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    दिल्ली चिड़ियाघर में लापरवाही की हद! चूहे मारने के जहर से हुई थी चौसिंगा हिरणों की मौत; IVRI रिपोर्ट में पुष्टि

    Updated: Mon, 12 Jan 2026 05:02 PM (IST)

    दिल्ली चिड़ियाघर में चौंसिंगा हिरणों की मौत का कारण अब स्पष्ट हो गया है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों हिरणो ...और पढ़ें

    चौसिंगा हिरण।

    चौसिंगा हिरण।

    HighLights

    1. IVRI रिपोर्ट ने चूहे मारने वाली दवा को मौत का कारण बताया

    2. मृत चौंसिंगा के नमूनों में फास्फीन गैस की पुष्टि हुई

    3. चिड़ियाघर में 2 दिसंबर को चूहामार दवा का प्रयोग हुआ था


    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) में चौंसिंगा हिरणों की मौत के पीछे अब गंभीर लापरवाही सामने आई हैं। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) की विषविज्ञान (टाक्सिकोलाॅजी) रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि दोनों चौंसिंगा की मौत चूहे मारने वाले जहर के संपर्क में आने से हुई।

    रिपोर्ट के मुताबिक, मृत चौंसिंगा के रूमेन और आंतों के नमूनों में फास्फीन गैस की मौजूदगी पाई गई है। यह गैस आमतौर पर एल्यूमिनियम फास्फाइड या जिंक फास्फाइड जैसे रोडेंटिसाइड से निकलती है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि फास्फीन की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि जानवर रोडेंटिसाइड के संपर्क में आए थे।

    रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जांच के दौरान हाइड्रोजन साइनाइड, नाइट्रेट-नाइट्राइट, भारी धातुओं और अन्य सामान्य कीटनाशकों के कोई सुबूत नहीं मिले। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच के दौरान नमूनों में हाइड्रोजन साइनाइड, नाइट्रेट-नाइट्राइट, भारी धातुएं और अन्य सामान्य कीटनाशक नहीं पाए गए। वहीं, चारे के नमूनों की जांच में किसी भी प्रकार के कीटनाशक की पुष्टि नहीं हुई।

    विशेषज्ञों के अनुसार, मेटल फास्फाइड आधारित चूहा मार जहर नमी या पेट के अम्ल के संपर्क में आते ही फास्फीन गैस छोड़ते हैं, जो बेहद विषैली होती है और कुछ ही समय में जानवरों की जान ले सकती है। चिड़ियाघर के एक अधिकारी ने बताया कि शुरुआती पोस्टमार्टम में मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई थी, लेकिन अब रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि मौत अचानक और जहर के असर से हुई।

    चिड़ियाघर के एक आंतरिक दस्तावेज में भी सामने आया है कि दो दिसंबर को परिसर में चूहों के नियंत्रण के लिए एल्यूमिनियम फास्फाइड (56 प्रतिशत) और जिंक फास्फाइड (80 प्रतिशत) का इस्तेमाल किया गया था।

    एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि टैबलेट के रूप में रोडेंटिसाइड का उपयोग हुआ था और संभव है कि जानवरों ने इन्हें खा लिया हो। उल्लेखनीय है कि 11 और 12 दिसंबर को दोनों चौंसिंगा मृत पाए गए थे और उनके मुंह के पास झाग भी देखा गया था। इस पूरे मामले पर दिल्ली चिड़ियाघर के निदेशक संजीत कुमार ने चौसिंगा की मौत को लेकर पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया।

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