिरिक्त अधिकारियों की तैनाती की है। यानी अब जांच टीम की संख्या लगभग तीन गुना बढ़ जाएगी। इस वृद्धि का सीधा असर जांच की गुणवत्ता और मामलों के निपटारे की गति पर पड़ेगा।

    नियुक्तियों से क्या मिलेगा लाभ?

    दिल्ली में साइबर ठगी के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। आईएफएसओ में आने वाले आंकड़ों को देखें तो यहां हर दिन औसतन 50 लाख से अधिक की ठगी के लगभग दो केस दर्ज होते हैं। यानी एक महीने में औसतन 60 से ज्यादा केस दर्ज किए जाते हैं। इतने बड़े पैमाने पर होने वाली ठगी की जांच के लिए 15 अधिकारियों की टीम नाकाफी थी। नई तैनाती के बाद अब प्रत्येक मामले की जांच के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा। हर अधिकारी को जांच के लिए करीब दो से तीन केस मिलेंगे, जिनका निपटारा आसानी से किया जा सकेगा।

    साइबर केसेस में पुलिस क्या करती है गड़बड़ी? 

    आईएफएसओ में 50 लाख और इससे अधिक की ठगी के केस दर्ज होते हैं। जिन मामलों में पुलिस आइटी एक्ट की धारा लगाती है उनकी जांच, इंस्पेक्टर व इससे ऊपर के रैंक के अधिकारी ही कर सकते हैं। जांच अधिकारियों की कमी के कारण कई बार पुलिस साइबर ठगी के अधिकतर मामलों में आईटी एक्ट की धारा लगाती ही नहीं थी। आईएफएसओ में पहले केवल डीसीपी की तैनाती थी बेहतर मानिटरिंग के अनुभवि आईपीएस संयुक्त आयुक्त रजनीश गुप्ता व एडिशनल पुलिस कमिश्नर मोनिका भारद्वाज की तैनाती की गई है।

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    फर्जी केवाईसी, लाॅटरी और निवेश का जाल

    हाल के महीनों में दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। पुलिस आयुक्त के निर्देश पर संयुक्त आयुक्त रजनीश गुप्ता के नेतृत्व में 'ऑपरेशन साई-हाॅक' के तहत दिल्ली और पड़ोसी राज्यों में बड़े पैमाने पर छापेमारी की गई। इस ऑपरेशन का उद्देश्य उन काॅल सेंटरों और गिरोहाें को नेस्तनाबूद करना था जो फर्जी केवाईसी, लाॅटरी और निवेश के नाम पर लोगों को लूटते हैं। इस कार्रवाई के बाद साइबर अपराधों की दर में गिरावट दर्ज की गई। अब जांच टीम के विस्तार से इस पकड़ को और मजबूत किया जा सकेगा।

    एआई-आधारित सॉफ्टवेयर पर भी जोर

    एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि साइबर क्राइम की जांच में 'डिजिटल फुटप्रिंट्स' का पीछा करना होता है, जिसमें समय और विशेषज्ञता दोनों चाहिए। जांच अधिकारियों की संख्या बढ़ने से चार्जशीट समय पर दाखिल होगी और अपराधियों को सजा मिलने की दर में सुधार होगा। साथ ही, नई नियुक्तियों के साथ आईएफएसओ अब अत्याधुनिक टूल्स और एआई-आधारित सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल पर भी जोर देगी। अधिकारियों को डार्क वेब मानिटरिंग और क्रिप्टो-करेंसी ट्रेलिंग में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। दिल्ली पुलिस का लक्ष्य न केवल अपराधियों को पकड़ना है, बल्कि ठगी गई रकम को जल्द से जल्द फ्रीज करवाकर पीड़ितों को वापस दिलाना भी है।

    ...तो इसलिए बढ़ाने पड़े अधिकारी

    बढ़ते साइबर अपराध को देखते हुए सभी 15 जिले में भी एक-एक साइबर सेल थाना खोले हुए करीब पांच साल हो गए। वहां 25 लाख तक की ठगी के केस दर्ज होते हैं। छोटी ठगी के सबसे अधिक मामले आते हैं। इन थानों में भी अगर जांच अधिकारियों की संख्या बढ़ा दी जाए तो यहां भी केस सुलझाने की दर गति पकड़ सकता है।

    वर्ष केस दर्ज हुए  ठगी की गई रकम (रुपये में)
    2014  226 2,63,78,826
    2015  712  6,39,70,233
    2016  550  8,00,00,048
    2017  454  7,39, 01,796
    2018  451  7,34,02,732
    2019  795  26,17,38,262
    2020  1,687  35,29,91,030
    2021  1,630  91,03,84,256
    2022  1,545  2,31, 23,50,148
    2023  1,347  1,83,56,26,648
    2024  1,591  8,17,64,85,471
    2025  184  70,64,80,424 (30 जून तक)

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