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    DU VC योगेश सिंह Exclusive: टॉप-200 रैंकिंग, AI, CUET और नई सीटों पर क्या है दिल्ली यूनिवर्सिटी का प्लान?

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 05:25 AM (IST)

    प्रो. योगेश सिंह के नेतृत्व में दिल्ली विश्वविद्यालय ने क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में ऐतिहासिक छलांग लगाई है और एनईपी को प्रभावी ढंग से लागू किया है। विश् ...और पढ़ें

    डीयू कुलगुरु प्रो. योगेश सिंह।

    डीयू कुलगुरु प्रो. योगेश सिंह।

    HighLights

    1. क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में 199 स्थानों की ऐतिहासिक छलांग।

    2. एनईपी के प्रभावी क्रियान्वयन से छात्र-केंद्रित शिक्षा प्रणाली।

    3. शोध संस्कृति को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान और नए पाठ्यक्रम।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) आज सिर्फ राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में 199 स्थानों की ऐतिहासिक छलांग से लेकर एनईपी के प्रभावी क्रियान्वयन तक, विश्वविद्यालय में हर स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसमें 2021 में डीयू के कुलगुरु प्रो. योगेश सिंह का भी अहम रोल है।

    हाल ही में उन्हें पांच साल का सेवा विस्तार भी मिला है। इस तरह से वह डीयू में लगातार दूसरी बार कार्यकाल पाने वाले पहले कुलगुरु भी बन गए हैं। इसे देखते हुए विश्वविद्यालय की भावी योजनाओं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), शोध संस्कृति, एआइ के प्रभाव, छात्र कल्याण और सीयूईटी (कामन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) आदि पर दैनिक जागरण के स्वदेश कुमार और लोकेश शर्मा ने प्रो. योगेश सिंह से खास बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस संवाद के मुख्य अंश:

    प्रश्न डीयू ने क्यूएस रैंकिंग में 199 स्थानों का सुधार किया है। इस सफलता का राज क्या है और अगले पांच वर्षों का सबसे बड़ा लक्ष्य क्या है?

    जवाब : इस छलांग का सबसे बड़ा कारण हमारा रिसर्च और उसके इम्पैक्ट पर केंद्रित होना है। हमने अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्कोपस-इंडेक्स्ड शोध पत्रों को बढ़ावा दिया, नए शिक्षकों की भर्ती में रिसर्च क्षमता को प्राथमिकता दी और एनईपी के तहत अंडरग्रेजुएट स्तर से ही मजबूत शोध परंपरा को तैयार किया।

    अब हमारा अगला लक्ष्य अगले पांच वर्षों में दुनिया के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में जगह बनाना है। यद्यपि भारत की यूनिवर्सिटी श्रेणी में हम शीर्ष पर हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर अभी और मेहनत बाकी है। अंतिम ध्येय शीर्ष 100 में पहुंचने का है।

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    क्या विश्वविद्यालय में सीटें बढ़ाने की योजना है, और एनईपी के तहत पारंपरिक पाठ्यक्रमों में क्या बदलाव हो रहे हैं?

    जवाब: सीटें लगातार बढ़ाई जा रही हैं। नजफगढ़ में वीर सावरकर कालेज अगले वर्ष से शुरू होगा, साथ ही पूर्वी और पश्चिमी दिल्ली में नए परिसर विकसित हो रहे हैं। एक वर्षीय मास्टर्स प्रोग्राम भी शुरू किए गए हैं। एनईपी के आने से शिक्षा की पुरानी दीवारें ढह गई हैं।

    अब पूरा सिस्टम छात्र-केंद्रित है। छात्र अपनी पसंद से मेजर और माइनर विषय चुन सकते हैं, जैसे इंजीनियरिंग का छात्र इतिहास पढ़ सकता है और मनोविज्ञान का छात्र राजनीति विज्ञान।

    प्रश्न: एआइ के इस दौर में डीयू छात्रों को कैसे तैयार कर रहा है, और ''''हिंदू स्टडीज'''' जैसे नए विभाग शुरू करने के पीछे क्या सोच था?

    जवाब : एआइ से डरने की नहीं, बल्कि इसे एक ''''सहायक'''' के रूप में इस्तेमाल करने की जरूरत है। इंसान मालिक है और एआइ उसका सहायक। हमने ''''एआइ फार आल'''' जैसे कोर्स शुरू किए हैं, जहां छात्रों को सही ''''प्राम्प्ट लिखना'''' भी सिखाया जा रहा है।

    दूसरी ओर, भारत की हजारों साल पुरानी ज्ञान परंपरा को वैज्ञानिक व समकालीन दृष्टिकोण से समझने के लिए हिंदू स्टडीज विभाग शुरू किया गया है। इसे रोजगारोन्मुख बनाया गया है ताकि छात्र इसे प्रबंधन या अन्य विषयों के साथ जोड़कर बेहतर करियर बना सकें।

    प्रश्न: आर्थिक रूप से कमजोर, विदेशी और अनाथ छात्रों के लिए विश्वविद्यालय क्या विशेष सुविधाएं दे रहा है?

    जवाब : हमारा प्रयास रहता है कि कोई भी छात्र पैसों की तंगी से पढ़ाई न छोड़े। ''''विश्वविद्यालय इंटर्नशिप योजना'''' के तहत लगभग 1,000 छात्रों को हर महीने 5,000 रुपये दिए जाते हैं। अनाथ छात्रों की पूरी फीस माफ है और उनके लिए प्रत्येक कोर्स में दो सुपरन्यूमरेरी सीटें हैं।

    सिंगल गर्ल चाइल्ड के लिए भी विशेष प्रविधान हैं। रही बात विदेशी छात्रों की, तो राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शी व्यवस्था के तहत उनके लिए वैध पासपोर्ट-वीजा अनिवार्य है, जिसके लिए अलग सुपरन्यूमरेरी कोटा तय है।

    प्रश्न: आज के दौर में छात्रों में बढ़ता अवसाद एक बड़ी चुनौती है। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर डीयू कितना गंभीर है और शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य क्या होना चाहिए?

    जवाब: यह आज की सबसे चिंताजनक चुनौतियों में से एक है। यदि कोई छात्र अवसाद में जाए या आत्मघाती कदम उठाए, तो यह पूरे शिक्षा तंत्र के लिए आत्ममंथन का विषय है।

    शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और मानसिक मजबूती प्रदान करना है। इसके लिए सभी कालेजों और डीयू परिसर में काउंसलर्स तैनात किए गए हैं। भविष्य में डीयू में एक समर्पित नशामुक्ति सह परामर्श केंद्र स्थापित करने की भी योजना है।

    प्रश्न: सीयूईटी छात्रों के लिए कितना फायदेमंद रहा है? क्या इसके आने से 12वीं के छात्र बोर्ड की पढ़ाई को हल्के में लेने लगे हैं?

    जवाब : सीयूईटी ने प्रवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समान अवसर वाला बनाया है। इससे दूर-दराज और विभिन्न राज्य बोर्डों (जैसे बिहार, राजस्थान, हरियाणा) के मेधावी छात्रों को डीयू में बराबरी का मौका मिल रहा है।

    12वीं की पढ़ाई और सीयूईटी का सिलेबस काफी हद तक एक-दूसरे से जुड़ा है, इसलिए छात्र बोर्ड को हल्के में नहीं ले सकते। हालांकि, मेरा यह सुझाव जरूर है कि सीयूईटी परीक्षा देशभर में अलग-अलग शिफ्टों के बजाय एक ही समय पर आयोजित की जाएं, ताकि नार्मलाइजेशन को लेकर छात्रों में कोई भ्रम न रहे।

    प्रश्न : जंतर-मंतर पर पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन किया। इसमें जेन-जी के साथ असामाजिक तत्व भी नजर आए। इसे कैसे देखते हैं?

    जवाब : इस विषय पर मेरा बोलना उचित नहीं है।

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