दिल्ली में बढ़ा टीबी का खतरा, 12 हजार से अधिक नए मरीज मिले; घनी आबादी वाले इलाकों पर संकट ज्यादा
दिल्ली की स्लम बस्तियों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में टीबी के बढ़ते खतरे को देखते हुए एक विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाया गया है। इस अभियान के तहत 24 म ...और पढ़ें
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दिल्ली के घनी आबादी में बढ़ा टीबी का खतरा।

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी की स्लम बस्तियों, जेजे क्लस्टरों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में टीबी के बढ़ते खतरे ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। इसी को देखते हुए दिल्ली सरकार और राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) ने विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाया हुआ है। इसमें 24 मार्च से पांच मई के बीच 12,078 नए टीबी मरीजों की पहचान हुई है।
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह अभियान खास तौर पर स्लम इलाकों, आश्रय गृहों, नाइट शेल्टर, जेलों, प्रवासी मजदूर बस्तियों और अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों पर केंद्रित था, जहां संक्रमण फैलने का खतरा अधिक माना जाता है। अभियान के तहत विभाग ने दिल्ली के 38 हाई रिस्क वार्ड चिन्हित किए हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक नए मरीजों में लगभग 42 प्रतिशत मामले एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी यानी संक्रमण फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों में मिला। मरीजों में 1,323 बच्चे और 10,755 वयस्क शामिल हैं।
अभियान के दौरान 71,603 लोगों की स्क्रीनिंग
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अभियान के दौरान 71,603 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इसके लिए 224 कैंप हाई रिस्क क्षेत्रों और 79 कैंप सामूहिक आवास परिसरों में लगाए गए। हैंडहेल्ड डिजिटल एक्स-रे मशीनों और एआइ आधारित जांच तकनीक का इस्तेमाल कर आरंभिक संक्रमण स्तर पर मरीजों की पहचान की गई।
दिल्ली इकोनामिक सर्वे 2025-26 के अनुसार करीब 40 प्रतिशत दिल्लीवासी टीबी के जीवाणु से संक्रमित हैं, जबकि घनी आबादी, खराब वेंटिलेशन और कमजोर पोषण संक्रमण फैलने की बड़ी वजह माने जा रहे हैं।
सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत आधुनिक तकनीक के जरिए शुरुआती पहचान और इलाज पर जोर दिया जा रहा है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
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