दिल्ली में प्रदूषण पर DPCC की सख्त कार्रवाई, 300 स्थानों पर जांच कर 108 डीजल जनरेटर इकाइयों को नोटिस
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने प्रदूषण नियमों का उल्लंघन करने वाले डीजल जनरेटर सेटों के खिलाफ़ व्यापक जांच अभियान चलाया। 29 जनवरी से 3 फर ...और पढ़ें

डीजल जनरेटर इकाइकों को सील किया। फोटो: सांकेतिक

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राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। प्रदूषण से जंग में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के निर्देशों का उल्लंघन करने वाले डीज़ल जनरेटर सेटों के खिलाफ़ व्यापक जांच अभियान चलाया।
अभियान 29 जनवरी से तीन फरवरी के बीच पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में चलाया गया। इस दौरान 300 औद्योगिक और व्यावसायिक संस्थानों में लगे डीजल जनरेटर सेटों की जांच की गई। सीएक्यूएम के निर्देशों का उल्लंघन पाए जाने पर 108 इकाइयों को सीलिंग मेमो और कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।
जांच में पाया गया कि संबंधित प्रतिष्ठानों ने अपने जनरेटर सेटों को न तो स्वच्छ ईंधन तकनीक में बदला था और न ही उन पर अनिवार्य उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण लगाए गए थे। यह सीएक्यूएम के निर्देश संख्या 76 और 87 के तहत आवश्यक हैं। इनके अनुसार, बिना रेट्रोफिटेड उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण और पीएनजी आधारित ड्यूल फ्यूल किट वाले जनरेटर सेटों का उपयोग प्रतिबंधित है।
डीपीसीसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर पर्यावरणीय मुआवजा (ईसी) भी लगाया जाएगा और दंड की गणना तय मानकों के अनुसार की जाएगी। सीएक्यूएम के सभी मानकों का पूरा पालन होने, स्वीकृत उत्सर्जन नियंत्रण सिस्टम लगाए जाने या स्वच्छ ईंधन में परिवर्तन के बाद ही जनरेटर सेटों के संचालन की अनुमति दी जाएगी।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, “दिल्ली स्वच्छ हवा से समझौता नहीं कर सकती। जिन डीज़ल जनरेटर सेटों में स्वीकृत उत्सर्जन नियंत्रण सिस्टम नहीं लगे हैं, वे जनस्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा हैं। नियमों का पालन न करने वाली इकाइयों पर की गई यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि सीएक्यूएम के निर्देशों का उल्लंघन बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”