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    दिल्ली जू में जिंदा जलाकर मारे गए सियार की जांच में साक्ष्य गायब, 12 दिनों के CCTV फुटेज नदारद; शक गहराया

    Updated: Sun, 18 Jan 2026 07:43 PM (IST)

    दिल्ली चिड़ियाघर में सियार को जिंदा जलाने के मामले की जांच प्रशासन तक पहुंच गई है। मंत्रालय ने रिपोर्ट सौंपने की समय-सीमा बढ़ाई है। जांच में 12 दिनों ...और पढ़ें

    सियार। सौजन्य:इंटरनेट मीडिया

    सियार। सौजन्य:इंटरनेट मीडिया

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    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। नेशनल जूलाजिकल पार्क (दिल्ली चिड़ियाघर) में एक सियार को जिंदा जलाकर मारने की जांच अब सीधे प्रशासन तक पहुंच गई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मंत्रालय जांच रिपोर्ट सौंपने की समय- सीमा पांच दिन और बढ़ा दी है। हालांकि, महत्वपूर्ण साक्ष्यों के अभाव और सीसीटीवी रिकाॅर्डिंग गायब होने से चिड़ियाघर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    12 दिनों के सीसीटीवी फुटेज रिकाॅर्ड से गायब

    नेशनल जू वर्कर्स यूनियन ने प्रशासन पर साक्ष्यों और कीपर डायरी से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि हिमालयन ब्लैक बियर के बाड़े सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों के करीब 5 से 16 दिसंबर यानी 12 दिनों के सीसीटीवी फुटेज रिकाॅर्ड से गायब हैं। यूनियन के अनुसार 14 से 20 दिसंबर तक के फुटेज इस मामले में सबसे अहम साक्ष्य थे, जिन्हें कथित तौर पर जानबूझकर हटाया गया है। दूसरी ओर चिड़ियाघर प्रशासन इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे हार्ड डिस्क व लाइटिंग सिस्टम खराब होने की बात कहीं है।

    नियमों को ताक पर रखकर मार दिया

    यूनियन का आरोप है कि एक रेंजर ने भालू के बाड़े में छिपे सियार को उसके बिल के अंदर ही जिंदा जला दिया गया था। पिछले वर्ष नवंबर में चिड़ियाघर से चार सियार भाग गए थे, जिन्हें प्रशासन ने बरामद करने का दावा किया था। यूनियन का कहना है कि उन्हीं में से एक सियार दिसंबर में दोबारा बाड़े में दिखा, जिसे नियमों को ताक पर रखकर मार दिया गया।

    हत्या की आशंका को पुख्ता

    तकनीकी जांच में खुलासा हुआ है कि चिड़ियाघर के 465 कैमरों में से 32 जूम कैमरे 16 दिसंबर तक बंद थे। 18 दिसंबर के फुटेज में दोपहर के समय दो कर्मचारियों को संदिग्ध अवस्था में बाड़े से कुछ बाहर ले जाते देखा गया है, जो हत्या की आशंका को पुख्ता करता है। वहीं, चिड़ियाघर निदेशक संजीत कुमार के मुताबिक जांच प्रक्रिया अभी अधूरी है।

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    मंत्रालय ने रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा बढ़ाई

    इसी कारण मंत्रालय ने रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा बढ़ाई है। हांलाकि, इससे पहले पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने आरोपी रेंजर को पद से हटाकर क्यूरेटर नियुक्त कर दिया है। फिलहाल, एक वरिष्ठ अधिकारी और छह दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं।

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