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    दिल्ली चिड़ियाघर का 400 करोड़ की लागत से होगा कायाकल्प, नए साइनबोर्ड से मिलेगी जानवरों की विस्तृत जानकारी

    Updated: Thu, 29 Jan 2026 04:50 PM (IST)

    दिल्ली के राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में 400 करोड़ रुपये का पुनर्विकास हो रहा है। इसके तहत जानवरों के बारे में विस्तृत वैज्ञानिक जानकारी देने वाले नए साइ ...और पढ़ें

    दिल्ली के राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में 400 करोड़ रुपये का पुनर्विकास हो रहा है। फाइल फोटो

    दिल्ली के राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में 400 करोड़ रुपये का पुनर्विकास हो रहा है। फाइल फोटो

    रितिका मिश्रा, नई दिल्ली। नेशनल जूलॉजिकल पार्क (चिड़ियाघर) में आने वाले लोगों को अब सिर्फ़ जानवरों को देखने से ज़्यादा बेहतर अनुभव मिलेगा। उन्हें जानवरों की ज़िंदगी के बारे में डिटेल में और साइंटिफिक जानकारी भी मिलेगी।

    चिड़ियाघर के लिए एक बड़े रीडेवलपमेंट प्लान के तहत, जानवरों के बाड़ों के बाहर नए साइनबोर्ड लगाए जाएंगे, जो जानवरों के खाने, रहने की जगह, आदतों, व्यवहार और रोजाना की दिनचर्या के बारे में जानकारी देंगे।

    अधिकारियों के मुताबिक, चिड़ियाघर में अभी लगे पुराने और खराब साइनबोर्ड को सबसे पहले बदला जाएगा। मौजूदा कई बोर्ड में पुरानी या अधूरी जानकारी है, जिससे आने वाले लोगों को जानवरों के बारे में पूरी जानकारी नहीं मिल पाती है।

    नए साइनबोर्ड इस तरह से डिजाइन किए जाएंगे कि वे आने वाले लोगों को जानवरों के नेचुरल रहने की जगह, कंजर्वेशन स्टेटस और उनके महत्व के बारे में बता सकें।

    रीडेवलपमेंट प्लान के तहत, आने वाले लोग जल्द ही साउथ अफ्रीका से लाए गए शेर देख पाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि अफ्रीकी शेरों के लिए इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के हिसाब से आधुनिक बाड़े तैयार किए जाएंगे। इन बाड़ों के बाहर लगे साइनबोर्ड आने वाले लोगों को शेरों के स्वभाव, शिकार करने की आदतों और नेचुरल जीवन चक्र के बारे में जानकारी देंगे।

    इसके अलावा, चिड़ियाघर में कई ऐसे जानवर हैं जो सालों से अकेले रह रहे हैं। इनमें एक भेड़िया, एक ग्रेट हॉर्नबिल, एक चित्तीदार हिरण, एक सैंड बोआ सांप, एक लेडी एमहर्स्ट तीतर और एक शुतुरमुर्ग शामिल हैं। प्रशासन इन जानवरों की मानसिक और शारीरिक सेहत को बेहतर बनाने के लिए दूसरे चिड़ियाघरों के साथ एक्सचेंज प्रोग्राम के जरिए उनके लिए साथी लाने की योजना बना रहा है।

    चिड़ियाघर के रीडेवलपमेंट में लगभग 400 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस प्लान में एंट्री गेट को सुंदर बनाना और टूरिस्ट को बाड़ों तक ले जाने के लिए गाड़ियों का इंतजाम करना शामिल है।

    अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी कोशिश चिड़ियाघर को सिर्फ मनोरंजन की जगह के तौर पर नहीं, बल्कि जानवरों के कंजर्वेशन, शिक्षा और जागरूकता के एक जरूरी केंद्र के तौर पर विकसित करने की दिशा में एक कदम है।

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