दिल्ली चिड़ियाघर में पटना से लाई गई मादा भेड़िया की मौत, क्वारंटाइन नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल
दिल्ली चिड़ियाघर में पटना से लाई गई एक मादा भेड़िया की मौत हो गई, जिससे क्वारंटाइन प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ...और पढ़ें
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दिल्ली चिड़ियाघर में पटना से लाई गई एक मादा भेड़िया की मौत हो गई। इमेज एआई
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली चिड़ियाघर में हाल ही में पटना चिड़ियाघर से पशु विनिमय कार्यक्रम के तहत लाई गई एक मादा भेड़िया की मौत हो गई। इस घटना के बाद चिड़ियाघर प्रशासन की कार्यप्रणाली और क्वारंटाइन प्रोटोकाल के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, पटना जू से चार भेड़िया जिसमें दो नर और दो मादा दिल्ली लाए गए थे। इनमें से सभी जानवरों को क्वारंटाइन में रखने के बजाय सीधे बाड़े में डाल दिया गया। खास तौर पर मादा भेड़ियों को क्वारंटाइन में नहीं रखा गया। चिड़ियाघर के कर्मचारियों का कहना है कि पटना से लाने के बाद सीधे चारों भेड़ियों को बीट नंबर-10 के पास खाली बाड़े में डाल दिया गया, जो सियार के बाड़े के बिल्कुल नजदीक है।
सामान्य तौर पर भेड़ियों को बीट नंबर-8 में रखा जाता है। बीट नंबर 10 सियार का बाड़ा है। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) के नियमों के तहत कोई भी वन्यजीव अगर पशु विनिमय कार्यक्रम के तहत लाया जाता है तो उसे क्वारंटाइन में रखना अनिवार्य होता है, जिसमें पशुओं का कृमिनाशक, स्वास्थ्य जांच, तनाव और अनुकूलन की निगरानी की जाती है। लेकिन इस मामले में इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
सूत्रों का दावा है कि जिस मादा भेड़िया की मौत हुई, उसकी उम्र करीब डेढ़ से दो साल थी और उसे स्थानांतरण के दौरान ही पिछले पैर में फ्रैक्चर हो गया था। इसके बावजूद उसे तुरंत चिकित्सकीय देखभाल नहीं मिली। कर्मचारियों ने बताया कि घटना के करीब तीन दिन बाद चिड़ियाघर डाक्टर ने उसे देखा और अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
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वन्य विशेषज्ञों का कहना है कि भेड़िया और सियार दोनों कैनाइन (श्वान परिवार) प्रजाति के जानवर हैं, ऐसे में यदि किसी एक में संक्रमण हो तो दूसरे में फैलने का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में बिना क्वारंटाइन सीधे पास-पास रखना गंभीर लापरवाही मानी जा रही है।
दिल्ली चिड़ियाघर में पिछले कुछ माह में कई जानवरों की मौत हो चुकी है। जनवरी में चार चौसिंगा की मौत हुई थी, जिनके सैंपल में भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आइवीआरआइ) की जांच में फास्फीन के अंश पाए गए थे। इसके अलावा एक सियार हिमालयन भालू के बाड़े में घुसने से मारा गया था।
इससे पहले एक मादा संघाई हिरण और एक मादा एंटीलोप की भी मौत हुई थी। एक नर संघाई हिरण की भी बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस पूरे मामले पर चिड़ियाघर प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।