15 अगस्त से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर बदलेगी स्पीड लिमिट, देश में पहली बार लागू होगी नई व्यवस्था
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर 15 अगस्त से पहली बार वैरिएबल स्पीड लिमिट लागू होगी, जिससे ट्रैफिक के दबाव के अनुसार वाहनों की गति सीमा बदलेगी। ...और पढ़ें

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर 15 अगस्त से पहली बार वैरिएबल स्पीड लिमिट लागू होगी
HighLights
15 अगस्त से डीएमई पर वैरिएबल स्पीड लिमिट लागू होगी।
ट्रैफिक दबाव अनुसार बदलेगी गति सीमा, जाम होगा कम।
आइआइटी रुड़की, सीआरआरआई ने वैज्ञानिक अध्ययन कर नियम बनाए।
जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए 15 अगस्त से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। देश में पहली बार किसी एक्सप्रेसवे पर वैरिएबल स्पीड लिमिट (परिवर्तनीय गति सीमा) की व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत दिन के अलग-अलग समय में ट्रैफिक के दबाव के अनुसार वाहनों की अधिकतम गति सीमा बदलेगी।
पहले चरण में यह व्यवस्था एक्सप्रेसवे की दिल्ली सीमा में अक्षरधाम से सराय काले खां के बीच लागू की जाएगी। यह प्रयोग इस लिए किया जा रहा है कि अक्षरधाम से आगे एकसाथ वाहनों का जाम न लगे। स्पीड कंट्रोल कर आइटीओ व सराय काले खां समेत अन्य स्थानों पर पहुंचने वाले वाहनों की संख्या कम की जाएगी।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की इस परियोजना पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) रुड़की और केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआइ) ने मिलकर काम किया है। अधिकारियों के अनुसार इसका उद्देश्य सड़क पर भीड़ कम करना, दुर्घटनाओं में कमी लाना और यातायात को अधिक व्यवस्थित बनाना है। खासतौर पर डीएमई से मध्य दिल्ली में बड़ी संख्या में वाहन एक साथ पहुंचते हैं। उम्मीद है कि स्पीड कम होगी तो वाहन धीरे-धीरे पहुंचेंगे और जाम कम हो सकेगा।
समय के अनुसार बदलेगी गति सीमा: नई व्यवस्था के तहत रात 12 बजे से सुबह सात बजे तक कारों की अधिकतम गति 65 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहनों की 50 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक, जब ट्रैफिक का दबाव सबसे अधिक रहता है, कारों की गति सीमा 55 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहनों की 45 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। वहीं शाम पांच बजे से रात 12 बजे तक कारें अधिकतम 60 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहन 40 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चल सकेंगे।
वैज्ञानिक अध्ययन के बाद तय हुई नई व्यवस्था
आइआइटी रुड़की के इंजीनियर के अनुसार, पिछले कई महीनों के दौरान एक्सप्रेसवे पर 24 घंटे के ट्रैफिक का विस्तृत अध्ययन किया गया। विभिन्न समय पर वाहनों की संख्या, उनकी औसत गति और जाम की स्थिति का विश्लेषण करने के बाद नई गति सीमाएं तय की गई हैं। परियोजना लागू होने के तीन महीने बाद दोबारा आंकड़ों का विश्लेषण कर यह आकलन किया जाएगा कि इससे दुर्घटनाओं और जाम में कितनी कमी आई।
पुराने संकेतक हटाए गए, डिजिटल बोर्ड लगाए गए: नई व्यवस्था लागू करने से पहले एक्सप्रेसवे पर लगे पुराने स्पीड लिमिट बोर्डों को ढक दिया गया है जिससे वाहन चालकों में भ्रम की स्थिति न बने। इसके स्थान पर डिजिटल वैरिएबल स्पीड डिस्प्ले बोर्ड लगाए गए हैं, जो समय के अनुसार बदलती गति सीमा प्रदर्शित करेंगे।
अधिकारियों के अनुसार दिल्ली खंड में दो डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगाए गए हैं। इनमें एक अक्षरधाम मंदिर के पास और दूसरा पांडव नगर फुटओवर ब्रिज के निकट स्थापित किया गया है। बाद में और बोर्ड लगाए जाएंगे। सीआरआरआइ ने एक्सप्रेसवे पर विशेष सेंसर लगाए हैं, जो वाहनों की आवाजाही और ट्रैफिक घनत्व का लगातार रिकॉर्ड तैयार करेंगे।
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इसके अलावा स्पीड डिटेक्शन कैमरे भी लगाए जाएंगे। ये कैमरे उस समय डिजिटल बोर्ड पर प्रदर्शित गति सीमा के अनुसार स्वतः निगरानी करेंगे। निर्धारित सीमा से अधिक गति मिलने पर ट्रैफिक पुलिस वाहनों के चालान करेगी।
वैज्ञानिक अध्ययन के तहत वैरिएबल स्पीड लिमिट लागू की जा रही है। डीएमई पर पहली बार यह प्रयोग किया गया है। अध्ययन जारी है अगर आंकड़े बदलते हैं तो स्पीड लिमिट बदली जाएगी। इसकी रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी जाएगी। - डॉ. चलुमरि रवि शेखर, निदेशक, सीआरआरआइ
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