विश्व पुस्तक मेला में दूसरे दिन पहुंचे दो लाख पुस्तक प्रेमी, घंटे भर लंबी कतारों पर भारी किताबों से 'यारी'
नई दिल्ली के भारत मंडपम में 53वें विश्व पुस्तक मेले में दूसरे दिन दो लाख से अधिक आगंतुक पहुंचे, जो पठन-पाठन संस्कृति में गिरावट की धारणा को गलत साबित ...और पढ़ें

भारत मंडपम में लगे विश्व पुस्तक मेले में प्रवेश के लिए कतार में खड़े लोग। चंद्र प्रकाश मिश्र
HighLights
53वें विश्व पुस्तक मेले में दो लाख से अधिक लोग पहुंचे।
भारतीय सैन्य इतिहास और सनातन ग्रंथ लोगों को खूब भाए।
शिक्षा मंत्री ने युवा लेखकों को लेखन हेतु प्रोत्साहित किया।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। कोरोना काल के बाद पठन-पाठन संस्कृति खत्म होती जा रही है, अब लोग किताबें पढ़ने में कोई रूचि नहीं लेते, साहित्य के प्रति रूझान घटता जा रहा है.... ऐसी तमाम बातों को भारत मंडपम में चल रहा 53वां विश्व पुस्तक मेला झुठलाता नजर आ रहा है। शनिवार से शुरू हुए इस नौ दिवसीय मेले में शनिवार और रविवार दोनों ही दिन दिल्ली समेत एनसीआर के पुस्तक प्रेमी लंबी लंबी कतारों में लगकर प्रवेश करते नजर आए। एक-एक घंटे की प्रतीक्षा के बाद लोग मेले में हाॅल तक पहुंच पा रहे थे। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) के अनुसार, शनिवार को एक से सवा लाख लोग मेले में पहुंचे थे जबकि रविवार को यह संख्या दो लाख के आस-पास रही।
भा रहीं सेना और सनातन संबंधी पुस्तकें
पुस्तक मेले का मुख्य विषय ही भारतीय सैन्य इतिहास है, इसलिए इससे जुड़ी किताबें लोगों को काफी पसंद आ रही हैं, जो वीरता और ज्ञान पर आधारित हैं। वाल्मीकि की रामायण, वेदव्यास की महाभारत और भगवद्गीता जैसे सनातन ग्रंथ और चाणक्य का अर्थशास्त्र जैसे क्लासिक्स को भी युवा पीढ़ी फिर से पढ़ रहे हैं। विभिन्न शैलियों और भाषाओं के नए उपन्यास, कहानियां और गैर-काल्पनिक पुस्तकें भी लोगों को अपनी ओर खींच रही हैं, जिससे यह मेला सांस्कृतिक उत्सव बन गया है।

शिक्षा मंत्री ने किया नवोदित लेखकों के लिए ऐलान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री संग्रहालय में पीएम युवा 3.0 के लिए चयनित 43 लेखकों के साथ एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया। चयनित लेखकों ने मार्गदर्शन योजना के तहत अपनी आगामी पुस्तकों के लिए पांडुलिपियों के विषयों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। मंत्री ने चयनित लेखकों को बधाई दी और उन्हें छह माह की मार्गदर्शन योजना का पूरा लाभ उठाने और ऐसी पुस्तकें लिखने के लिए प्रोत्साहित किया जो भारत के युवाओं को पढ़ने और लिखने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने सुझाव दिया कि शोध सामग्री की भौतिक और डिजिटल दोनों प्रकार की उपलब्धता को एनबीटी द्वारा सुगम बनाया जाना चाहिए और निर्देश दिया कि चयनित लेखकों को ''वन नेशन-वन सब्सक्रिप्शन'' (ओएनओएस) पहल के तहत सामग्री तक पहुंच प्रदान की जानी चाहिए।
कहीं पुस्तक विमोचन और कहीं साहित्यिक चर्चा
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने पुस्तक मेले का दौरा किया और पूर्व सांसद केसी त्यागी द्वारा लिखित पुस्तक ''संकट की खेती'' का विमोचन किया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी मेले का दौरा किया। विदेश राज्य मंत्री राजकुमार रंजन सिंह द्वारा लिखित पुस्तक ''मणिपुर रियासत के पड़ोसी क्षेत्रों के साथ भू-राजनीतिक संबंध'' का विमोचन पुस्तक मेले में किया गया। शिक्षा मंत्रालय के संचार एवं संपर्क प्रमुख चैतन्य प्रसाद द्वारा लिखित पुस्तक ''व्हेन ब्रांडिंग मेट मूवीज'' का भी विमोचन मेले में किया गया।
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लेखक साझा कर रहे लेखनशैली की कला
मेले के दूसरे दिन प्रभात प्रकाशन के स्टाॅल पर राजीव मुद्गल की किताब कुलप्रलय का विमोचन किया गया। इस अवसर पर पुस्तक के लेखक, साहित्यकार चित्र मुद्गल, सूत्रधार शैली सहित प्रभात प्रकाशन के निदेशक प्रभात कुमार उपस्थित रहे। इस पुस्तक में द्वारका नगरी की कहानी उसी की जुबानी बताई गई है।
लेखक कार्तिकेय वाजपेयी ने अपने प्रथम उपन्यास ''द अनबिकमिंग'' पर पाठकों के साथ एक संवादात्मक मुलाक़ात की। पेंगुइन इंडिया स्टाल पर आयोजित इस सत्र में वाजपेयी ने साहित्य, आत्म-चिंतन और व्यक्तिगत परिवर्तन से जुड़े विषयों पर पाठकों से खुलकर बातचीत की।
पुरस्कार विजेता लेखक शैलेंद्र झा ने पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के स्टाॅल पर पाठकों के बीच उत्साही संवाद किया। बातचीत के दौरान उन्होंने कहानी कहने की कला, सिनेमा और क्राइम फ़िक्शन के बदलते परिदृश्य पर अपने विचार साझा किए।

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एक विशेष सत्र में तीन बार ग्रैमी पुरस्कार विजेता संगीतकार रिकी केज ने सामाजिक परिवर्तन में संगीत, माइंडफुलनेस और पर्यावरणीय चेतना की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती एवं सुरुचि प्रकाशन के संयुक्त तत्त्वावधान में युवा लेखकों से संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के वक्ता अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री मनोज कुमार रहे और कार्यक्रम की अध्यक्षता इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के प्रदेश अध्यक्ष विनोद बब्बर द्वारा किया गया।