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    DU में हॉस्टल संकट गहराया, 70000 से ज्यादा नए छात्रों के सामने रहने की चुनौती; महंगे PG बने मजबूरी

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 07:05 AM (IST)

    दिल्ली विश्वविद्यालय में नए सत्र के साथ ही हॉस्टल का गंभीर संकट गहरा गया है, जहां सीमित सीटों और कई कॉलेजों में सुविधा न होने से हजारों छात्रों को महं ...और पढ़ें

    दिल्ली विश्वविद्यालय के कला संकाय मे जाती छात्राएं। जागरण

    दिल्ली विश्वविद्यालय के कला संकाय मे जाती छात्राएं। जागरण

    HighLights

    1. डीयू में हॉस्टल सीटों की भारी कमी।

    2. हजारों छात्र महंगे पीजी, किराए के कमरों पर निर्भर।

    3. कई प्रमुख कॉलेजों में हॉस्टल की सुविधा नहीं।

    लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। डीयू में नए शैक्षणिक सत्र के साथ ही एक बार फिर हास्टल का संकट गहरा गया है। देशभर से हजारों छात्र पढ़ाई के लिए डीयू पहुंच रहे हैं, लेकिन सीमित हास्टल सीटों और कई कालेजों में छात्रावास की सुविधा ही नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को महंगे पीजी, किराये के कमरे और फ्लैट का सहारा लेना पड़ रहा है।

    इसका सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर और दूरदराज के राज्यों से आने वाले छात्रों पर पड़ रहा है।

    हॉस्टल सीटों की कं संख्या से बढ़ी मुश्किलें

    डीयू के 69 से अधिक कालेजों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थियों के मुकाबले विश्वविद्यालय के पास हास्टल सीटों की संख्या काफी कम है। सूत्रों के अनुसार डीयू के कालेजों के सभी हास्टलों को मिलाकर करीब 8 से 9 हजार सीटें ही उपलब्ध हैं, जबकि हर वर्ष 70 हजार से अधिक नए छात्र स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला लेते हैं। ऐसे में अधिकांश छात्रों को हास्टल नहीं मिल पाता।

    स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि डीयू के कई प्रमुख कालेजों में आज भी छात्रावास की सुविधा उपलब्ध नहीं है। शहीद भगत सिंह कालेज, कालेज आफ वोकेशनल स्टडीज (सीवीएस), महाराजा अग्रसेन कालेज, श्याम लाल कालेज, पीजीडीएवी कालेज, सत्यवती कालेज, शिवाजी कालेज, स्वामी श्रद्धानंद कालेज, अदिति महाविद्यालय और भगिनी निवेदिता कालेज समेत कई संस्थानों के छात्रों को शुरुआत से ही निजी आवास पर निर्भर रहना पड़ता है।

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    वहीं डीयू के आधे से ज्यादा कालेज में हास्टल की व्यवस्था ही नहीं है। आफ-कैंपस कालेजों में पढ़ने वाले छात्रों को सबसे अधिक परेशानी होती है।

    सत्यवती कालेज (मार्निंग) के प्रिंसिपल सुभाष कुमार सिंह ने बताया कि हमारा कालेज नौ एकड़ में है। हमारे पास इतनी जगह नहीं है कि बच्चों के लिए हास्टल बना सके। लेकिन हमने मंत्रालय में छात्रों के लिए हास्टल बनाने के लिए पत्र भेजा हुआ है।

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    छात्रों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ

    हास्टल नहीं मिलने के कारण छात्रों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। नार्थ और साउथ कैंपस के आसपास एक साधारण पीजी का मासिक किराया 12 हजार से 20 हजार रुपये तक पहुंच चुका है। इसके अलावा भोजन, बिजली और अन्य खर्च अलग से देने पड़ते हैं। कई छात्र आर्थिक कारणों से दाखिला लेने के बावजूद दिल्ली आने में कठिनाई महसूस करते हैं।

    राजधानी कालेज के प्रोफेसर हसंराज सुमन का कहना है कि विश्वविद्यालय में छात्र संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उसी अनुपात में नए हास्टल नहीं बन पाए हैं।

    उनका कहना है कि डीयू को नए छात्रावासों के निर्माण, मौजूदा हास्टलों की क्षमता बढ़ाने और जिन कालेजों में हास्टल नहीं हैं वहां प्राथमिकता के आधार पर छात्रावास शुरू करने की योजना बनानी चाहिए।

    इससे दूर-दराज के राज्यों से आने वाले हजारों विद्यार्थियों को राहत मिलेगी और उन्हें सुरक्षित व किफायती आवास उपलब्ध हो सकेगा।

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