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    दिल्ली में बनेगा अनोखा 'कुरानी वन', इस्लामिक परंपराओं और संस्कृति में महत्व रखने वाले पेड़-पौधे लगेंगे  

    Updated: Tue, 14 Apr 2026 08:32 PM (IST)

    दिल्ली सरकार का वन विभाग जौनपुर में 'कुरानी वन' स्थापित कर रहा है। यह पहल दिल्ली को हरा-भरा बनाने और जैव विविधता बढ़ाने के लिए है। 2.15 हेक्टेयर में 4 ...और पढ़ें

    दिल्ली में बनाया जाएगा कुरानी वन। फोटो: एआई जनरेटेड

    दिल्ली में बनाया जाएगा कुरानी वन। फोटो: एआई जनरेटेड

    HighLights

    1. जौनपुर में 2.15 हेक्टेयर में 'कुरानी वन' की स्थापना

    2. कुल 4,500 पौधे लगाए जाएंगे, जिनमें खजूर भी

    3. एक साल तक पौधों के रखरखाव की जिम्मेदारी एजेंसी की

    संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी को और अधिक हरा-भरा बनाने तथा जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार के वन एवं वन्यजीव विभाग ने एक अनूठी पहल की है।

    दक्षिणी वन प्रभाग के तहत आने वाले जौनपुर इलाके में ''कुरानी वन'' की स्थापना की जाएगी। इस परियोजना के लिए विभाग ने आधिकारिक तौर पर ई-टेंडर जारी कर दिया है। यह पहल वन विभाग के ''थीम्ड फारेस्ट'' (विशिष्ट विषयों पर आधारित वन) मुहिम का हिस्सा है।

    एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार यह वन इस बात का प्रतीक होगा कि कैसे विभिन्न समुदाय सदियों से पर्यावरण के साथ गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि कुरानी वन के लिए पौधारोपण योजना पर अभी चर्चा चल रही है, लेकिन इसमें उन पौधों और वनस्पतियों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनका इस्लामिक परंपराओं और संस्कृति में विशेष महत्व है। मसलन, खजूर के पेड़।

    यहां आकार लेगी यह योजना

    दक्षिण दिल्ली के जौनपुर (खसरा नंबर 56/16, 126 आदि) में 2.15 हेक्टेयर भूमि पर इस विशेष वन को विकसित किया जाएगा। इसमें करीब 2,000 पेड़- पौधे लगाए जाएंगे। साथ ही विभिन्न प्रकार 2,500 झाड़ियां भी लगाई जाएंगी। टेंडर में न केवल पौधारोपण शामिल है, बल्कि एक साल तक उनकी देखभाल और रखरखाव की जिम्मेदारी भी एजेंसी की होगी।

    टेंडर और चयन प्रक्रिया

    दिल्ली सरकार ने प्रतिष्ठित और अनुभवी बिडर्स सेऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। प्री बिड मीटिंग 24 अप्रैल, आवेदन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल एवं तकनीकी बिड खोलने की तारीख 30 अप्रैल रखी गई है।

    इच्छुक एजेंसियां दिल्ली सरकार के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकती हैं। भाग लेने के लिए डिजिटल सिग्नेचर और पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है। किसी भी सहायता के लिए विकास भवन-II स्थित हेल्प डेस्क से संपर्क किया जा सकता है।

    एक साल का रखरखाव अनिवार्य

    अक्सर देखा जाता है कि पौधारोपण के बाद देखभाल के अभाव में पौधे सूख जाते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, दक्षिणी वन प्रभाग के उप वन संरक्षक ने स्पष्ट किया है कि चयनित एजेंसी को वर्ष 2026-27 के दौरान इन 4,500 पौधों के जीवित रहने और उनके फलने-फूलने की पूरी जिम्मेदारी उठानी होगी।

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    अन्य 'थीम्ड फाॅरेस्ट' भी होंगे आकर्षण का केंद्र

    यह पहल दिल्ली के उस व्यापक प्रोजेक्ट का हिस्सा है जिसके तहत शहर के अलग-अलग हिस्सों में कई ''विशेष वन'' विकसित किए जाने हैं। इनमें शामिल हैं:-

    • ऋतु वन : अलग-अलग मौसमों के अनुसार फूलने और फलने वाले पेड़।
    • नक्षत्र वन : सितारों और नक्षत्रों से संबंधित पौधे।
    • राशि वन : राशियों पर आधारित वृक्षारोपण।
    • तीर्थंकर वन : जैन आध्यात्मिक गुरुओं के सम्मान में समर्पित।
    • बेल वन : मुख्य रूप से बेल के वृक्षों पर केंद्रित।
    • पंचवटी वन : पांच तत्वों से जुड़े पवित्र उपवनों की अवधारणा पर आधारित।

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