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सरकारी बसें नदारद और निजी वाहनों का फैला जाल, दिल्ली-NCR में महिला यात्रियों की सुरक्षा पर क्यों न उठे सवाल?

Updated: Tue, 01 Sep 2026 10:53 AM (IST)

दिल्ली-एनसीआर में सरकारी बसों की भारी कमी के कारण लाखों यात्री, खासकर महिलाएं, असुरक्षित निजी वाहनों पर निर्भर हैं। इससे यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

विश्वनाथ ट्रांसपोर्ट की इसी बस में छात्रा के साथ गैंगरेप करने का आरोप लगा है।

विश्वनाथ ट्रांसपोर्ट की इसी बस में छात्रा के साथ गैंगरेप करने का आरोप लगा है।

HighLights

  1. दिल्ली-एनसीआर में सरकारी बसों की भारी किल्लत, यात्री परेशान।

  2. निजी वाहनों की बढ़ती संख्या से महिला सुरक्षा पर सवाल।

  3. अनियमित परिवहन सेवाएं, नियमों का उल्लंघन, भ्रम का माहौल।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली/नोएडा। दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख इलाकों जैसे नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सरकारी बसों की भारी किल्लत के कारण रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्री संकट का सामना कर रहे हैं।

बॉटनिकल गार्डन, परी चौक, सेक्टर 132 और गौर सिटी जैसे व्यस्त चौराहों पर सरकारी परिवहन की अनुपस्थिति ने एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है।

दिल्ली में 47 किलोमीटर तक चलती बस में 16 वर्षीया छात्रा से जो सामूहिक बलात्कार का मामला सामने आया है, इस जघण्य अपराध की गुंजाईश कम होती यदि सरकारी बसों की पूरी व्यवस्था की गई होती। ऐसा लोगों का मानना है।

कामकाजी महिलाओं के सामने चुनौती

इस स्थिति का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर अनधिकृत बसें, शटल सेवाएं और निजी गाड़ियां अपनी जड़ें जमा चुकी हैं। सरकारी सेवाओं की कमी के चलते यात्री, विशेषकर कामकाजी महिलाएं, इन निजी साधनों से यात्रा करने को मजबूर हैं।

निजी साधनों की बढ़ती पैठ

परिवहन चालकों का नेटवर्क अब एनसीआर के प्रमुख रूटों पर पूरी तरह हावी हो चुका है।

  • सस्ता और सुलभ विकल्प: ऐप-आधारित कैब सेवाओं की तुलना में ये निजी बसें और शटल बेहद सस्ती दर पर तुरंत मिल जाती हैं।
  • सीधी आवाजाही के मामले में ये वाहन यात्रियों को उनके गंतव्य स्थान के नजदीक तक पहुंचाते हैं।
  • तकनीकी और अनौपचारिक नेटवर्क
  • कुछ सेवाएं 'फ्लिक्सबस' या 'रूटमैटिक' जैसी ऑनलाइन कंपनियों के माध्यम से संचालित हो रही हैं, तो वहीं कई बसें बिना किसी आधिकारिक स्टेशन के चौराहों से ही सवारियां भर रही हैं।

शाम ढलते ही गहराता सुरक्षा का डर

निजी वाहनों की इस अनियंत्रित व्यवस्था ने यात्रियों, विशेषकर महिलाओं की यात्रा को जोखिम भरा बना दिया है।

  • लंबा इंतजार: बस स्टैंडों पर घंटों इंतजार करने के बाद भी उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की बसें समय पर नहीं मिलतीं।
  • सुरक्षा की अनिश्चितता: रात के समय निजी वाहनों में सफर करना सुरक्षित नहीं माना जाता, जिसके कारण कई यात्री अकेले सफर करने से कतराते हैं और परिजनों का सहारा लेने पर मजबूर हैं।

नियमों का उल्लंघन और भ्रम का माहौल

परी चौक और आसपास के इलाकों में खड़ी कई निजी बसें दिखने में हूबहू सरकारी बसों जैसी लगती हैं, जिससे यात्री आसानी से भ्रमित हो जाते हैं।

परिवहन विभाग के नियमों के मुताबिक सभी निजी वाहनों का पंजीकरण, चालकों का वैध लाइसेंस और स्टाफ का पुलिस सत्यापन अनिवार्य है।

हालांकि, जमीनी स्तर पर इन नियमों का कड़ाई से पालन न होने के कारण सुरक्षा संबंधी चिंताएं लगातार बनी हुई हैं।

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