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    रजिस्टर में नाम लिखवाएं या प्यास बुझाएं? दिल्ली सरकार की 'सुस्त' प्रक्रिया ने बढ़ाई गर्मी में परेशानी

    Updated: Wed, 27 May 2026 11:45 PM (IST)

    दिल्ली सरकार की मोबाइल हीट रिलीफ वैन भीषण गर्मी में लोगों को राहत देने में नाकाफी साबित हो रही हैं। सीमित आपूर्ति, भीड़ और प्रक्रियागत देरी के कारण ये ...और पढ़ें

    दिल्ली सरकार की मोबाइल हीट रिलीफ वैन भीषण गर्मी में लोगों को राहत देने में नाकाफी साबित हो रही हैं। इमेज एआई

    दिल्ली सरकार की मोबाइल हीट रिलीफ वैन भीषण गर्मी में लोगों को राहत देने में नाकाफी साबित हो रही हैं। इमेज एआई

    HighLights

    1. वैन की संख्या दिल्ली की आबादी के लिए अपर्याप्त।

    2. पानी, ओआरएस, गमछा, टोपी मिनटों में हो रहे खत्म।

    3. कर्मचारियों को भीड़ और नोकझोंक का सामना करना पड़ रहा।

    शशि ठाकुर, नई दिल्ली। इस तपती सड़क पर लू के थपेड़ों के बीच रिक्शा चलाता हूं। अभी एक आटो चालक ने बताया सड़कों पर काम कर रहे मजदूर वर्ग व यात्रियों के लिए सरकार द्वारा मोबाइल हीट रिलीफ वैन चलाई गई है। जो दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने खड़ी है।

    उस पर तैनात कर्मचारी ठंडे पानी के साथ ओआरएस के पैकेट, गमछा व टोपी भी दे रहे हैं। जिसके बाद मैं ठंडा पानी पीने की चाह में वैन के पास आया और पांच मिनट लाइन में लगने के बाद मेरा नाम और फोन नंबर पहले कर्मचारियों ने एक रजिस्टर में लिखा। उसके बाद मुझे पानी और ओआरएस की एक पैकेट मिली, लेकिन गमछा व टोपी मेरे पहुंचने से पहले ही खत्म हो गया था। यह कहना है नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के बाहर रिक्शा चालक रामशरण का।

    वहीं, पहाड़गज निवासी रमेश ने कहा कि इस वैन का लोकेशन रोज बदल जाता है, मैं बुधवार को फिर आस लगाए खड़ा हूं कि मुझे आज पानी, ओआरएस के पैकेट के साथ गमछा व टोपी मिल ही जाएगा, लेकिन लाइन देखकर लगता है कि इंतजार ही करते रह जाऊंगा। यह कहानी केवल रामशरण या रमेश की नहीं है बल्कि दिल्ली सरकार की ''''मोबाइल हीट रिलीफ वैन'''' योजना की जमीनी हकीकत है।

    सरकार ने दिल्ली के हर जिले में इन वैनों को दौड़ाने का दावा बड़े जोर- शोर से किया था, लेकिन दिल्ली की आबादी के सामने यह गाड़ियां नाकाफी साबित हो रही है। आलम यह है कि अब तक यह वैन दिल्ली के ऐसे कई घनी आबादी वाले इलाके है जहां अब तक यह गाड़ी पहुंच नहीं पाई है।

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    वीआइपी जिले में राहत से ज्यादा हंगामा, कर्मचारियों से तीखी नोकझोंक

    अगर नई दिल्ली जिले की बात करें, तो यहां का माहौल राहत बांटने वाले कर्मचारियों के लिए अधिक दिक्कत भरा दिखाई दिया। भीषण तपन से बेहाल यात्रियों, कुलियों और स्थानीय कामगारों की भारी भीड़ जब इस वैन के इर्द-गिर्द जुटी तो स्थिति थोड़ी नियंत्रण से बाहर नजर आई। ठंडे पानी, मुफ्त मिलने वाले गमछे और टोपी पर झपटने की होड़ में इस वैन पर तैनात कर्मचारियों के साथ आम जनता की तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। कोई टोपी तो कोई गमछे के लिए कर्मचारियों से बहस करता नजर आया।

    इस अव्यवस्था का दूसरा बड़ा कारण यह है कि यह वैन हर दिन अलग-अलग स्थानों पर सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक खड़ी होती है, जिससे अन्य तय ठिकानों पर लोग बस सड़कें निहारते रह जाते हैं। वैन पर तैनात एक कर्मचारी ने नाम न बताने के एवज में बताया कि वैन में 500 लीटर पानी, 200 गमछे व टोपी और 800 ओआरएस के पैकेट पूरे दिनभर में लोगों को वितरित करने के लिए मिलते हैं।

    इसके लिए लोगों का नाम और फोन नंबर एक रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य है, क्योंकि इसका रिकार्ड हर रोज शाम को मुख्यालय में जमा कराना होता है, जिससे इस भीषण गर्मी में भी प्रक्रिया बेहद सुस्त और थकाऊ हो जाती है। दूसरा सामान खत्म पर होने के बाद लोगों की कर्मचारियों के साथ बहस होना रोज का काम हो गया है। इसके लिए कर्मचारियों को कोई पुलिस सुरक्षा तक नहीं दी गई है। कर्मचारियों को अपने स्तर पर ही सब कुछ देखना होता है। सरकार को वैनों की संख्या बढ़ाने के साथ ही कर्मचारियों की सुरक्षा की ओर भी ध्यान देना चाहिए।

    यमुनापार की लाखों की आबादी पर सिर्फ दो वैन, मिनटों में खत्म हो रहा पानी

    दूसरी ओर यमुनापार यानी पूर्वी और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हालात तो और भी ज्यादा भयावह हैं। लाखों की घनी आबादी और सबसे ज्यादा मजदूर वर्ग वाले इन दोनों जिलों को संभालने के लिए प्रशासन ने सिर्फ दो मोबाइल हीट रिलीफ वैन मैदान में उतारी हैं। इनमें से एक वैन पूर्वी जिले में और दूसरी उत्तर-पूर्वी जिले में दौड़ रही है। मुख्यालय से तय किए गए सरकारी रोस्टर के मुताबिक ये गाड़ियां सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक रोजाना पांच से छह चुनिंदा स्थानों पर पहुंचती हैं।

    प्रशासन का दावा है कि प्रत्येक वैन प्रतिदिन करीब 800 लीटर ठंडा पेयजल वितरित करने के साथ ही लोगों को ओआरएस का घोल, टोपी और गमछे बांटती है। लेकिन स्थानीय निवासियों और श्रमिकों का साफ कहना है कि जहां लाखों लोग पानी की एक-एक बूंद और छांव के लिए तरस रहे हों, वहां महज 800 लीटर पानी कुछ ही मिनटों में खत्म हो जाता है। इसके बाद वैन अगले ठिकाने के लिए रवाना हो जाती है और कतार में खड़े प्यासे लोग वैन का इंतजार करते रह जाते है।

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