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    28 साल से फरार 'डॉ. झटका' गिरफ्तार, हरियाणा में पुलिसकर्मी को गोलियों से भूना था; मध्य प्रदेश से पकड़ा

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 09:19 PM (IST)

    दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने हरियाणा के एक पुलिसकर्मी की हत्या के मामले में 28 साल से फरार भगोड़े राजिंदर बैरागी उर्फ डॉ. झटका को मध्य प्रदेश से ग ...और पढ़ें

    दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में डॉ. झटका। फोटो: दिल्ली पुलिस

    दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में डॉ. झटका। फोटो: दिल्ली पुलिस

    HighLights

    1. राजिंदर बैरागी उर्फ डॉ. झटका 28 साल बाद गिरफ्तार

    2. हरियाणा पुलिसकर्मी की हत्या और कई मामलों में वांछित था

    3. 1999 में पुलिस हिरासत से फरार होकर पहचान बदली थी

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने हरियाणा के एक पुलिसकर्मी की हत्या के मामले में 28 साल से फरार चल रहे भगोड़ा घोषित अपराधी राजिंदर बैरागी उर्फ डॉ. झटका को गिरफ्तार कर लिया है।

    वह हरियाणा के पुलिसकर्मी की हत्या, दिल्ली और हरियाणा में हत्या के प्रयास के कई मामलों और यूपी पुलिस की हिरासत से हथकड़ी समेत फरार होने जैसे मामलों में वांछित था।

    पुराने केस की जांच में मिला सुराग

    क्राइम ब्रांच के डीसीपी चंदर कुमार सिंह ने बताया कि लंबे समय से फरार अपराधियों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी दौरान जनकपुरी थाने के 1997 के दो पुराने मामलों की जांच में राजिंदर का नाम सामने आया।

    वह वर्षों से फरार था और 2008 में रोहिणी कोर्ट ने उसे दोनों मामलों में भगोड़ा घोषित कर दिया था।

    फर्जी पहचान बनाकर रह रहा था

    जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि राजिंदर ने मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के जरिए नई पहचान बना ली थी। सब-इंस्पेक्टर नरेंद्र सिंह और हवलदार संजीव कुमार ने डिजिटल और तकनीकी विश्लेषण की मदद से उसकी नई पहचान, दिनचर्या और लोकेशन का पता लगाया।

    इसके बाद एसीपी सुरेश कुमार और इंस्पेक्टर संजय कौशिक के नेतृत्व में टीम ने 5 अगस्त को मध्य प्रदेश के अशोक नगर से उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को पहले मुंगावली कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड लिया गया, फिर द्वारका कोर्ट में पेश कर पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया गया।

    कबड्डी खिलाड़ी से बना 'डॉ. झटका'

    पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पहले कबड्डी खिलाड़ी था। इसी दौरान उसकी पहचान अपराधियों से हुई और वह अपराध की दुनिया में उतर गया। इसके बाद वह कबड्डी खिलाड़ी से डॉ. झटका बन गया।

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    शादी समारोह में हुई थी पुलिसकर्मी की हत्या

    पुलिस के मुताबिक, 10 मई 1998 को सोनीपत के सैयां खेड़ा गांव में एक शादी समारोह के दौरान दुल्हन पक्ष से उसका विवाद हो गया था। इसके बाद राजिंदर और उसके पांच साथियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी।

    इस गोलीबारी में दुल्हन के चाचा और हरियाणा पुलिस के जवान जय भगवान की मौके पर ही मौत हो गई। इस मामले में गन्नौर थाने में केस दर्ज हुआ था और बाद में सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था।

    हथकड़ी समेत पुलिस को चकमा देकर भागा

    14 फरवरी 1999 को यूपी पुलिस उसे गाजियाबाद जेल से सोनीपत कोर्ट ले जा रही थी। इसी दौरान गन्नौर रेलवे स्टेशन पर वह पुलिस को चकमा देकर हथकड़ी समेत फरार हो गया।

    शिक्षक बना, फिर झोलाछाप 

    फरार होने के बाद वह महाराष्ट्र के कोलाबा पहुंचा, जहां करीब एक साल तक केंद्रीय विद्यालय में शारीरिक शिक्षा शिक्षक के तौर पर काम किया। बाद में वह मध्य प्रदेश के मुंगावली चला गया और अपना नाम बदलकर राजिंदर सिंह यादव रख लिया।

    साल 2003 में उसने शादी की। उसकी पत्नी वहां के एक सरकारी अस्पताल में काम करती है। उसने खुद को झोलाछाप के रूप में स्थापित कर लिया और लोग उसे 'डॉ. झटका' के नाम से बुलाने लगे। इसके अलावा वह प्रॉपर्टी डीलिंग और ठेकेदारी का काम भी करने लगा।

    फर्जी दस्तावेज भी बनवाए

    पुलिस के मुताबिक, उसने फर्जी तरीके से अधिवास प्रमाणपत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड और वोटर आईडी भी बनवा लिए थे। उसके खिलाफ दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में 10 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।

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